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सरकार पर दबाव बनाने में जुटे किसान, 15 दिन में संख्या हुई दोगुनी
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अंकित चौहान
सोनीपत। किसानों का आंदोलन लंबा होता जा रहा है और सरकार से कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका है। अब किसानों और सरकार में बातचीत बंद हो गई है, जिससे सरकार पर किसान दबाव बनाने में जुट गए हैं। इसके लिए किसानों के जत्थे लगातार बुलाए जा रहे हैं तो अन्य राज्यों में किसानों को ज्यादा से ज्यादा बुलाने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
हालात यह है कि अकेले पंजाब से दो दिन में करीब 15 हजार से ज्यादा किसान कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए हैं और वहां किसानों का पड़ाव बढ़ता जा रहा है। इस तरह किसानों को बढ़ता देखकर खुफिया एजेंसियों की शरारती तत्वों के बवाल करने की आशंका के कारण अलर्ट भी जारी कर दिया गया है और अब पूरे जिले में धारा-144 लगा दी गई है। जिसके उल्लंघन पर कार्रवाई की बात कही गई है।
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने 27 नवंबर से नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। जहां पहले दिन करीब 2 हजार ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों में 25 हजार किसान कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहीं उसके बाद से किसान लगातार बढ़ते जा रहे हैं और 15 दिन के अंदर किसान दोगुने हो गए हैं। जहां पंजाब से किसानों का लगातार ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों में आना जारी है तो हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान व अन्य राज्यों के किसानों का धीरे-धीरे पहुंचना जारी है।
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किसानों का पड़ाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब किसानों का पड़ाव केएमपी व केजीपी का जीरो प्वाइंट फ्लाईओवर भी चंडीगढ़ की ओर पार कर गया है। किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में किसानों से संपर्क करके उनको कुंडली बॉर्डर पर बुलाने में जुटे हुए हैं। किसान प्रतिनिधि वहां भीड़ जुटाकर सरकार पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। आंदोलन की यह रूपरेखा तभी बनाई गई है, जब से सरकार के साथ किसान प्रतिनिधियों की बातचीत बंद हुई है। किसानों के आंदोलन की यह रणनीति काफी हद तक सफल भी होती दिख रही है और सरकार की ओर से बातचीत के रास्ता खुला होने की बात कही जाने लगी है। लेकिन किसान प्रतिनिधियों के पास अभी तक अधिकारिक बुलावा नहीं आया है और उसका ही इंतजार किया जा रहा है। जिससे बुलावा आने पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
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खुफिया एजेंसियों की बवाल की आशंका पर अलर्ट, जिले में धारा 144 लागू
केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों ने किसानों के धरने में भीड़ बढ़ती देखकर बवाल की आशंका जताई है। जिसको देखते हुए डीसी श्यामलाल पूनिया ने जिलेभर में धारा-144 लगाने का आदेश जारी किया है। डीसी ने अपने आदेश में कहा है कि खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट है कि किसान आंदोलन में शरारती तत्व शामिल होकर बवाल करा सकते हैं और उससे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। जिससे जिलेभर में धारा-144 लागू की जाती है और जिले में प्रवेश व एक जगह पर पांच से ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं हथियार लेकर चलने के साथ ही रखने पर भी रोक लगा दी गई है।
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कुंडली बॉर्डर पर किसान लगातार पहुंच रहे हैं और देशभर से पिछले कुछ दिनों में 25 हजार से ज्यादा किसान यहां आए हैं। हर किसी की केवल यही मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार कृषि कानूनों को रद्द कर देती है तो किसान आराम से अपने घर चले जाएंगे और कानून रद्द नहीं किए जाने पर यहां बैठे रहेंगे। सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है, जबकि उसे किसानों का हित देखते हुए कृषि कानून अब तक रद्द कर देने चाहिए थे। यहां किसान अभी बढ़ रहे हैं और सरकार को यह भारी पड़ सकता है।
- गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा
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किसान लगातार बढ़ते जा रहे हैं और पंजाब से हजारों किसान यहां आए हैं। अब यह आंदोलन बहुत बड़ा हो गया है, जिसको सरकार संभाल भी नहीं पाएगी। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द किसानों की मांगों को मानकर कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए। किसानों को सरकार से बातचीत का प्रस्ताव मिलता है तो हम बातचीत जरूर करेंगे। लेकिन वह बातचीत किसानों के हित में होनी चाहिए। कृषि कानून जल्द ही रद्द नहीं किए गए तो किसानों का यह आंदोलन बढ़ता जाएगा।
- बलबीर सिंह राजेवाल, अध्यक्ष भाकियू पंजाब
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सोनीपत। किसानों का आंदोलन लंबा होता जा रहा है और सरकार से कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका है। अब किसानों और सरकार में बातचीत बंद हो गई है, जिससे सरकार पर किसान दबाव बनाने में जुट गए हैं। इसके लिए किसानों के जत्थे लगातार बुलाए जा रहे हैं तो अन्य राज्यों में किसानों को ज्यादा से ज्यादा बुलाने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
हालात यह है कि अकेले पंजाब से दो दिन में करीब 15 हजार से ज्यादा किसान कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए हैं और वहां किसानों का पड़ाव बढ़ता जा रहा है। इस तरह किसानों को बढ़ता देखकर खुफिया एजेंसियों की शरारती तत्वों के बवाल करने की आशंका के कारण अलर्ट भी जारी कर दिया गया है और अब पूरे जिले में धारा-144 लगा दी गई है। जिसके उल्लंघन पर कार्रवाई की बात कही गई है।
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कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने 27 नवंबर से नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। जहां पहले दिन करीब 2 हजार ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों में 25 हजार किसान कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहीं उसके बाद से किसान लगातार बढ़ते जा रहे हैं और 15 दिन के अंदर किसान दोगुने हो गए हैं। जहां पंजाब से किसानों का लगातार ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों में आना जारी है तो हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान व अन्य राज्यों के किसानों का धीरे-धीरे पहुंचना जारी है।
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किसानों का पड़ाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब किसानों का पड़ाव केएमपी व केजीपी का जीरो प्वाइंट फ्लाईओवर भी चंडीगढ़ की ओर पार कर गया है। किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में किसानों से संपर्क करके उनको कुंडली बॉर्डर पर बुलाने में जुटे हुए हैं। किसान प्रतिनिधि वहां भीड़ जुटाकर सरकार पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। आंदोलन की यह रूपरेखा तभी बनाई गई है, जब से सरकार के साथ किसान प्रतिनिधियों की बातचीत बंद हुई है। किसानों के आंदोलन की यह रणनीति काफी हद तक सफल भी होती दिख रही है और सरकार की ओर से बातचीत के रास्ता खुला होने की बात कही जाने लगी है। लेकिन किसान प्रतिनिधियों के पास अभी तक अधिकारिक बुलावा नहीं आया है और उसका ही इंतजार किया जा रहा है। जिससे बुलावा आने पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
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खुफिया एजेंसियों की बवाल की आशंका पर अलर्ट, जिले में धारा 144 लागू
केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों ने किसानों के धरने में भीड़ बढ़ती देखकर बवाल की आशंका जताई है। जिसको देखते हुए डीसी श्यामलाल पूनिया ने जिलेभर में धारा-144 लगाने का आदेश जारी किया है। डीसी ने अपने आदेश में कहा है कि खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट है कि किसान आंदोलन में शरारती तत्व शामिल होकर बवाल करा सकते हैं और उससे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। जिससे जिलेभर में धारा-144 लागू की जाती है और जिले में प्रवेश व एक जगह पर पांच से ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं हथियार लेकर चलने के साथ ही रखने पर भी रोक लगा दी गई है।
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कुंडली बॉर्डर पर किसान लगातार पहुंच रहे हैं और देशभर से पिछले कुछ दिनों में 25 हजार से ज्यादा किसान यहां आए हैं। हर किसी की केवल यही मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार कृषि कानूनों को रद्द कर देती है तो किसान आराम से अपने घर चले जाएंगे और कानून रद्द नहीं किए जाने पर यहां बैठे रहेंगे। सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है, जबकि उसे किसानों का हित देखते हुए कृषि कानून अब तक रद्द कर देने चाहिए थे। यहां किसान अभी बढ़ रहे हैं और सरकार को यह भारी पड़ सकता है।
- गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा
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किसान लगातार बढ़ते जा रहे हैं और पंजाब से हजारों किसान यहां आए हैं। अब यह आंदोलन बहुत बड़ा हो गया है, जिसको सरकार संभाल भी नहीं पाएगी। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द किसानों की मांगों को मानकर कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए। किसानों को सरकार से बातचीत का प्रस्ताव मिलता है तो हम बातचीत जरूर करेंगे। लेकिन वह बातचीत किसानों के हित में होनी चाहिए। कृषि कानून जल्द ही रद्द नहीं किए गए तो किसानों का यह आंदोलन बढ़ता जाएगा।
- बलबीर सिंह राजेवाल, अध्यक्ष भाकियू पंजाब