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‘पीने के लायक नहीं पानी’ का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग में
ब्यूरो/अमर उजाला/सिरसा
Updated Thu, 24 Dec 2015 01:15 AM IST
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शहर में ट्यूबवेल के जरिये पीने के लिए अयोग्य पानी की आपूर्ति किए जाने के मामले पर पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। आयोग को लिखे पत्र में एक्टिविस्ट ने लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत में पब्लिक हेल्थ द्वारा आरटीआई में दिए गए पानी के नमूने की रिपोर्ट भी भेजी गई है। बता दें कि कमल सिंगला ने पब्लिक हेल्थ सिरसा से आरटीआई में ट्यूबवेल द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी के सैंपल की रिपोर्ट मांगी थी। विभाग द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी में यह तथ्य सामने आया कि शहर में 22 ट्यूबवेल द्वारा जो पानी आपूर्ति किया जा रहा है वह पीने योग्य नहीं है। अप्रैल महीने में पानी के सैंपल लिए गए और इसी माह रिपोर्ट भी जारी की गई। लेकिन पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने पीने के योग्य न होने के बावजूद जलापूर्ति बरकरार रखी। पब्लिक हेल्थ की ओर से सिरसा के लोगों को पानी के रूप में स्लो प्वाइजन दिए जाने को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रजीत अधिकारी ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग का द्वार खटखटाया है। उन्होंने लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले महकमे के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
अयोग्य जल के भी वसूले बिल
पब्लिक हेल्थ विभाग एक तरफ ‘पीने के लायक नहीं’ पानी की आपूर्ति करता रहा और दूसरी ओर लोगों से इस पानी के बदले भी बिल वसूलता रहा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले महकमे द्वारा पानी के बिलों की वसूली को लेकर बाकायदा अभियान चलाया गया। उपभोक्ताओं से बिल वसूली करने को लेकर कनेक्शन काटने तक की चेतावनी दी गई। मगर महकमे ने अपनी गलती को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए।
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पब्लिक हेल्थ की वजह से फल-फूल रहा कैंपर का बिजनेस
सिरसा में पब्लिक हेल्थ विभाग लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है वहीं वह परोक्ष रूप से पैकेट बंद पानी और कैंपर के बिजनेस को भी बढ़ावा दे रहा है। शहर में पानी की आपूर्ति का कोई निर्धारित समय न होने और दूषित पेयजल की आपूर्ति होने के कारण शहर भर में लोग कैंपर पर आश्रित हो गए हैं। बाजारों में हर दुकान पर कैंपर का पानी पहुंचता है। वहीं लोग शादी विवाह व अन्य कार्यक्रमों में पैकेट बंद पानी की प्रयोग करने लगे हैं। विभाग द्वारा यदि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाती तो लोगों की जेब पर यह बोझ नहीं पड़ता।
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शिकायत में पब्लिक हेल्थ द्वारा आरटीआई में दिए गए पानी के नमूने की रिपोर्ट भी भेजी गई है। बता दें कि कमल सिंगला ने पब्लिक हेल्थ सिरसा से आरटीआई में ट्यूबवेल द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी के सैंपल की रिपोर्ट मांगी थी। विभाग द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी में यह तथ्य सामने आया कि शहर में 22 ट्यूबवेल द्वारा जो पानी आपूर्ति किया जा रहा है वह पीने योग्य नहीं है। अप्रैल महीने में पानी के सैंपल लिए गए और इसी माह रिपोर्ट भी जारी की गई। लेकिन पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने पीने के योग्य न होने के बावजूद जलापूर्ति बरकरार रखी। पब्लिक हेल्थ की ओर से सिरसा के लोगों को पानी के रूप में स्लो प्वाइजन दिए जाने को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रजीत अधिकारी ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग का द्वार खटखटाया है। उन्होंने लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले महकमे के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
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अयोग्य जल के भी वसूले बिल
पब्लिक हेल्थ विभाग एक तरफ ‘पीने के लायक नहीं’ पानी की आपूर्ति करता रहा और दूसरी ओर लोगों से इस पानी के बदले भी बिल वसूलता रहा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले महकमे द्वारा पानी के बिलों की वसूली को लेकर बाकायदा अभियान चलाया गया। उपभोक्ताओं से बिल वसूली करने को लेकर कनेक्शन काटने तक की चेतावनी दी गई। मगर महकमे ने अपनी गलती को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए।
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पब्लिक हेल्थ की वजह से फल-फूल रहा कैंपर का बिजनेस
सिरसा में पब्लिक हेल्थ विभाग लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है वहीं वह परोक्ष रूप से पैकेट बंद पानी और कैंपर के बिजनेस को भी बढ़ावा दे रहा है। शहर में पानी की आपूर्ति का कोई निर्धारित समय न होने और दूषित पेयजल की आपूर्ति होने के कारण शहर भर में लोग कैंपर पर आश्रित हो गए हैं। बाजारों में हर दुकान पर कैंपर का पानी पहुंचता है। वहीं लोग शादी विवाह व अन्य कार्यक्रमों में पैकेट बंद पानी की प्रयोग करने लगे हैं। विभाग द्वारा यदि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाती तो लोगों की जेब पर यह बोझ नहीं पड़ता।