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Sonipat News: अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
Mon, 01 Jun 2026 08:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:04 PM IST
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फोटो : सोनीपत के सेक्टर-12 में श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं रामकथा के दौरान उपस्थित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। श्री नीलकंठ शिव मंदिर, सेक्टर-12 में श्रीराम परिवार संस्था की ओर से श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं रामकथा का आयोजन किया गया। इसमें संस्था प्रमुख ओम प्रकाश अरोड़ा ने महर्षि गौतम और अहिल्या का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग अहिल्या उद्धार के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें प्रभु राम अहिल्या को उनके श्राप से मुक्त करते हैं। विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण जब मिथिला जा रहे थे तब मार्ग में उन्हें एक निर्जन और उजड़ा हुआ आश्रम दिखाई दिया।
श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्र ने बताया कि यह महर्षि गौतम का आश्रम है। महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या अत्यंत रूपवती थीं। एक बार देवराज इंद्र ने काम वासना के वश में होकर महर्षि गौतम का रूप धारण किया और आश्रम में प्रवेश कर अहिल्या के साथ छल किया।
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जब महर्षि गौतम स्नान करके लौटे तो उन्होंने इंद्र को पहचान लिया। क्रोध में आकर उन्होंने इंद्र को श्राप दिया और अपनी पत्नी अहिल्या को यह श्राप दिया कि तुम यहां पत्थर बनकर बिना अन्न-जल के वर्षों तक कठोर तप करोगी। केवल श्रीराम के चरण स्पर्श होने से ही तुम्हारा उद्धार होगा।
महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को अहिल्या की कथा सुनाई और बताया कि वह तुम्हारे चरण कमलों की प्रतीक्षा कर रही है। यह सुनकर श्रीराम उस आश्रम में गए। प्रभु श्रीराम के चरणों की धूल लगते ही अहिल्या श्राप से मुक्त हो गईं। वह अपने वास्तविक स्वरूप में आ गईं।
प्रभु श्रीराम के दर्शन कर अहिल्या भावुक हो गईं। उन्होंने श्रीराम की स्तुति की। इसके पश्चात वह पति महर्षि गौतम के पास लौट गईं। महर्षि ने उन्हें सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस अवसर पर श्याम रहेजा, सूरज कांत, ललित बत्रा, राकेश बहल, महेश पांडे, रमाकांत, मेहरचंद, दिनेश अरोड़ा, मनोज, धीरज व भूषण उपस्थित रहे।
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सोनीपत। श्री नीलकंठ शिव मंदिर, सेक्टर-12 में श्रीराम परिवार संस्था की ओर से श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं रामकथा का आयोजन किया गया। इसमें संस्था प्रमुख ओम प्रकाश अरोड़ा ने महर्षि गौतम और अहिल्या का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग अहिल्या उद्धार के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें प्रभु राम अहिल्या को उनके श्राप से मुक्त करते हैं। विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण जब मिथिला जा रहे थे तब मार्ग में उन्हें एक निर्जन और उजड़ा हुआ आश्रम दिखाई दिया।
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श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्र ने बताया कि यह महर्षि गौतम का आश्रम है। महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या अत्यंत रूपवती थीं। एक बार देवराज इंद्र ने काम वासना के वश में होकर महर्षि गौतम का रूप धारण किया और आश्रम में प्रवेश कर अहिल्या के साथ छल किया।
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जब महर्षि गौतम स्नान करके लौटे तो उन्होंने इंद्र को पहचान लिया। क्रोध में आकर उन्होंने इंद्र को श्राप दिया और अपनी पत्नी अहिल्या को यह श्राप दिया कि तुम यहां पत्थर बनकर बिना अन्न-जल के वर्षों तक कठोर तप करोगी। केवल श्रीराम के चरण स्पर्श होने से ही तुम्हारा उद्धार होगा।
महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को अहिल्या की कथा सुनाई और बताया कि वह तुम्हारे चरण कमलों की प्रतीक्षा कर रही है। यह सुनकर श्रीराम उस आश्रम में गए। प्रभु श्रीराम के चरणों की धूल लगते ही अहिल्या श्राप से मुक्त हो गईं। वह अपने वास्तविक स्वरूप में आ गईं।
प्रभु श्रीराम के दर्शन कर अहिल्या भावुक हो गईं। उन्होंने श्रीराम की स्तुति की। इसके पश्चात वह पति महर्षि गौतम के पास लौट गईं। महर्षि ने उन्हें सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस अवसर पर श्याम रहेजा, सूरज कांत, ललित बत्रा, राकेश बहल, महेश पांडे, रमाकांत, मेहरचंद, दिनेश अरोड़ा, मनोज, धीरज व भूषण उपस्थित रहे।