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10वीं में बेटियों का दबदबा, मनुरीत बनी जिला टॉपर
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जिले में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर विनय का मुंह मीठा करवाते माता पिता
- फोटो : Sirsa
हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने 10वीं के नतीजे 10 जुलाई को देर शाम घोषित कर दिए। जिले में टॉप करने वाले चार विद्यार्थियों में से पहला और तीसरा स्थान लड़कियों ने हासिल किया है। बोर्ड परीक्षाओं में 98.8 प्रतिशत लेकर मनुरीत कौर पहले स्थान पर रही। 98.6 प्रतिशत लेकर विनय कुमार दूसरे स्थान पर रहा। जबकि 98.4 प्रतिशत लेकर कीर्ति व लवप्रीत कौर ने संयुक्त रुप से तीसरा स्थान हासिल किया। अमर उजाला से बात करते हुए जिले के तीनों टॉपर्स ने अपनी-अपनी दिनचर्य परीक्षाओं के लेकर की गई तैयारी व संघर्ष को सांझा किया। तीनों टॉपरों में खास बात यह रही कि किसी ने भी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए ट्यूशन नहीं ली।
शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ स्थान हासिल करना चाहती है मनुरीत
दसवीं बोर्ड की परीक्षा में जिले में पहले स्थान पर रही मनुरीत कौर ने 494 अंक हासिल किए। मनुरीत डबवाली के गांव मसीतां की रहने वाली है। मनुरीत ने बताया कि बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में टॉप स्थान हासिल करना चाहती थी। इसके लिए वह प्रतिदिन 7 घंटे सेल्फ स्टडी करती थी। हर रोज मम्मी सुबह चार बजे उठा देती थीं। स्कूल जाने से पहले सारे होमवर्क को अच्छे से याद कर लेती थी। स्कूल जाने के बाद कक्षा में अध्यापकों द्वारा दिए गए काम को घर आते ही करना एक रूटीन सा था। स्कूल का काम करने के बाद ऐसे टॉपिक को पढ़ती थी जो थोड़े मुश्किल होते थेे। इस मुश्किल टॉपिक में अगर कुछ समझ नहीं आता तो वह मोबाइल का प्रयोग कर समस्याओं का समाधान करती। मनुरीत ने बताया कि वह बड़ी होकर वकील बनना चाहती है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसके माता-पिता से उसे प्रेरणा मिलती है, उसके पिता मलूक सिंह पेशे से एक प्राइवेट डॉक्टर हैं। मनुरीत ने बताया कि वह जब पढ़ाई से थक जाती है तब माइंड रिलेक्स करने के लिए बैडमिंटन खेलती है।
चौकीदार के बेटे ने जिले में हासिल किया दूसरा स्थान
बोर्ड परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहे विनय कुमार ने 493 अंक हासिल किए। विनय सिरसा शहर का रहने वाला है। विनय ने बताया कि उनका सपना है कि वह बड़े होकर इंजीनियर बने। इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने 11वीं में नॉन मेडिकल में दाखिला लिया है, और प्रतिदिन दस घंटे पढ़ता है। विनय कुमार का कहना है कि लक्ष्य को हासिल करना हो तो पढ़ने का कोई समय नहीं होता जब दिल करे किताब उठाकर पढ़ना शुरू कर देता है। पिता राजकुमार सिरसा के बस स्टेंड पर चौकीदार हैं, लेकिन पिता को कभी यह कहने की जरूरत नहीं पड़ी कि पढ़ाई कर। विनय कुमार ने बताया कि निम्म वर्ग से उठकर कामयाब हुए लोगों की जीवनी पड़ता है, ताकि उसे उनका संघर्ष का पता लग सके। विनय कुमार का कहना है कि वह पढ़ाई से कभी थकता नहीं है। लेकिन कभी-कभी दोस्तों के साथ मिलकर क्रिकेट खूब खेलता है।
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पिता से आईपीएस बनने की मिलती है मोटिवेशन
जिले में तीसरे स्थान पर रही कीर्ति ने 492 अंक हासिल किए। कीर्ति सिरसा शहर की रहने वाली हैं और उसका सपना आईपीएस बनने का है। इस सपने को पूरा करने के लिए उसके माता-पिता उसका पूरा सहयोग कर रहे हैं। कीर्ति को अपने पटवारी पिता जसमीर से मोटिवेशन मिलती है तो वहीं माता मिनका दिन में 12 घंटे तक पढ़ने का शेड्यूल सेट करती हैं। कीर्ति ने बताया कि कुछ मम्मी ने टाइम टेबल इस तरह सेट किया है कि कुछ घंटों के अंतराल के बाद आराम कर सकें। दसवीं परीक्षाओं के लिए बहुत मेहनत की थी। टॉपिक्स को समझने के लिए किताबों को बार-बार पढ़ती रहती थी। जिन टॉपिक को समझने में मुश्किल होती थी उनको समझने के लिए मोबाइल का सहारा लेती थी। माइंड रिलेक्स करने के लिए वह गाने की धुनों को गुन गुनाती है। टीवी को बहुत कम देखती है, मोबाइल का प्रयोग केवल पढ़ाई के टॉपिक को पढ़ने के लिए प्रयोग करती है।
देश सेवा के लिए आईपीएस बनना चाहती है लवप्रीत
दसवीं बोर्ड परीक्षा में लवप्रीत कौर ने 492 अंक हासिल करके तीसरा स्थान हासिल किया है। वह लखुआना गांव की है। लवप्रीत का कहना है कि पढ़ने के लिए शेड्यूल नहीं बनाया। जब भी खाली समय मिलता है तो पढ़ने लग जाती हूं। लवप्रीत का कहना है कि उनका सपना है कि वह एक दिन आईपीएस बने और देश की सेवा करे। वह समाज के लिए मोटिवेशन बनना चाहती है। इसके लिए वह दिन में छह से सात घंटे पढ़ाई करती है। पढ़ाई के दौरान उन्हें जो भी समस्याएं आती थी वह उन समस्याओं को विषय अध्यापकों के पास ले जाकर समझती थी। दसवीं बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मोबाइल व टीवी से दूरी बनी रही। जिसका परिणाम है कि वह बोर्ड परीक्षाओं में टॉप थ्री में आई।
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शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ स्थान हासिल करना चाहती है मनुरीत
दसवीं बोर्ड की परीक्षा में जिले में पहले स्थान पर रही मनुरीत कौर ने 494 अंक हासिल किए। मनुरीत डबवाली के गांव मसीतां की रहने वाली है। मनुरीत ने बताया कि बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में टॉप स्थान हासिल करना चाहती थी। इसके लिए वह प्रतिदिन 7 घंटे सेल्फ स्टडी करती थी। हर रोज मम्मी सुबह चार बजे उठा देती थीं। स्कूल जाने से पहले सारे होमवर्क को अच्छे से याद कर लेती थी। स्कूल जाने के बाद कक्षा में अध्यापकों द्वारा दिए गए काम को घर आते ही करना एक रूटीन सा था। स्कूल का काम करने के बाद ऐसे टॉपिक को पढ़ती थी जो थोड़े मुश्किल होते थेे। इस मुश्किल टॉपिक में अगर कुछ समझ नहीं आता तो वह मोबाइल का प्रयोग कर समस्याओं का समाधान करती। मनुरीत ने बताया कि वह बड़ी होकर वकील बनना चाहती है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसके माता-पिता से उसे प्रेरणा मिलती है, उसके पिता मलूक सिंह पेशे से एक प्राइवेट डॉक्टर हैं। मनुरीत ने बताया कि वह जब पढ़ाई से थक जाती है तब माइंड रिलेक्स करने के लिए बैडमिंटन खेलती है।
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चौकीदार के बेटे ने जिले में हासिल किया दूसरा स्थान
बोर्ड परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहे विनय कुमार ने 493 अंक हासिल किए। विनय सिरसा शहर का रहने वाला है। विनय ने बताया कि उनका सपना है कि वह बड़े होकर इंजीनियर बने। इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने 11वीं में नॉन मेडिकल में दाखिला लिया है, और प्रतिदिन दस घंटे पढ़ता है। विनय कुमार का कहना है कि लक्ष्य को हासिल करना हो तो पढ़ने का कोई समय नहीं होता जब दिल करे किताब उठाकर पढ़ना शुरू कर देता है। पिता राजकुमार सिरसा के बस स्टेंड पर चौकीदार हैं, लेकिन पिता को कभी यह कहने की जरूरत नहीं पड़ी कि पढ़ाई कर। विनय कुमार ने बताया कि निम्म वर्ग से उठकर कामयाब हुए लोगों की जीवनी पड़ता है, ताकि उसे उनका संघर्ष का पता लग सके। विनय कुमार का कहना है कि वह पढ़ाई से कभी थकता नहीं है। लेकिन कभी-कभी दोस्तों के साथ मिलकर क्रिकेट खूब खेलता है।
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पिता से आईपीएस बनने की मिलती है मोटिवेशन
जिले में तीसरे स्थान पर रही कीर्ति ने 492 अंक हासिल किए। कीर्ति सिरसा शहर की रहने वाली हैं और उसका सपना आईपीएस बनने का है। इस सपने को पूरा करने के लिए उसके माता-पिता उसका पूरा सहयोग कर रहे हैं। कीर्ति को अपने पटवारी पिता जसमीर से मोटिवेशन मिलती है तो वहीं माता मिनका दिन में 12 घंटे तक पढ़ने का शेड्यूल सेट करती हैं। कीर्ति ने बताया कि कुछ मम्मी ने टाइम टेबल इस तरह सेट किया है कि कुछ घंटों के अंतराल के बाद आराम कर सकें। दसवीं परीक्षाओं के लिए बहुत मेहनत की थी। टॉपिक्स को समझने के लिए किताबों को बार-बार पढ़ती रहती थी। जिन टॉपिक को समझने में मुश्किल होती थी उनको समझने के लिए मोबाइल का सहारा लेती थी। माइंड रिलेक्स करने के लिए वह गाने की धुनों को गुन गुनाती है। टीवी को बहुत कम देखती है, मोबाइल का प्रयोग केवल पढ़ाई के टॉपिक को पढ़ने के लिए प्रयोग करती है।
देश सेवा के लिए आईपीएस बनना चाहती है लवप्रीत
दसवीं बोर्ड परीक्षा में लवप्रीत कौर ने 492 अंक हासिल करके तीसरा स्थान हासिल किया है। वह लखुआना गांव की है। लवप्रीत का कहना है कि पढ़ने के लिए शेड्यूल नहीं बनाया। जब भी खाली समय मिलता है तो पढ़ने लग जाती हूं। लवप्रीत का कहना है कि उनका सपना है कि वह एक दिन आईपीएस बने और देश की सेवा करे। वह समाज के लिए मोटिवेशन बनना चाहती है। इसके लिए वह दिन में छह से सात घंटे पढ़ाई करती है। पढ़ाई के दौरान उन्हें जो भी समस्याएं आती थी वह उन समस्याओं को विषय अध्यापकों के पास ले जाकर समझती थी। दसवीं बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मोबाइल व टीवी से दूरी बनी रही। जिसका परिणाम है कि वह बोर्ड परीक्षाओं में टॉप थ्री में आई।

मुनरीत का मुंह मीठा करवाते माता-पिता।- फोटो : Sirsa