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Sirsa News: बहुमंजिली पार्किंग की सुविधा के लिए बढ़ता जा रहा इंतजार
Sun, 20 Jul 2025 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 20 Jul 2025 10:53 PM IST
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सिरसा। सरकारी स्कूल की वह बिल्डिंग जहां पर पार्किंग बनाई जानी है। संवाद
सिरसा। नगर परिषद कई सालों से लंबित परियोजनाओं पर अब प्रशासन ने दोबारा से ध्यान देना शुरू कर दिया है। इन परियोजनाओं को गति देने के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने पर कई तरह की खामियां सामने आई हैं। शहर को बहुमंजिली वाहन पार्किंग (मल्टी स्टोरी पार्किंग) की सुविधा देना की योजना पर पांच साल से काम चल रहा है लेकिन आज तक मोहता मार्केट के पास चुनी गई स्कूल और थाने की जमीन की मलकियत नगर परिषद प्रशासन अपने नाम नहीं करवा पाया है।
सही मायने में प्रोजेक्टों को सिरे चढ़ाने में इच्छा शक्ति की बेहद कमी सामने आ रही हे। हर बार सरकार व विपक्ष की ओर से मल्टी स्टोरी पार्किंग बनवाने का वादा तो किया जाता है लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं होता है।
मल्टी स्टोरी पार्किंग के लिए विभाग योजना तैयार कर चुका है। डीपीआर तक बनाने की योजना बनाई जा चुकी है लेकिन मलकियत स्वयं की नहीं होने पर इस प्रोजेक्ट को गति नहीं दी जा सकी है। शहर में पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर परिषद प्रशासन ने बहुमंजिला पार्किंग का प्रस्ताव बनाया है। स्कूल की जगह से छह बार निविदा लगाने के बाद भी नगर परिषद प्रशासन स्कूल का मलबा तक नहीं हटा सका है। शुरुआत में टेंडर महंगे दामों में छूटने के बाद मलबा हटाने की निविदा निरस्त हो गई थी। इसके बाद से यह प्रक्रिया लंबित है।
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60 करोड़ से 200 वाहनों के पार्क होने की बननी थी व्यवस्था
पहले इस परियोजना को निजी-सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) मोड पर बनाया जाना प्रस्तावित था । इस पर 60 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान था और 200 वाहनों के पार्क होने की व्यवस्था बननी थी। अब इसे किस तरह से बनाया जाएगा कोई नहीं जानता है जबकि शहर के बाजारों और आमजन के लिए यह परियोजना बेहद जरूरी है तभी अतिक्रमण की समस्या का स्थाई समाधान हो पाएगा।
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अतिक्रमण हटाओ अभियान भी नहीं आता काम
शहर के मुख्य बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था न होने पर नगर परिषद ने कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इसके बावजूद शहर में पार्किंग के लिए चालकों को जगह नहीं मिल रही है इसलिए लोग सड़कों पर ही वाहन खड़े कर खरीदारी के लिए मजबूर हैं। पालिका बाजार और आसपास के बाजारों के कुछ व्यापारी तो नगर परिषद कार्यालय परिसर में अपने वाहन पार्क करते हैं। पार्किंग न होने के कारण अतिक्रमण हटाओ अभियान भी महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
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इसलिए जरूरी है पार्किंग
- शहर के कई बाजार बेहद संकरे हैं।
- इन बाजारों की गलियां आठ से 10 फीट ही चौड़ी है।
- दुपहिया वाहन खड़ा करने पर रास्ता बंद हो जाता है।
- दुकानदारों तक को वाहन पार्क के लिए जगह नहीं है। कई बाजारों में उन्हें खुद सड़कों पर वाहन पार्क करने पड़ते हैं।
- बाजारों में बनी दो निजी पार्किंग मालिक 50 से 100 रुपये के हिसाब से वाहनोें की पर्ची काटते हैं।
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मल्टी स्टोरी पार्किंग प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी अड़चन जमीन है। अभी तक जमीन नगर परिषद के नाम नहीं हुई है। जैसे ही जमीन नाम होगी योजना पर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
विजय कुमार, कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन), नगर परिषद
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सही मायने में प्रोजेक्टों को सिरे चढ़ाने में इच्छा शक्ति की बेहद कमी सामने आ रही हे। हर बार सरकार व विपक्ष की ओर से मल्टी स्टोरी पार्किंग बनवाने का वादा तो किया जाता है लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं होता है।
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मल्टी स्टोरी पार्किंग के लिए विभाग योजना तैयार कर चुका है। डीपीआर तक बनाने की योजना बनाई जा चुकी है लेकिन मलकियत स्वयं की नहीं होने पर इस प्रोजेक्ट को गति नहीं दी जा सकी है। शहर में पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर परिषद प्रशासन ने बहुमंजिला पार्किंग का प्रस्ताव बनाया है। स्कूल की जगह से छह बार निविदा लगाने के बाद भी नगर परिषद प्रशासन स्कूल का मलबा तक नहीं हटा सका है। शुरुआत में टेंडर महंगे दामों में छूटने के बाद मलबा हटाने की निविदा निरस्त हो गई थी। इसके बाद से यह प्रक्रिया लंबित है।
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60 करोड़ से 200 वाहनों के पार्क होने की बननी थी व्यवस्था
पहले इस परियोजना को निजी-सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) मोड पर बनाया जाना प्रस्तावित था । इस पर 60 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान था और 200 वाहनों के पार्क होने की व्यवस्था बननी थी। अब इसे किस तरह से बनाया जाएगा कोई नहीं जानता है जबकि शहर के बाजारों और आमजन के लिए यह परियोजना बेहद जरूरी है तभी अतिक्रमण की समस्या का स्थाई समाधान हो पाएगा।
अतिक्रमण हटाओ अभियान भी नहीं आता काम
शहर के मुख्य बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था न होने पर नगर परिषद ने कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इसके बावजूद शहर में पार्किंग के लिए चालकों को जगह नहीं मिल रही है इसलिए लोग सड़कों पर ही वाहन खड़े कर खरीदारी के लिए मजबूर हैं। पालिका बाजार और आसपास के बाजारों के कुछ व्यापारी तो नगर परिषद कार्यालय परिसर में अपने वाहन पार्क करते हैं। पार्किंग न होने के कारण अतिक्रमण हटाओ अभियान भी महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
इसलिए जरूरी है पार्किंग
- शहर के कई बाजार बेहद संकरे हैं।
- इन बाजारों की गलियां आठ से 10 फीट ही चौड़ी है।
- दुपहिया वाहन खड़ा करने पर रास्ता बंद हो जाता है।
- दुकानदारों तक को वाहन पार्क के लिए जगह नहीं है। कई बाजारों में उन्हें खुद सड़कों पर वाहन पार्क करने पड़ते हैं।
- बाजारों में बनी दो निजी पार्किंग मालिक 50 से 100 रुपये के हिसाब से वाहनोें की पर्ची काटते हैं।
मल्टी स्टोरी पार्किंग प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी अड़चन जमीन है। अभी तक जमीन नगर परिषद के नाम नहीं हुई है। जैसे ही जमीन नाम होगी योजना पर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
विजय कुमार, कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन), नगर परिषद