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चार राज्यों में चुनावी प्रचार में गूंजती है किशन की आवाज
सिरसा ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2014 11:26 PM IST
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सिरसा। अपनी आवाज को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किशन माेंगा ने वर्ष 1981 में रिक्शा पर सवार हो कर प्रचार शुरू किया। लोगों को किशन की आवाज पसंद आने लगी और किशन ने कुछ ही वर्षों बाद चुनावी कैसेट के माध्यम से अपनी आवाज को जिले के साथ लगते क्षेत्रों तक पहुंचाया।
आवाज को पसंद करने वालों का क्षेत्र बढ़ता गया और न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में भी किशन की आवाज की मांग हो गई। बड़े-बड़े नेताओं के प्रचार के लिए अब किशन की आवाज की मांग खूब है। चौटाला परिवार, बादल परिवार, भजन लाल परिवार, दिपेंद्र हुड्डा और दिल्ली व राजस्थान के दिग्गजों का चुनाव प्रचार किशन की आवाज में कई वर्षों से हो रहा है। 33 वर्षों से चुनावी प्रचार में पसंद बनी आवाज को तो हर कोई पहचान लेता है पर यह आवाज किसकी है इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
रानियां गेट पर है दुकान
सिरसा के रानियां गेट पर एक छोटी सी दुकान में स्टूडियो बना कर बैठा किशन मोंगा दिन भर नेताओं के गुणगान को अपनी आवाज में ढालने में व्यस्त रहता है। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उसने बताया कि वह गुलशन कुमार को अपना आदर्श मानता है और उन्होंने की नीति अनुसार काम करता है। उसने बताया कि जैसे गुलशन कुमार ने मात्र 15 रुपये में धार्मिक कैसेटों के माध्यम से देश भर में अपनी आवाज को जन-जन तक पहुंचाया उसी प्रकार वह मात्र पांच सौ रुपये लेकर नेता का प्रचार अपनी आवाज में करता है। किशन ने बताया कि उसे राशि अधिक लेने से ज्यादा अपनी आवाज को जन-जन तक पहुंचाने की ललक रहती है। उसने बताया कि हर छोटे-बड़े चुनाव में दूर-दराज के नेता उसकी आवाज में अपना प्रचार करने के लिए कैसेट भरवाते हैं।
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अब कैसेटों की जगह पेनड्राइव
उसका कहना है कि लोगों को आवाज के साथ-साथ उसकी शैली भी पसंद आती है। किशन बताया कि वर्ष 1986 से 2009 तक कैसेटों का खूब प्रचलन रहा पर अब कैसेटों के स्थान पर पेनड्राइव आ गई है। किशन के पास चुनावी सीजन में समय का अभाव हो जाता है। आवाज में अपना चुनाव प्रचार करवाने वाले नेताओं की मांग के अनुसार वह दिन में घंटो तक रिकार्डिंग के काम में लगा रहता है। उसने बताया कि इस बार कुछ राहत इस लिए भी है कि हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में चुनाव अलग-अलग चरणों में हैं। इस समय दुष्यंत चौटाला, दिपेंद्र हुडा, अशोक तंवर, कुलदीप बिश्नोई सहित अनेक नेताओं का प्रचार किशन की आवाज ही कर रही है। किशन का मानना है कि उसे खुशी है कि उसकी आवाज को लोेग सुनते हैं और उसके लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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आवाज को पसंद करने वालों का क्षेत्र बढ़ता गया और न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में भी किशन की आवाज की मांग हो गई। बड़े-बड़े नेताओं के प्रचार के लिए अब किशन की आवाज की मांग खूब है। चौटाला परिवार, बादल परिवार, भजन लाल परिवार, दिपेंद्र हुड्डा और दिल्ली व राजस्थान के दिग्गजों का चुनाव प्रचार किशन की आवाज में कई वर्षों से हो रहा है। 33 वर्षों से चुनावी प्रचार में पसंद बनी आवाज को तो हर कोई पहचान लेता है पर यह आवाज किसकी है इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
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रानियां गेट पर है दुकान
सिरसा के रानियां गेट पर एक छोटी सी दुकान में स्टूडियो बना कर बैठा किशन मोंगा दिन भर नेताओं के गुणगान को अपनी आवाज में ढालने में व्यस्त रहता है। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उसने बताया कि वह गुलशन कुमार को अपना आदर्श मानता है और उन्होंने की नीति अनुसार काम करता है। उसने बताया कि जैसे गुलशन कुमार ने मात्र 15 रुपये में धार्मिक कैसेटों के माध्यम से देश भर में अपनी आवाज को जन-जन तक पहुंचाया उसी प्रकार वह मात्र पांच सौ रुपये लेकर नेता का प्रचार अपनी आवाज में करता है। किशन ने बताया कि उसे राशि अधिक लेने से ज्यादा अपनी आवाज को जन-जन तक पहुंचाने की ललक रहती है। उसने बताया कि हर छोटे-बड़े चुनाव में दूर-दराज के नेता उसकी आवाज में अपना प्रचार करने के लिए कैसेट भरवाते हैं।
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अब कैसेटों की जगह पेनड्राइव
उसका कहना है कि लोगों को आवाज के साथ-साथ उसकी शैली भी पसंद आती है। किशन बताया कि वर्ष 1986 से 2009 तक कैसेटों का खूब प्रचलन रहा पर अब कैसेटों के स्थान पर पेनड्राइव आ गई है। किशन के पास चुनावी सीजन में समय का अभाव हो जाता है। आवाज में अपना चुनाव प्रचार करवाने वाले नेताओं की मांग के अनुसार वह दिन में घंटो तक रिकार्डिंग के काम में लगा रहता है। उसने बताया कि इस बार कुछ राहत इस लिए भी है कि हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में चुनाव अलग-अलग चरणों में हैं। इस समय दुष्यंत चौटाला, दिपेंद्र हुडा, अशोक तंवर, कुलदीप बिश्नोई सहित अनेक नेताओं का प्रचार किशन की आवाज ही कर रही है। किशन का मानना है कि उसे खुशी है कि उसकी आवाज को लोेग सुनते हैं और उसके लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।