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शहर के लिए आफत बन सकती है बरसात

Mon, 30 May 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Mon, 30 May 2016 01:08 AM IST
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बाढ़ - फोटो : Desk

मानसून के दिनों में हर वर्ष लोग जल निकासी को लेकर धरने-प्रदर्शन करते हैं पर जन स्वास्थ्य विभाग इससे कोई सबक नहीं लेता है। मानसून आने में लगभग दो से तीन सप्ताह शेष है पर विभाग ने अभी तक सीवरों व नालों की सुध नहीं ली है। विभाग की तंद्रा नहीं टूटी तो इस बार भी बरसात के बाद शहर में पानी भर जाएगा और लोगों के घरों में सीवर बैक मारेगा। मई माह बीत गया है पर किसी भी जल निकासी वाले नाले की सफाई नहीं की गई है।

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शहर में अब तक बरसाती पानी की निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। वर्ष 2003 में पांच करोड़ की लागत से हुडा चौक से वायु सेना केंद्र तक रोड के दोनों और नाला बनाया गया था ताकि बरसाती पानी की निकासी हो सके पर उस नाले की सफाई करवाना संबंधित विभाग और प्रशासन ने उचित नहीं समझा है।
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नाला पूरा तरह से कचरे से भर चुका है। अब इस नाले का कोई उपयोग नहीं रहा है। इसमें सफाई होने से काफी हद तक बरसाती पानी की निकासी इस नाले के माध्यम से की जा सकती है। इसके अलावा बरसाती पानी की निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। बरसात के दिनों में सीवर बैक मारने लगते हैं। वजह है सीवर लाइनों की सफाई न होना। हर वर्ष सीवरों की गाद निकालने के नाम पर मोटी राशि खर्च की जाती है पर ठेकेदारों द्वारा गाद निकाले बिना ही पेमेंट करवा ली जाती है। इससे किसी भी क्षेत्र में सीवर व्यवस्था सही नहीं है।
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बिना बरसात के ही शहर में सीवर व्यवस्था चरमर्राइ रहती है। शहर में होने वाले कुल धरने-प्रदर्शनों व रोड जाम में से आधे सीवर समस्या या जल निकासी को लेकर होते हैं। शहर की ऐसी कोई कॉलोनी नहीं हैं जहां पर लोगों को इस समस्या से जूझना न पड़ रहा हो। सिरसा के निवासियों की यह समस्या पुरानी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सीवरों की गाद निकालने के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जाती है। विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप पुनियां ने कहा कि सीवर की स्पेशल सफाई नहीं करवाई जाती बल्कि जहां भी समस्या आए तो तुरंत वहां से ठीक करवाई जाती है। समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में सफाई का काम चलता रहता है। विभाग के पास कई मशीनें हैं जिनसे सीवर व्यवस्था को ठीक किया जाता है।

नहीं बना मास्टर प्लान
सिरसा शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए वर्ष 2012 में मास्टर सप्लान बनने की तैयारी जन स्वास्थ्य विभाग ने की थी। चार वर्ष बीत गए पर विभाग के इंजीनियर अब तक मास्टर प्लान नहीं बना सके हैं। बरसाती पानी की निकासी के लिए मास्टर प्लान बनने के बाद सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा उसके बाद जब सरकार उसको स्वीकृति देगी तक काम शुरू होगा। अभी तक विभाग ने अपने स्तर पर किए जाने वाले काम को भी पूरा नहीं किया है तो सरकार कैसे बरसाती लाइन डलवाएगी। बता दें कि कई वर्ष पूर्व सरकार ने शहरों से बरसाती पानी निकासी के लिए प्रपोजल मांगी थी।

छोटी पड़ने लगी हैं सीवर लाइन
शहर की अधिकतर कॉलोनियों में सीवर की लाइनें 70 के दशक में डाली हुई हैं। जब लाइन डाली गई थी तो उस समय की आबादी और अगले 25 वर्षों में बढ़ने वाली आबादी के अनुसार पाइप लाइन डाली गई थी। परंतु 90 के दशक के बाद आबादी बढ़ने की गति काफी तेज हो गई। अब ये लाइनें छोटी पड़ने लगी हैं। लोगों की मांग है कि सीवर लाइन को बड़ा किया जाए और साथ में बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से लाइन डाली जाए।

घग्घर के किनारे शहर फिर भी जल निकासी के नहीं हुए प्रबंध  
सिरसा शहर घग्घर नदी के किनारे पर बसा हुआ है। घग्घर तक लाइन डालकर या नाला बनाकर आराम से बरसाती पानी की निकासी की जा सकती है। लेकिन अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। पानी निकासी के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। पांच करोड़ का नाला घग्घर से कुछ ही दूरी पहले बंद हुआ है। इस नाले की लंबाई थोड़ी और बढ़ाई होती तो इस नाले के जरिए भी शहर का बरसाती पानी घग्घर नदी में छोड़ा जा सकता था।

अनेक कॉलोनियों में नहीं हैं सीवर व्यस्था
शहर की कई कॉलोनियों में अब तक सीवर लाइन ही नहीं है। संत नगर, चतरगढ पट्टी, आदर्श कॉलोनी, प्रेम नगर का कुछ हिस्सा, विष्णुपुरी कॉलोनी का काफी हिस्सा, बेगू रोड की कई कालोनियां, भारत नगर, कंगनपुर रोड की कई कालॉनियों में अब तक सीवर लाइन नहीं डल पाई है। इसके अलावा आउटर की कई कॉलोनियों में यही समस्या है।


20 एमएम बरसात में शहर बन जाता है तालाब
शहर में 20 एमएम बरसात होने के बाद अधिकतर क्षेत्र में वाहन नहीं चल सकते। सड़कों के अलावा घरों में पानी भर जाता है। इससे अधिक बरसात होने पर तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे में प्रशासन हर साल पंप लगा कर जल निकासी का प्रबंध करता है जिस पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं पर स्थायी प्रबंध पर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे।

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