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रेल रोकने के बाद भी बातचीत का रास्ता नहीं खुला तो सरकार पर दबाव बनाने को बड़ा फैसला लेंगे किसान

Tue, 16 Feb 2021 12:58 AM IST
रोहतक ब्यूरो अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 16 Feb 2021 12:58 AM IST
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Farmer protest : Farmers will prepare a strategy to pressure the government
नारेबाजी करते किसान - फोटो : amar ujala

सरकार से बातचीत का प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है और रेल रोकने के बाद भी बातचीत का रास्ता नहीं खुलता है तो सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसान बड़ा फैसला लेंगे। किसान नेता अब किसी भी तरह से सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खोलना चाहते हैं। इसलिए ही संयुक्त किसान मोर्चा पर कई संगठन कड़ा फैसला लेने का दबाव बनाने में लगे हुए हैं तो कुछ अभी नरमी बरत रहे हैं। रेल रोकने के बाद सरकार का रुख देखकर अगली रणनीति तय होगी और यह माना जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन को बढ़ाने के लिए बड़ा एलान कर सकता है। इसके लिए मोर्चा से जुड़े सभी संगठनों से राय मांगी जा रही है, जिससे उसके आधार पर फैसला लिया जा सके।

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कृषि कानून रद्द कराने के लिए ढ़ाई माह से ज्यादा समय से किसान सड़कों पर डटे हुए हैं। इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो गृहमंत्री अमित शाह भी किसानों से वार्ता कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई हल अभी तक नहीं निकल सकता है, लेकिन यह जरूर है कि सरकार व किसानों के बीच बैठक का दौर लगातार जारी था। किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है।
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जहां सरकार चाहती है कि किसान बातचीत के लिए खुद पहल करें तो किसान भी सरकार से पहले की तरह प्रस्ताव की उम्मीद रखे हुए हैं। इसके लिए किसानों ने चक्का जाम भी किया तो अब रेल रोकने का एलान किया हुआ है। उसके बावजूद भी सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुलता नहीं दिख रहा है। जिससे अब संयुक्त मोर्चा से जुड़े कई किसान संगठनों का धैर्य जवाब देने लगा है और वह मोर्चा पर सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़ा फैसला लेने का दबाव बनाने में जुट गए हैं।
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भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने इसको लेकर मंशा साफ करते हुए किसान मोर्चा की बैठक में यह मुद्दा उठाने का फैसला कर लिया है तो भाकियू (रजि) के राकेश टिकैत, भाकियू अंबावता के ऋषिपाल अंबावता भी बड़ा फैसला लिए जाने के हक में खड़े होने लगे हैं। इनके अलावा भी मोर्चा के कई अन्य संगठन बड़ा फैसला लिए जाने की अपनी मंशा मोर्चा के नेताओं के सामने जता रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा रेल रोकने तक सरकार के रुख को देख रहा है और उसके बाद बड़ा फैसला लेने की तैयारी हो चुकी है। जिसका एलान रेल रोकने के बाद किया जाएगा तो जिस तरह से महापंचायत चल रही है, वह ऐसे ही सभी प्रदेशों में चलती रहेगी।

सरकार यह चाहती है कि आंदोलन को लंबा खींचते रहें और किसान परेशान होकर वापस चले जाए। ऐसा किसी भी हालत में नहीं होने वाला है। किसान अपने हक के लिए लड़ाई कर रहा है और वह जीतने के बाद ही वापस जाएगा। सरकार बातचीत भी इसलिए ही नहीं कर रही है, जिससे किसान परेशान होने लगे। सरकार के इस रवैये को देखते हुए किसानों को बड़ा फैसला लेना होगा और संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में अपने संगठन की ओर से इस बात को रखा जाएगा। जिससे सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया जा सके।


गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा

सरकार अब बातचीत करने की जगह आंदोलन कर रहे किसानों को बदनाम करने में लगी है। सरकार सोच रही है कि किसान परेशान होकर यहां से वापस चले जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। किसान आखिरी दम तक अपनी लड़ाई को लड़ेगा और अब आंदोलन में बड़े फैसले लेने होंगे। जिससे सरकार को पता चल सके कि किसान किसी भी तरह से कमजोर नहीं है। रेल रोकने के बाद बड़ा कार्यक्रम तय करने की तैयारी है।
शमशेर दहिया, महासचिव, भाकियू अंबावता

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