{"_id":"605a32288ebc3e8d1a154016","slug":"women-became-self-sufficient-in-the-corona-era-financial-support-for-the-family-sirsa-news-rtk601345894","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, परिवार की कर रही हैं आर्थिक सहायता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, परिवार की कर रही हैं आर्थिक सहायता
विज्ञापन
प्रिया ब्यूटी पार्लर में काम करते हुए।
- फोटो : Sirsa
कोरोना काल में जहां एक ओर महामारी से जिंदगी को बचाने के लिए प्रयास चल रहे थे, वहीं लॉकडाउन के दौरान काफी लोगों के धंधे समाप्त हो गए। ऐसे में कोरोना की आपदा को अवसर में बदलकर कई महिलाओं ने लॉकडाउन के दौरान रोजगार शुरू किए। इस तरह उन्होेंने पति का रोजगार समाप्त होने से पैदा हुए आर्थिक संकट से परिवार को उबारा। किसी ने यू ट्यूब का काम सीखा तो किसी ने सिलाई और ब्यूटी पार्लर के शौक को रोजगार में बदल दिया। खुद का रोजगार शुरू कर महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा भी बन गईं।
पति का काम बंद हुआ तो यू ट्यूब से सिलाई सीख चलाया परिवार
सिरसा के प्रेमनगर निवासी प्रीति रानी ने लॉकडाउन के दौरान अपने परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए घर बैठे ही सिलाई का काम शुरू किया। प्रीति कहती हैं कि कोरोना काल शुरू होने से पहले वह सिलाई सीखने के लिए बाहर जाया करती थीं, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण वह बाहर नहीं जा सकीं, जिसके कारण उनका सिलाई सीखने का काम वहीं रुक गया। लॉकडाउन के एक महीने बाद ही स्थिति ऐसी हो गई कि उनके पति का काम बंद हो गया, जिससे घर में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। प्रीति ने यू ट्यूब से ही सिलाई का काम सीखा। प्रीति बताती हैं कि यू ट्यूब से ही उन्होंने सिलाई का पूरा काम सीखा और वह अब सिलाई करके अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर रही हैं।
रीतू ने अपने खर्च से मास्क बनाए और निशुल्क वितरित किए
गांव मोड़िया खेड़ा निवासी रीतू ने घर बैठकर अपने परिवार के सहयोग से समाज के लिए काम किया। कोरोना काल में रीतू ने घर पर रहकर मास्क बनाए और लोगों को कोरोना से बचे रहने के लिए मास्क पहनने के लिए जागरूक किया। रीतू बताती हैं कि वह पहले से ही सिलाई करती थीं। जब कोरोना काल शुरू हुआ तो उन्होंने सोचा कि क्यों न लोगों के लिए मास्क बनाए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए। रीतू ने अपने गांव मोड़िया खेड़ा के साथ-साथ मंगाला व सिरसा में भी मास्क वितरित किए। रीतू का कहना है कि वह दिन में करीबन 100 मास्क बनाया करती थीं और मास्क के सामान के लिए किसी से भी कोई मदद नहीं ली। वह स्वयं अपने खर्च से मास्क बनाती और सबको जागरूक करते हुए वितरित करती थीं।
विज्ञापन
प्रिया ने शुरू किया पार्लर
शहर के नोहरिया बाजार की प्रिया ने अपने घर में सहयोग करने के लिए पार्लर का काम शुरू किया। लॉकडाउन के चलते काम नहीं चल पाया, लेकिन अब वह शहर के कीर्ति नगर में अपना खुद का एक पार्लर चला रही हैं। प्रिया बताती हैं कि उनका पहले से ही मन था कि वह अपना खुद का काम करें, लेकिन कभी परिस्थितियां ऐसी नहीं बन पाईं। कोरोना काल के बाद घर की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें अपने पति का सहयोग करने के लिए एक छोटा सा पार्लर खोलना पड़ा, जिसमें उनके पति ने भी पूरा सहयोग किया। शुरुआत में कुछ दिक्कतों का सामना किया, लेकिन अब हालात सामान्य हो गए हैं। अब वह भी पार्लर चलाकर अपने घर का पालन-पोषण कर रही है।
विज्ञापन
पति का काम बंद हुआ तो यू ट्यूब से सिलाई सीख चलाया परिवार
सिरसा के प्रेमनगर निवासी प्रीति रानी ने लॉकडाउन के दौरान अपने परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए घर बैठे ही सिलाई का काम शुरू किया। प्रीति कहती हैं कि कोरोना काल शुरू होने से पहले वह सिलाई सीखने के लिए बाहर जाया करती थीं, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण वह बाहर नहीं जा सकीं, जिसके कारण उनका सिलाई सीखने का काम वहीं रुक गया। लॉकडाउन के एक महीने बाद ही स्थिति ऐसी हो गई कि उनके पति का काम बंद हो गया, जिससे घर में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। प्रीति ने यू ट्यूब से ही सिलाई का काम सीखा। प्रीति बताती हैं कि यू ट्यूब से ही उन्होंने सिलाई का पूरा काम सीखा और वह अब सिलाई करके अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर रही हैं।
विज्ञापन
रीतू ने अपने खर्च से मास्क बनाए और निशुल्क वितरित किए
गांव मोड़िया खेड़ा निवासी रीतू ने घर बैठकर अपने परिवार के सहयोग से समाज के लिए काम किया। कोरोना काल में रीतू ने घर पर रहकर मास्क बनाए और लोगों को कोरोना से बचे रहने के लिए मास्क पहनने के लिए जागरूक किया। रीतू बताती हैं कि वह पहले से ही सिलाई करती थीं। जब कोरोना काल शुरू हुआ तो उन्होंने सोचा कि क्यों न लोगों के लिए मास्क बनाए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए। रीतू ने अपने गांव मोड़िया खेड़ा के साथ-साथ मंगाला व सिरसा में भी मास्क वितरित किए। रीतू का कहना है कि वह दिन में करीबन 100 मास्क बनाया करती थीं और मास्क के सामान के लिए किसी से भी कोई मदद नहीं ली। वह स्वयं अपने खर्च से मास्क बनाती और सबको जागरूक करते हुए वितरित करती थीं।
विज्ञापन
प्रिया ने शुरू किया पार्लर
शहर के नोहरिया बाजार की प्रिया ने अपने घर में सहयोग करने के लिए पार्लर का काम शुरू किया। लॉकडाउन के चलते काम नहीं चल पाया, लेकिन अब वह शहर के कीर्ति नगर में अपना खुद का एक पार्लर चला रही हैं। प्रिया बताती हैं कि उनका पहले से ही मन था कि वह अपना खुद का काम करें, लेकिन कभी परिस्थितियां ऐसी नहीं बन पाईं। कोरोना काल के बाद घर की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें अपने पति का सहयोग करने के लिए एक छोटा सा पार्लर खोलना पड़ा, जिसमें उनके पति ने भी पूरा सहयोग किया। शुरुआत में कुछ दिक्कतों का सामना किया, लेकिन अब हालात सामान्य हो गए हैं। अब वह भी पार्लर चलाकर अपने घर का पालन-पोषण कर रही है।

रीतू मास्क बनाते हुए।- फोटो : Sirsa

सिलाई करती हुई प्रीति।- फोटो : Sirsa