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10 वर्ष पुराने निर्मोही अखाड़ा के मठ में दर्शन के साथ खरखौदा दौरे का शुभारंभ करेंगे सीएम

Updated Fri, 02 Nov 2018 12:39 AM IST
10 वर्ष पुराने निर्मोही अखाड़ा के मठ में दर्शन के साथ खरखौदा दौरे का शुभारंभ करेंगे सीएम
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410 वर्ष पुराने निर्मोही अखाड़ा मठ में दर्शन के साथ खरखौदा दौरे का शुभारंभ करेंगे सीएम

-निर्मोही अखाड़ा को कहा जाता है धर्म रक्षा के लिए गठित सनातन धर्म की सैनिक शाखा
-सर्वोच्च न्यायालय में भी राम जन्मभूमि पर अपना हक जता चुका है निर्मोही अखाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
खरखौदा। गांव खांडा में शनिवार को आयोजित होने वाले कार्यक्रम की शुरूआत सीएम मनोहर लाल 410 वर्ष पुराने निर्मोही अखाड़े के मठ में दर्शन के साथ करेंगे। फिलहाल निर्मोही अखाड़ा अस्थल को नागावाली अस्थल और बैरागी ठाकुरद्वारा के नाम से भी जाना जाता है। इस अखाड़ा में धर्म रक्षा के लिए गठित सनातन धर्म की सैनिक शाखा भी है।
आयोजन समिति के डा. राज सिंह ने बताया कि यह मठ चार वैष्णव संप्रदायों में शामिल निंबार्क संप्रदाय से संबंधित है। जिसमें भगवान विष्णु के अवतार के रूप में भगवान कृष्ण की उपासना की जाती है। द्वैत-अद्वैत के सिद्धांत के जनक स्वामी निंबार्काचार्य ने निंबार्क संप्रदाय 11वीं शताब्दी में बनाया था। उन्होंने बताया कि खांडा के इस मठ में भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण का मंदिर भी है। जिसमें 410 साल पुरानी धातु की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। धार्मिक उद्देश्यों से यह मठ निंबार्क संप्रदाय से संबंधित है। यह मठ निर्मोही अखाड़े का है जिसे धर्म रक्षा के लिए गठित सनातन धर्म की सैनिक शाखा कहा जाता है। निर्मोही अखाड़े में दो तरह के संत योद्धा होते हैं जिन्हें विरक्त और गृहस्थ कहा जाता है। आरंभ में इस अखाड़े के महंत विरक्त थे। सनातन धर्म और मंदिरों की रक्षा करने में निर्मोही अखाड़े का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अयोध्या में राम जन्मभूमि की एक तिहाई जमीन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को दी है और निर्मोही अखाड़ा सर्वोच्च न्यायालय में भी राम जन्मभूमि पर अपना हक जता रहा है। डा. राज सिंह ने बताया कि 22 और 23 दिसंबर 1949 की रात में विवादित बाबरी मस्जिद ढांचे में रामलला की मूर्तियां स्थापित करने वाले महंत अभिराम दास बैरागी और वृंदावन दास बैरागी निर्मोही अखाड़े के ही थे। खांडा स्थित इसी मठ में वर्ष 1709 में धर्म योद्धा वीर बंदा बैरागी ने अपनी सेना का गठन किया था। उस समय महंत किशन दास यहां गद्दीनशीन थे। छत्तीसगढ़ में छुईखदान रियासत के सबसे पहले राजा महंत रूपदास भी इसी मठ से गए थे। स्थानीय लोगों में इस मठ के प्रति बहुत श्रद्धा है। मुख्यमंत्री 3 नवंबर को अपने कार्यक्रम प्रारंभ करने से पहले इस मठ में दर्शन करने के लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मठ की दीवारों पर इसके इतिहास की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है जिसका अवलोकन भी मुख्यमंत्री व अन्य करेंगे। मठ के अंदर के भाग में लकड़ी पर बहुत सुंदर नक्काशी की हुई है। जिसे देखने के लिए लोग पहुंचते हैं।
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