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सिरसा जेल बनती जा रही है अपराधियों के लिए आराम गृह
ब्यूरो/अमर उजाला/सिरसा
Updated Sat, 25 Jun 2016 01:22 AM IST
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- फोटो : Bureau
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जिला जेल अपराधियों के लिए आराम गृह बनी हुई है। वहां से लगातार संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले बदमाशों से मोबाइल फोन मिलना आम बात हो चुकी है। सलाखों के पीछे रहकर भी बदमाश बाहरी लोगों की भांति मोबाइल के माध्यम से सोशल साइट पर अपडेट रहते हैं। अफीम से लेकर नशीली गोलियां तक आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इतनी सुरक्षा के बावजूद जेल में मादक पदार्थ व मोबाइल पहुंचना सीधा-सीधा जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को संदेह के दायरे में लाता है।
हत्या व लूटपाट जैसे मामलों में जेल में कैद अपराधियों से मोबाइल फोन बैरकों में मिले, जिससे यह साबित हो गया ये अंदर रहकर बाहर अपना गिरोह चलाते हैं। फिरौती लेकर एक लड़की की हत्या करने के मामले में जेल में कैद शूटर व हत्या केस में बंदी से तलाशी के दौरान मोबाइल फोन जेल प्रशासन को मिले। पिछले ढाई सालों में दस मोबाइल फोन जेल से मिल चुके हैं। जहां तक नशीले पदार्थ मिलने की बात है तो दो बार अफीम व एक संदिग्ध चिट्टा पाउडर मिला है जिसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। तीन वर्ष पहले जेल से आधा किलो ग्राम अफीम बैरक में मिली थी। हुडा चौकी पुलिस ने जेल प्रशासन की शिकायत पर केस दर्ज किया लेकिन जब जांच की बारी आती है तो जांच अधिकारी का जेल प्रशासन सहयोग नहीं करता। इसलिए अभी तक पुलिस एक भी मामले की तह तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस सूत्रों के अनुसार जिन अपराधियों से मोबाइल मिले उनसे पूछताछ करके यह पता लगाना था कि आखिरकार मोबाइल जेल में आया कैसे? बाहर बैठे किन लोगों के संपर्क में थे। जेल अधिकारी भी नहीं चाहते पुलिस ज्यादा गहराई में जाकर पूछताछ करे और इसलिए सिरसा पुलिस अभी तक ये पता नहीं लगा पाई कि जेल में नशीले पदार्थ व मोबाइल फोन कैसे पहुंचाए जाते है और कौन लोग इस काम को अंजाम लगे हुए हैं।
एक हवालाती कर चुका है आत्महत्या
वर्ष 2014 से लेकर आज तक चार हवालाती सुसाइड का प्रयास कर चुके हैं। जबकि एक हवालाती ने नशे की गोलियां खाकर अपनी जान दे दी। हवालाती मोहम्मद अली पशु तस्करी मामले में जेल में बंद था। उसे डबवाली सदर पुलिस ने नवंबर 2015 को पशु तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तब से उसकी जमानत के लिए कोई भी नहीं आया था। जिसके चलते वह परेशान रहने लगा। मार्च 2016 को उसने जेल में अधिक मात्रा में नशीली गोलियां खा लीं जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। उसे सामान्य अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे अग्रोहा रेफर कर दिया गया। वहां उसकी मौत हो गई। जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि डॉक्टरों अपनी रिपोर्ट में पाया कि हवालाती मोहम्मद अली ने ज्यादा मात्रा में नशीली गालियां खा लीं थीं जो उसकी मौत का कारण बनी। जेल में हवालाती के पास नशीली गोलियां आई कहां से इसकी जांच शुरू की लेकिन जेल प्रशासन का जांच में सहयोग नहीं मिल रहा।
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औचक छापेमारी भी नहीं होती सफल
जब भी जेल में मोबाइल फोन या मादक पदार्थ मिलने की घटना होती है तो पुलिस प्रशासन की तरफ से जेल में औचक छापेमारी की योजना बनाई जाती है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डीएसपी हेड क्वार्टर छापेमारी की रूप रेखा तैयार करते हैं लेकिन फिर भी छापेमारी से पहले जेल में सूचना पहुंच जाती है। 10 से 15 मिनट में ही प्रतिबंधित वस्तु ठिकाने लगा दी जाती है। जब पुलिस अधिकारी जेल में छापेमारी करने आते हैं तो घंटेभर तलाशी के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। हरबार खाली हाथ जेल से बाहर आना पड़ता है। इसलिए पुलिस प्रशासन की तरफ से की गई औचक छापेमारी कभी सफल नहीं होती। जेल सूत्रों के अनुसार औचक निरीक्षण की जानकारी पुलिस के जरिए ही जेल में पहुंच जाती है। इसके बाद बैरकों में हवालाती और कैदी तुरंत प्रभाव से सब कुछ ठिकाने लगा देते हैं।
कटघरे में जेल प्रशासन
जेल में मोबाइल फोन व मादर्थ पदार्थ मिलना जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा करता है। हालांकि प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर जिनके पास मोबाइल मिला उनके खिलाफ केस दर्ज करवा दिया लेकिन इस बात से पर्दा अभी तक नहीं उठा कि आखिर जेल में उक्त सामान कैसे व किसके माध्यम से पहुंचा। जेल गेट के बाहर व अंदर दो जगहों पर चेकिंग के बाद ही हवालातियों व कैदियों को बैरकों में भेजा जाता है। जेल सूत्रों के अनुसार बिना मिली भगत के जेल में सुई तक नहीं जा सकती। जेल प्रशासन के किसी अधिकारी या कर्मचारी से मिली भगत करके ही जेल में मोबाइल पहुंचाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अच्छी रकम लेकर जेल में मोबाइल पहुंचा जाता है। इसी प्रकार हर प्रतिबंधित चीज का रेट फिक्स है।
क्षमता से अधिक है बंदी
सिरसा जेल की क्षमता 567 बंदियों की है जबकि इनकी संख्या 750 से अधिक है। जेल प्रशासन का कहना है कि क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण थोड़ी बहुत परेशान होना सामान्य बात है लेकिन बंदियों को जेल में मौजूद हर सुविधा दी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से कोई दिक्क्त नहीं क्योंकि जेल में जरूरत से अधिक सुरक्षा पहरी है। जेल के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहती है। इसके अलावा अधिकारी लगातार बैरकों की चेकिंग करते रहते हैं।
लापरवाही हुई है
जेल में मोबाइल व मादक पदार्थ मिलना कहीं न कहीं लापरवाही दर्शाता है और इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। इन घटनाओं के चलते जेल में अंदर व बाहर तलाशी बढ़ा दी गई है। अच्छी तरह से तलाशी के बाद ही बंदियों को परिसर में भेजा जाता है। सर्च अभियान में चलता रहता है।
-अमित भादू, उपअधीक्षक जेल, सिरसा।
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हत्या व लूटपाट जैसे मामलों में जेल में कैद अपराधियों से मोबाइल फोन बैरकों में मिले, जिससे यह साबित हो गया ये अंदर रहकर बाहर अपना गिरोह चलाते हैं। फिरौती लेकर एक लड़की की हत्या करने के मामले में जेल में कैद शूटर व हत्या केस में बंदी से तलाशी के दौरान मोबाइल फोन जेल प्रशासन को मिले। पिछले ढाई सालों में दस मोबाइल फोन जेल से मिल चुके हैं। जहां तक नशीले पदार्थ मिलने की बात है तो दो बार अफीम व एक संदिग्ध चिट्टा पाउडर मिला है जिसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। तीन वर्ष पहले जेल से आधा किलो ग्राम अफीम बैरक में मिली थी। हुडा चौकी पुलिस ने जेल प्रशासन की शिकायत पर केस दर्ज किया लेकिन जब जांच की बारी आती है तो जांच अधिकारी का जेल प्रशासन सहयोग नहीं करता। इसलिए अभी तक पुलिस एक भी मामले की तह तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस सूत्रों के अनुसार जिन अपराधियों से मोबाइल मिले उनसे पूछताछ करके यह पता लगाना था कि आखिरकार मोबाइल जेल में आया कैसे? बाहर बैठे किन लोगों के संपर्क में थे। जेल अधिकारी भी नहीं चाहते पुलिस ज्यादा गहराई में जाकर पूछताछ करे और इसलिए सिरसा पुलिस अभी तक ये पता नहीं लगा पाई कि जेल में नशीले पदार्थ व मोबाइल फोन कैसे पहुंचाए जाते है और कौन लोग इस काम को अंजाम लगे हुए हैं।
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एक हवालाती कर चुका है आत्महत्या
वर्ष 2014 से लेकर आज तक चार हवालाती सुसाइड का प्रयास कर चुके हैं। जबकि एक हवालाती ने नशे की गोलियां खाकर अपनी जान दे दी। हवालाती मोहम्मद अली पशु तस्करी मामले में जेल में बंद था। उसे डबवाली सदर पुलिस ने नवंबर 2015 को पशु तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तब से उसकी जमानत के लिए कोई भी नहीं आया था। जिसके चलते वह परेशान रहने लगा। मार्च 2016 को उसने जेल में अधिक मात्रा में नशीली गोलियां खा लीं जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। उसे सामान्य अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे अग्रोहा रेफर कर दिया गया। वहां उसकी मौत हो गई। जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि डॉक्टरों अपनी रिपोर्ट में पाया कि हवालाती मोहम्मद अली ने ज्यादा मात्रा में नशीली गालियां खा लीं थीं जो उसकी मौत का कारण बनी। जेल में हवालाती के पास नशीली गोलियां आई कहां से इसकी जांच शुरू की लेकिन जेल प्रशासन का जांच में सहयोग नहीं मिल रहा।
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औचक छापेमारी भी नहीं होती सफल
जब भी जेल में मोबाइल फोन या मादक पदार्थ मिलने की घटना होती है तो पुलिस प्रशासन की तरफ से जेल में औचक छापेमारी की योजना बनाई जाती है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डीएसपी हेड क्वार्टर छापेमारी की रूप रेखा तैयार करते हैं लेकिन फिर भी छापेमारी से पहले जेल में सूचना पहुंच जाती है। 10 से 15 मिनट में ही प्रतिबंधित वस्तु ठिकाने लगा दी जाती है। जब पुलिस अधिकारी जेल में छापेमारी करने आते हैं तो घंटेभर तलाशी के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। हरबार खाली हाथ जेल से बाहर आना पड़ता है। इसलिए पुलिस प्रशासन की तरफ से की गई औचक छापेमारी कभी सफल नहीं होती। जेल सूत्रों के अनुसार औचक निरीक्षण की जानकारी पुलिस के जरिए ही जेल में पहुंच जाती है। इसके बाद बैरकों में हवालाती और कैदी तुरंत प्रभाव से सब कुछ ठिकाने लगा देते हैं।
कटघरे में जेल प्रशासन
जेल में मोबाइल फोन व मादर्थ पदार्थ मिलना जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा करता है। हालांकि प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर जिनके पास मोबाइल मिला उनके खिलाफ केस दर्ज करवा दिया लेकिन इस बात से पर्दा अभी तक नहीं उठा कि आखिर जेल में उक्त सामान कैसे व किसके माध्यम से पहुंचा। जेल गेट के बाहर व अंदर दो जगहों पर चेकिंग के बाद ही हवालातियों व कैदियों को बैरकों में भेजा जाता है। जेल सूत्रों के अनुसार बिना मिली भगत के जेल में सुई तक नहीं जा सकती। जेल प्रशासन के किसी अधिकारी या कर्मचारी से मिली भगत करके ही जेल में मोबाइल पहुंचाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अच्छी रकम लेकर जेल में मोबाइल पहुंचा जाता है। इसी प्रकार हर प्रतिबंधित चीज का रेट फिक्स है।
क्षमता से अधिक है बंदी
सिरसा जेल की क्षमता 567 बंदियों की है जबकि इनकी संख्या 750 से अधिक है। जेल प्रशासन का कहना है कि क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण थोड़ी बहुत परेशान होना सामान्य बात है लेकिन बंदियों को जेल में मौजूद हर सुविधा दी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से कोई दिक्क्त नहीं क्योंकि जेल में जरूरत से अधिक सुरक्षा पहरी है। जेल के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहती है। इसके अलावा अधिकारी लगातार बैरकों की चेकिंग करते रहते हैं।
लापरवाही हुई है
जेल में मोबाइल व मादक पदार्थ मिलना कहीं न कहीं लापरवाही दर्शाता है और इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। इन घटनाओं के चलते जेल में अंदर व बाहर तलाशी बढ़ा दी गई है। अच्छी तरह से तलाशी के बाद ही बंदियों को परिसर में भेजा जाता है। सर्च अभियान में चलता रहता है।
-अमित भादू, उपअधीक्षक जेल, सिरसा।