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वेश्यावृत्ति में धकेलने पर महिला सहित तीन को सात-सात साल की कैद
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2016 01:00 AM IST
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बेरोजगार युवती को रोजगार दिलाने का विश्वास दिलाकर उसे जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महिला सहित तीन लोगों को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही दोषियों पर बीस-बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जुर्माना राशि न भरने पर तीन-तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पीड़ित युवती पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। अदालत ने ढाई साल में इस मामले का निपटारा किया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 26 सितंबर 2013 को शहर थाने में एक घबराई हुई लड़की आई। उसने पुलिस को बताया कि वह पश्चिम बंगाल के जिला हावड़ा की रहने वाली है। उसकी मां ने पड़ोसन सलमा के साथ उसे दिल्ली में जॉब करने के लिए भेजा था। 20 सितंबर 2013 को सिरसा के रानियां रोड स्थित थेहड़ मोहल्ला निवासी सीमा रानी दिल्ली आई। उसने सलमा से कहा कि वह उसे सिरसा में नौकरी दिलवा देगी। सीमा की बातों पर विश्वास करके सलमा ने उसे सीमा के साथ सिरसा भेज दिया। 22 सितंबर को कुछ लोग सीमा के घर आए थे। सीमा के साथ बैठे सुरेंद्र उर्फ सतीश बागड़ी निवासी ताजिया व सोनू अरोड़ा निवासी गली मोचियां वाली ने उक्त लोगों से रुपये लिए। इसके बाद तीनों ने उसे उक्त लोगों के साथ जाने को कहा।
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उसने जाने से मना किया तो सीमा, सुरेंद्र व सोनू ने जबरन उसे उक्त लोगों के हवाले करके कहा ये लोग तुझे नौकरी देंगे। उक्त लोग उसे अपने साथ ले गए और तीन दिनों तक उसकी अस्मत लूटते रहे। लोगों ने उसे बताया कि सीमा अपने साथियों के साथ वेश्यावृत्ति का धंधा करती है। 26 सितंबर को युवती बचते बचाते किसी तरह पुलिस थाने में पहुंची। पुलिस ने महिला अधिवक्ता के समक्ष पीड़ित युवती के बयान दर्ज करवाकर तीनों पर केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता राय ने सोमवार को इस मामले का निपटारा करते हुए सीमा रानी, सुरेंद्र बागड़ी व सोनू अरोड़ा को सात-सात साल कैद की सजा सुना दी।
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साथ ही दोषियों पर बीस-बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जुर्माना राशि न भरने पर तीन-तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पीड़ित युवती पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। अदालत ने ढाई साल में इस मामले का निपटारा किया है।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 26 सितंबर 2013 को शहर थाने में एक घबराई हुई लड़की आई। उसने पुलिस को बताया कि वह पश्चिम बंगाल के जिला हावड़ा की रहने वाली है। उसकी मां ने पड़ोसन सलमा के साथ उसे दिल्ली में जॉब करने के लिए भेजा था। 20 सितंबर 2013 को सिरसा के रानियां रोड स्थित थेहड़ मोहल्ला निवासी सीमा रानी दिल्ली आई। उसने सलमा से कहा कि वह उसे सिरसा में नौकरी दिलवा देगी। सीमा की बातों पर विश्वास करके सलमा ने उसे सीमा के साथ सिरसा भेज दिया। 22 सितंबर को कुछ लोग सीमा के घर आए थे। सीमा के साथ बैठे सुरेंद्र उर्फ सतीश बागड़ी निवासी ताजिया व सोनू अरोड़ा निवासी गली मोचियां वाली ने उक्त लोगों से रुपये लिए। इसके बाद तीनों ने उसे उक्त लोगों के साथ जाने को कहा।
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उसने जाने से मना किया तो सीमा, सुरेंद्र व सोनू ने जबरन उसे उक्त लोगों के हवाले करके कहा ये लोग तुझे नौकरी देंगे। उक्त लोग उसे अपने साथ ले गए और तीन दिनों तक उसकी अस्मत लूटते रहे। लोगों ने उसे बताया कि सीमा अपने साथियों के साथ वेश्यावृत्ति का धंधा करती है। 26 सितंबर को युवती बचते बचाते किसी तरह पुलिस थाने में पहुंची। पुलिस ने महिला अधिवक्ता के समक्ष पीड़ित युवती के बयान दर्ज करवाकर तीनों पर केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता राय ने सोमवार को इस मामले का निपटारा करते हुए सीमा रानी, सुरेंद्र बागड़ी व सोनू अरोड़ा को सात-सात साल कैद की सजा सुना दी।