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12 साल बाद 12 गांवों के लोग पंचाय चुनाव में चुनेंगे अपना प्रतिनिधि
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नगर निगम से बाहर हुआ गांव मुरथल।
- फोटो : Sonipat
जिले के 12 गांव ऐसे हैं जहां के लोगों ने 12 साल पहले पंचायत चुनाव के लिए मतदान किया था। बाद में चुनाव आने से पहले ही इन गांवों को सोनीपत नगर निगम में शामिल कर लिया गया था। नगर निगम में जोड़ने के बाद इन गांवों में विरोध शुरू हो गया। ग्रामीणों का विरोध बढ़ता देख नगर निगम के चुनाव से पहले ही इन्हें बाहर कर दिया गया था। हालांकि तब तक अन्य गांवों में पंचायत चुनाव हो चुके थे। ऐसे में यह गांव फिर चुनाव से वंचित रह गए। अब 12 साल के अंतराल के बाद इन गांवों के लोग पंचायती चुनाव में भाग ले सकेंगे।
विकास कार्यों के लिए जूझ रहे ग्रामीण इस बार मतदान कर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। इन गांवों में इससे पहले वर्ष 2010 में पंच-सरपंच पद के लिए चुनाव कराया गया था। उसके बाद से उन्हें मतदान का अवसर नहीं मिल सका था।
सोनीपत को जुलाई 2015 में नगर निगम बनाया गया तो शहर के आसपास के 26 गांवों को निगम में शामिल कर लिया गया। गांवों को निगम में शामिल होने के बाद चुनाव में देरी होने के साथ ही कई तरह के टैक्स भी बिलों में जुड़कर आए तो कई गांवों के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया था। गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग उठी और ग्रामीणों ने इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बना दी। 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया तो मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा था। उन्होंने 2 जून, 2018 को 12 गांवों को निगम से बाहर करने की घोषणा कर दी। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई। एक साल बाद राज्यपाल से मंजूरी मिलने पर विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव ने निगम से बाहर हुए 12 गांवों में पंचायती राज लागू कर दिया था।
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जून, 2019 में वहां पर फिर से पंचायती राज लागू कर दिया गया था। इस बीच वर्ष 2016 में पंचायती चुनाव कराए जा चुके थे। ऐसे में 12 गांव के लोग अपने प्रतिनिधि चुनने से वंचित रह गए। इन गांवों में बीच में मतदान नहीं कराया गया। तब निर्णय हुआ कि फरवरी, 2021 में प्रदेशभर की अन्य पंचायत के चुनाव के समय ही इन गांवों में चुनाव करा दिया जाएगा। फरवरी वर्ष 2016 में चयनित हुई पंचायतों का कार्यकाल भी पूरा हो गया, लेकिन उसके बाद से ही पंचायत चुनाव नहीं हो सके। अब सरकार जल्द ही पंचायत चुनाव कराने जा रही है। ऐसे में निगम में शामिल करने के बाद बाहर निकाले गए 12 गांवों के लोगों को भी अब मतदान कर अपने पंच-सरपंच चुनने का मौका मिल सकेगा।
विकास की राह जोह रहे ग्रामीण
निगम में शामिल करने के बाद बाहर किए गए गांवों में वर्ष 2015 तक सरपंच रहे। उसके बाद उन्हें निगम में शामिल कर लिया गया। लंबे विरोध के बाद निगम से बाहर तो कर दिया गया, लेकिन पंचायती चुनाव नहीं हो सके। ऐसे में प्रतिनिधि के अभाव में विकास कार्यों की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों पर आ गई। जिसके बाद से गांवों में काम ठप हो गए। ग्रामीण भी मानते हैं कि सरपंच को कहकर जो विकास कार्य करवाए जा सकते थे, वह प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने से नहीं हो सके। ऐसे में अब वह अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। जिससे विकास को रफ्तार मिल सकेगी।
इन गांवों को निगम से बाहर कर किया
निगम से दीपालपुर, मुकीमपुर, खेवड़ा, मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बैंयापुर, हरसाना, बहालगढ़, असावरपुर को बाहर किया गया है। इन गांवों में दोबारा से पंचायती राज लागू कर दिया गया है।
क्या कहते हैं ग्राणीण
निगम से बाहर हुए गांवों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो चुके हैं। विकास कार्य नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं की जा रही। अब सरपंच का चुनाव कराकर गांवों में विकास कार्य करा सकेंगे। हम लंबे समय से चुनाव का इंतजार कर रहे थे। हरिप्रकाश आंतिल, गांव असावरपुर
जब गांवों को निगम क्षेत्र में शामिल किया गया तो इक्का-दुक्का काम हुए थे। बाद में गांव निगम से बाहर हो गए। उसके बाद से विकास कार्य नहीं हो पा रहे। गांव की गलियों में दूषित पानी भरा हुआ है। उसकी निकासी और गलियों में सफाई तक का संकट है। पंचायती राज विभाग सुध नहीं ले रहा है। शिकायत करने का भी कोई फायदा नहीं है। -रामकिशन फौजी, गांव खेवड़ा
निगम से बाहर हुए गांवों में विकास का पहिया थम गया है। गांव के सरपंच जिस तरह आगे आकर विकास कार्य कराते हैं उस तरह अधिकारी काम नहीं करा पाते। सरपंच पर काम कराने को लेकर कई तरह दबाव होते हैं, उसके विपरीत अधिकारियों तक तो आम ग्रामीण की पहुंच तक संभव नहीं है। ऐसे में पंचायत चुनाव होने के बाद ही गांवों में विकास संभव हो सकेगा। ऐसे में ग्रामीण जल्द से जल्द चुनाव कराकर अपने प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं। -संजय आंतिल, गांव खेवड़ा
निगम में शामिल करने के बाद गांव में टैक्स की भरमार हो गई थी। हमारे गांव ने शुरुआत से ही नगर निगम से बाहर करने की मांग उठानी शुरू कर दी थी। गांव को निगम से बाहर तो कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं हो सके। चुनाव नहीं होने के कारण गांव की पंचायत का गठन नहीं हुआ और विकास कार्य ठप हो गए। अब जल्द चुनाव होने जा रहे हैं। जिसे लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। सभी मिलकर पंच-सरपंच का चुनाव करेंगे। उसके बाद विकास तेजी हो सकेगा। -नरेंद्र, गांव मुरथल
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विकास कार्यों के लिए जूझ रहे ग्रामीण इस बार मतदान कर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। इन गांवों में इससे पहले वर्ष 2010 में पंच-सरपंच पद के लिए चुनाव कराया गया था। उसके बाद से उन्हें मतदान का अवसर नहीं मिल सका था।
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सोनीपत को जुलाई 2015 में नगर निगम बनाया गया तो शहर के आसपास के 26 गांवों को निगम में शामिल कर लिया गया। गांवों को निगम में शामिल होने के बाद चुनाव में देरी होने के साथ ही कई तरह के टैक्स भी बिलों में जुड़कर आए तो कई गांवों के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया था। गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग उठी और ग्रामीणों ने इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बना दी। 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया तो मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा था। उन्होंने 2 जून, 2018 को 12 गांवों को निगम से बाहर करने की घोषणा कर दी। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई। एक साल बाद राज्यपाल से मंजूरी मिलने पर विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव ने निगम से बाहर हुए 12 गांवों में पंचायती राज लागू कर दिया था।
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जून, 2019 में वहां पर फिर से पंचायती राज लागू कर दिया गया था। इस बीच वर्ष 2016 में पंचायती चुनाव कराए जा चुके थे। ऐसे में 12 गांव के लोग अपने प्रतिनिधि चुनने से वंचित रह गए। इन गांवों में बीच में मतदान नहीं कराया गया। तब निर्णय हुआ कि फरवरी, 2021 में प्रदेशभर की अन्य पंचायत के चुनाव के समय ही इन गांवों में चुनाव करा दिया जाएगा। फरवरी वर्ष 2016 में चयनित हुई पंचायतों का कार्यकाल भी पूरा हो गया, लेकिन उसके बाद से ही पंचायत चुनाव नहीं हो सके। अब सरकार जल्द ही पंचायत चुनाव कराने जा रही है। ऐसे में निगम में शामिल करने के बाद बाहर निकाले गए 12 गांवों के लोगों को भी अब मतदान कर अपने पंच-सरपंच चुनने का मौका मिल सकेगा।
विकास की राह जोह रहे ग्रामीण
निगम में शामिल करने के बाद बाहर किए गए गांवों में वर्ष 2015 तक सरपंच रहे। उसके बाद उन्हें निगम में शामिल कर लिया गया। लंबे विरोध के बाद निगम से बाहर तो कर दिया गया, लेकिन पंचायती चुनाव नहीं हो सके। ऐसे में प्रतिनिधि के अभाव में विकास कार्यों की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों पर आ गई। जिसके बाद से गांवों में काम ठप हो गए। ग्रामीण भी मानते हैं कि सरपंच को कहकर जो विकास कार्य करवाए जा सकते थे, वह प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने से नहीं हो सके। ऐसे में अब वह अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। जिससे विकास को रफ्तार मिल सकेगी।
इन गांवों को निगम से बाहर कर किया
निगम से दीपालपुर, मुकीमपुर, खेवड़ा, मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बैंयापुर, हरसाना, बहालगढ़, असावरपुर को बाहर किया गया है। इन गांवों में दोबारा से पंचायती राज लागू कर दिया गया है।
क्या कहते हैं ग्राणीण
निगम से बाहर हुए गांवों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो चुके हैं। विकास कार्य नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं की जा रही। अब सरपंच का चुनाव कराकर गांवों में विकास कार्य करा सकेंगे। हम लंबे समय से चुनाव का इंतजार कर रहे थे। हरिप्रकाश आंतिल, गांव असावरपुर
जब गांवों को निगम क्षेत्र में शामिल किया गया तो इक्का-दुक्का काम हुए थे। बाद में गांव निगम से बाहर हो गए। उसके बाद से विकास कार्य नहीं हो पा रहे। गांव की गलियों में दूषित पानी भरा हुआ है। उसकी निकासी और गलियों में सफाई तक का संकट है। पंचायती राज विभाग सुध नहीं ले रहा है। शिकायत करने का भी कोई फायदा नहीं है। -रामकिशन फौजी, गांव खेवड़ा
निगम से बाहर हुए गांवों में विकास का पहिया थम गया है। गांव के सरपंच जिस तरह आगे आकर विकास कार्य कराते हैं उस तरह अधिकारी काम नहीं करा पाते। सरपंच पर काम कराने को लेकर कई तरह दबाव होते हैं, उसके विपरीत अधिकारियों तक तो आम ग्रामीण की पहुंच तक संभव नहीं है। ऐसे में पंचायत चुनाव होने के बाद ही गांवों में विकास संभव हो सकेगा। ऐसे में ग्रामीण जल्द से जल्द चुनाव कराकर अपने प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं। -संजय आंतिल, गांव खेवड़ा
निगम में शामिल करने के बाद गांव में टैक्स की भरमार हो गई थी। हमारे गांव ने शुरुआत से ही नगर निगम से बाहर करने की मांग उठानी शुरू कर दी थी। गांव को निगम से बाहर तो कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं हो सके। चुनाव नहीं होने के कारण गांव की पंचायत का गठन नहीं हुआ और विकास कार्य ठप हो गए। अब जल्द चुनाव होने जा रहे हैं। जिसे लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। सभी मिलकर पंच-सरपंच का चुनाव करेंगे। उसके बाद विकास तेजी हो सकेगा। -नरेंद्र, गांव मुरथल