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भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई को रुकी अफसरों की कलम तो पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी व सचिव, जेई के सस्पेंड के आदेश

Sun, 01 Jul 2018 01:00 AM IST
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:00 AM IST
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भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई को रुकी अफसरों की कलम तो पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी व सचिव, जेई के सस्पेंड के आदेश
पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी और सचिव, जेई के सस्पेंड के आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार भले ही भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दावा करती हो। लेकिन जिले में भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई करने में अफसरों की कलम रुक रही है। इस कारण ही खुद परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार को पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी के साथ ही ग्राम सचिव व जेई को सस्पेंड करने के आदेश देने पड़े। इनके अलावा भी जितने भ्रष्टाचार के मामले हैं, उनकी जांच पिछले कई साल से कागजों में दबी पड़ी है जो अब जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में सामने आ रही है। यहां मीटिंग में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर अफसरों की पोल खुल गई, जिनमें मंत्री ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस तरह बैठक में आई केवल 7 शिकायत ही निपट सकीं, जबकि 9 शिकायतों का समाधान नहीं हो सका।
जिला परिवार एवं कष्ट निवारण समिति की मीटिंग शनिवार को लघु सचिवालय के सभागार में हुई। मंत्री कृष्ण लाल पंवार के पहुंचने पर मीटिंग शुरू कराई गई, जिसमें डीसी विनय सिंह, एसपी सतेंद्र गुप्ता समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहां पहला मामला पुगथला गांव में जमीन पर अवैध कब्जे का रखा गया था तो डीसी विनय सिंह ने खुद बताया कि वहां 167 एकड़ जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है और उसकी 59 लाख 38 हजार रुपये में बोली भी करा दी गई है। जिसपर मंत्री ने यह काम करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देने की बात कही। लेकिन वहां दूसरी ही शिकायत में अफसरों की पोल खुल गई जो खांडा गांव के भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई थी। यह शिकायत 2016 में होने के बावजूद एडीसी के पास लंबित पड़ा हुई है। उसमें एडीसी आमना तस्नीम ने खुद बताया कि अभी तक की जांच में लगभग 90 लाख रुपये का घपला सामने आ चुका है और इसमें पूर्व सरपंच पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। इस पर शिकायत करने वाले मेहर सिंह ने बताया कि पूर्व सरपंच पर मुकदमा दर्ज कराकर अफसर आराम से बैठ गए और आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एडीसी की अभी तक की कार्रवाई को देखते हुए डीसी विनय सिंह ने मंत्री के सामने विजिलेंस से जांच कराने का प्रस्ताव रखा। लेकिन मंत्री ने पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी के साथ ही तत्कालीन सचिव व पंचायत विभाग के जेई को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए।
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इस तरह ही न्यात गांव के धर्मपाल ने पूर्व सरपंच पर विकास कार्यों में घपले का आरोप लगाया तो एक्सईएन पंचायती राज यशवीर पंवार ने सरपंच पर रिकार्ड नहीं देने की बात कही। इसपर मंत्री ने सरपंच को पहले नोटिस और उसके बाद एफआईआर कराने के आदेश दिए। ऐसा ही मामला सैंया खेड़ा का सामने आया, जहां पूर्व सरपंच पर घपले के आरोप लगे हुए हैं। जिसमें डीडीपीओ एनएस धनखड़ ने कहा कि उसे 11 लाख 82 हजार की रिकवरी का नोटिस दिया गया था, लेकिन वह हाईकोर्ट में चला गया। इस तरह कई अन्य मामले गांवों में भ्रष्टाचार के सामने आए और उन सभी में अफसरों की कार्रवाई लटकी हुई है। वहीं मीटिंग में पुलिस पर भी कई मामलों में कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे। गोहाना के सोनू ने चोरी के मामले में आजतक सामान बरामदगी नहीं किए जाने का आरोप लगाया तो एसपी सतेंद्र कुमार ने एसआईटी पहले ही गठित किए जाने की बात कही। वहीं गोहाना के आढ़ती से 70 लाख की लूट के मामले में भी छानबीन किए जाने की बात कही तो मंत्री ने जल्द मामले के पटाक्षेप का आदेश दिया। इनके अलावा भी मीटिंग में जलभराव, बिजली, रास्ता आदि की कई समस्याएं रखी गई।
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