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डेंगू का डंक : हांफने लगा खानपुर मेडिकल कॉलेज
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
Updated Mon, 28 Sep 2015 12:46 AM IST
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डेंगू के डंक से जहां जिले में लोग बेहाल हैं, वहीं लगातार रेफर केस का दबाव झेल रहा खानपुर मेडिकल कॉलेज भी हांफने लगा है। हालत यह है कि नशा मुक्ति केंद्र तक को डेंगू वार्ड बनाया गया है। कॉलेज में पिछले 25 दिन में 3200 लोग बुखार से पीड़ित आए, जिनमें से 1326 को डेंगू पॉजीटिव घोषित किया जा चुका है। यहां अब भी 245 डेंगू पीड़ित दाखिल हैं।
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मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि अगर इसी रफ्तार से डेंगू पीड़ित यहां आते रहे तो कॉलेज प्रशासन को हाथ खड़े करने पड़ सकते हैं, क्योंकि मेडिकल में मरीजों को रखने के लिए जगह कम पड़ने लगी है।
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इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज में चार डेंगू वार्ड बनने के बाद भी रोगी मेडिकल प्रशासन की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। मरीजों की मानें तो मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सही तरीके से देखभाल नहीं की जाती। मेडिकल प्रशासन की इसी व्यवस्था से नाखुश होकर मरीज निजी अस्पतालों का सहारा लेने पर मजबूर हो रहे हैं।
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हर रोज आ रहे हैं तीन सौ मरीज
महिला मेडिकल कॉलेज में हर रोज तीन सो से ज्यादा मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें औसतन 70 प्रतिशत मरीज बुखार से पीड़ित होते हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेडिकल प्रशासन ने यहां चार डेंगू वार्ड में 250 बेडों की अलग से व्यवस्था की है।
वहीं मरीजों की संख्या को देखते हुए मेडिकल प्रशासन के सारे इंतजाम कम पड़ रहे हैं। इससे मेडिकल प्रशासन ने गैलरी मे भी डेंगू के मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था की है। इसके बावजूद हालात ये हैं कि यहां एक बेड पर दो से तीन मरीजों का इलाज हो रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के दावे खोखले
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग करवा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि फॉगिंग के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। अकेले सोनीपत मेें अभी तक सबसे ज्यादा लोगों की डेंगू से मौत हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पुष्टि करने से कतरा रहा है।
सोनीपत जिले से सबसे ज्यादा डेंगू पीड़ित
महिला मेडिकल कॉलेज में अभी तक 1336 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा मरीज सोनीपत जिले के हैं। पिछले दो दिन से मेडिकल में 257 मरीज दाखिल हुए हैं, जिनमें 125 सोनीपत के, 43 मरीज पानीपत के, 16 मरीज जींद के, आठ रोहतक तथा आठ यूपी के रहने वाले हैं।
नहीं होती सही तरीके से देखभाल
मरीज रमेश भठगांव निवासी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सही तरीके से देखभाल नहीं की जाती। यहां मरीजों के लिए अलग से डेंगू वार्ड तो बना दिए, लेकिन इसमें कोई पर्याप्त सुविधा नहीं दी गई हैं। दिन में केवल एक या दो बार डॉक्टर मरीजों की जांच करने के आते हैं। मरीजों को वार्ड में नर्सों के भरोसे छोड़ा हुआ है।
क्या कहते हैं निदेशक
मेडिकल निदेशक डॉ. आरसी सिवाच ने कहा कि डेंगू के मरीजों को देखते हुए आपातकालीन विभाग से अलग चार वार्ड अलग बनाए गए हैं, जिनमें 250 बेड की व्यवस्था है। डेंगू पीड़ितों के लिए स्टाफ व लैब की अलग से व्यवस्था की गई है, लेकिन मरीजों की बढ़ रही संख्या चिंता का विषय है। अगर आने वाले समय में यही हालात रहे तो मेडिकल प्रशासन जल्द हाथ खड़े कर सकता है, क्योंकि 250 बेड का इंतजाम करना तीन हॉस्पिटल चलाने जितना है।
आंकड़ों से कतरा रहा स्वास्थ्य विभाग
सीएमओ कार्यालय डेंगू के आंकड़ों से कतरा रहा है। जिले में अब तक डेंगू से पीड़ित 22 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन विभाग केवल एक मौत की पुष्टि कर रहा है। साथ ही केवल 37 लोगों को पॉजीटिव माना गया है। सीएमओ जसवंत पूनिया कहते हैं कि जिन 21 और लोगों की मौत हुई थी, उसकी जांच सिविल अस्पताल की लैब में नहीं करवाई गई। ऐसे में कैसे डेंगू से मौत मानी जा सकती है।