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Sonipat News: रेवली का आशीष बना नेवी में लेफ्टिनेंट
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फोटो:25: लेफ्टिनेंट बना आशीष डागर। स्रोत परिजन
सोनीपत। गांव रेवली के निवासी आशीष डागर ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयन हासिल किया है। आशीष की इस उपलब्धि से न केवल उसका परिवार बल्कि पूरा गांव गर्वित है।
आशीष के पिता रमेश डागर एक निजी कंपनी में चालक के पद पर कार्यरत हैं। आठवीं पास रमेश डागर ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। मां सुमन देवी एक गृहिणी हैं और बेटे की सफलता पर खुश हैं। आशीष 22 दिसंबर को 18 वर्ष का होगा। उसने दसवीं कक्षा रुक्मिणी देवी स्कूल से 97 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
इसके बाद दिल्ली के घोगा स्थित एक सरकारी स्कूल से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहने वाले आशीष को पिता ने जेईई मेन्स की कोचिंग के लिए दिल्ली भेजा था लेकिन आशीष का झुकाव देश सेवा की ओर था।
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उसने तय कर लिया था कि वह सेना में जाकर देश की रक्षा करेगा। आशीष का सपना अब हकीकत बन चुका है और वह आगे चलकर देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहता है। गांव में उसकी सफलता को लेकर लोगों में गर्व और खुशी का माहौल है।
युवाओं के लिए वह प्रेरणा बन गया है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। गांव के बुजुर्गों, शिक्षकों और युवाओं ने आशीष को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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आशीष के पिता रमेश डागर एक निजी कंपनी में चालक के पद पर कार्यरत हैं। आठवीं पास रमेश डागर ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। मां सुमन देवी एक गृहिणी हैं और बेटे की सफलता पर खुश हैं। आशीष 22 दिसंबर को 18 वर्ष का होगा। उसने दसवीं कक्षा रुक्मिणी देवी स्कूल से 97 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।
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इसके बाद दिल्ली के घोगा स्थित एक सरकारी स्कूल से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहने वाले आशीष को पिता ने जेईई मेन्स की कोचिंग के लिए दिल्ली भेजा था लेकिन आशीष का झुकाव देश सेवा की ओर था।
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उसने तय कर लिया था कि वह सेना में जाकर देश की रक्षा करेगा। आशीष का सपना अब हकीकत बन चुका है और वह आगे चलकर देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहता है। गांव में उसकी सफलता को लेकर लोगों में गर्व और खुशी का माहौल है।
युवाओं के लिए वह प्रेरणा बन गया है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। गांव के बुजुर्गों, शिक्षकों और युवाओं ने आशीष को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।