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शहर में अब भी कम नहीं किताबों के कद्रदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2022 11:15 PM IST
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There is still no less book value in the city
बेशक इन बूढ़ी आंखों की रोशनी मंद हो गई, लेकिन उजाला बढ़ने का जुनून आज भी है... शहर की सबसे प्राचीन पु? - फोटो : Sirsa
सिरसा। आज सोशल मीडिया और मोबाइल का जमाना है। हर व्यक्ति इसमें व्यस्त है। लेकिन पुस्तक प्रेमियों की अपनी ही अलग दुनिया है। जिन्हें पढ़ने का शौक है वह किसी ना किसी तरीके से अपनी इच्छा पूरी कर ही लेता है। मोबाइल और भागदौड़ भरी दुनिया में आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो पुस्तक प्रेमी हैं और पुस्तकों के लिए प्रतिदिन लाइब्रेरी में जाते हैं।
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शहर के सूरतगढ़िया बाजार में स्थित श्री बाल अमर समिति की तरफ से लाइब्रेरी संचालित की जाती है। जिसमें पढ़ने वालो से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। इस लाइब्रेरी में प्रतिदिन 30 से अधिक ऐसे बुजुर्ग आते है। जिनकी उम्र 60 से लेकर 90 वर्ष की है। वहीं करीब 10 युवा प्रतिदिन लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए आते है। लाइब्रेरी में आने वालों पुस्तक प्रेमियों में से बुजुर्गों की संख्या ज्यादा होती है। क्योंकि यह शहर एक ऐसी लाइब्रेरी है। जिसमें बुजुर्गों के लिए उनकी रूचि से संबंधित किताबें रखी हुई है। लाइब्रेरी संचालक बताते हैं कि शहर में ऐसे भी बुजुर्ग है जो लाठी के सहारे से लड़खड़ाते हुए लाइब्रेरी में पुस्तकें पढ़ने के लिए आते हैं। वहीं कुछ ऐसे बुजुर्ग भी हैं जिन्हें विभिन्न भाषाओं को सीखने का शौक रखते हैं। वहीं शहर के युवाओं के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के लिए पुस्तकें भी रखी गई हैं। जिसे हर साल बदला जाता है। शहर के बीचोबीच स्थापित लाइब्रेरी सुबह 9 बजे से 12 बजे तक और शाम को 5 बजे से लेकर 7 बजे तक खुली रहती है।
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इतिहास की पुस्तकों की सबसे ज्यादा रही है मांग
पुस्तक पढ़ने वालों को सबसे ज्यादा इतिहास की पुस्तकें ज्यादा पसंद आती है। वहीं इतिहास के अलावा राजनीतिक पुस्तकें, लिटरेचर, कल्चर, धार्मिक पुस्तकों की भी ज्यादा मांग रहती है। वहीं शहर के लोग समाचार पत्र पढ़ने के लिए भी लाइब्रेरी में आते है। पहले लाइब्रेरी में उर्दू भाषा का भी न्यूज पेपर आता था। लेकिन पाठक ना होने की वजह से बंद कर दिया गया।
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मेरी उम्र 70 वर्ष है। मैं 10 साल से लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए आता हूं। मुझे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती आदि भाषाओं को सीखने का शौक है। इसलिए लाइब्रेरी में विभिन्न भाषाओं की किताबें पढ़ने के लिए आता हूं।
- मोहन सिंह ग्रोवर, शहरवासी।
मेरी उम्र 51 वर्ष की है और मैं 10वीं पास हूं। मुझे पढ़ने का बहुत शौंक है। इसलिए अपना खाली समय लाइब्रेरी में पुस्तकों के साथ बिताता हूं। मुझे राजनेताओं का इतिहास, क्लचर से संबंधित पुस्तकें पढ़ना अच्छा लगता है।
- सुभाष, शहरवासी।
मैं इस 78 साल का हूं। मुझे किताबें पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। मुझे लिटरेचर और न्यूज पेपर पढ़ना अच्छा लगता है। सुबह और शाम अपना खाली समय पुस्तकों के साथ बिताता हूं।

- देवराज छाबड़ा, शहरवासी।
लाइब्रेरी में काफी समय से आ रहा हूं । पुस्तकें पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। वहीं कल्चर से संबंधित पुस्तकें पढ़ना सबसे ज्यादा पढ़ता हूं। वहीं न्यूज पेपर पढ़ने के लिए भी लाइब्रेरी में आता हूं।
- रोहित जिंदल, शहरवासी।
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