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किसानों ने होली के साथ कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई, 30 मार्च को आंदोलन की रणनीति बनेगी

Mon, 29 Mar 2021 12:01 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 29 Mar 2021 12:01 AM IST
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farmers protest, holika dahan, agriculture law
होली के साथ ही जलाई गई कृषि कानून की प्रतियां - फोटो : Sonipat
सोनीपत। किसानों ने रविवार को कुंडली बॉर्डर धरनास्थल समेत अन्य जगहों पर होली के साथ कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। किसानों ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं, बल्कि वह आंदोलन को बढ़ाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि वह जिद छोड़कर किसानों की बात सुने। इसके साथ मोर्चा ने पांच अप्रैल को देशभर में एफसीआई कार्यालय के घेराव करने का आह्वान किया है। वहीं 30 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी। जबकि पंजाब के संगठनों की बैठक शनिवार को हुई, जिसमें सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन तेज करने की बात कही गई।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही एलान कर दिया था कि धरनास्थलों पर होली के साथ कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। जिसके तहत सभी धरनास्थलों पर होलिका दहन के साथ कानून की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया। कुंडली बार्डर पर किसान नेता डॉ. दर्शनपाल की अगुवाई में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई गई। किसान नेताओं ने कहा कि इन कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा व एमएसपी पर कानून बनाना ही पड़ेगा। डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद आंदोलन विरोधी कानून पास करना जनता के हितों पर चोट करना है। उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद केवल आंदोलन करने वालों को दबाना है। इससे प्रदेश के आमजन के अधिकारों का हनन किया गया है। हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान संपत्ति क्षति वसूली विधेयक 2021 के शीर्षक से पारित इस बिल में ऐसे खतरनाक प्रावधान हैं जो लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध होंगे।
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किसान नेताओं ने कहा कि यह कानून इस किसान आंदोलन को खत्म करने और किसानों की जायज मांगो से भागने के लिए लाया गया है। इसके तहत किसी भी आंदोलन के दौरान निजी या सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई आंदोलन करने वालों से की जाएगी। आंदोलन की योजना बनाने, उसको प्रोत्साहित करने वाले या किसी भी रूप में सहयोग करने वालों से नुकसान की वसूली की जा सकेगी। कानून के अनुसार किसी अदालत को अपील सुनने का अधिकार नहीं होगा। मोर्चा नेताओं ने कहा कि पिछले कई सालों से एफसीआई के बजट में कटौती की जा रही है। हाल ही एफसीआई ने फसलों की खरीद प्रणाली के नियम भी बदले। संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में यह तय किया गया है कि पांच अप्रैल को पूरे देश में एफसीआई बचाओ दिवस मनाया जाएगा और इसके तहत देशभर में एफसीआई दफ्तरों पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक घेराव किया जाएगा।
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