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लावारिस पशुओं से टकराई किसान एक्सप्रेस, रेलगाड़ी का इंजन हुआ खराब, साढ़े छह घंटे फंसे यात्री
ब्यूरो / अमर उजाला , सिरसा
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:47 AM IST
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सिरसा रेलवे स्टेशन
- फोटो : buraeau
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दिल्ली से चलकर सिरसा होते हुए बठिंडा जाने वाली किसान एक्सप्रेस शुक्रवार की रात हादसा ग्रस्त हो गई। सिरसा से रवाना होते ही चरतगढ़पट्टी रेलवे फाटक क्रास करते ही लावारिस सांडों का झुंड रेलवे लाइन पर खड़ा था। सांड किसान एक्सप्रेस के इंजन से टकरा गए। हादसे के बाद जोरदार धमाके के साथ ट्रेेन का इंजन खराब हो गया। हालांकि हादसे में ट्रेन में सवार किसी भी यात्री को कोई हानि नहीं हुई, जबकि इंजन की चपेट में आने से तीन सांडों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर रेलवे अधिकारी व जीआरपी मौके पर पहुंची। इंजन खराब होने से सिरसा-बठिंडा रेलवे ट्रैक साढ़े छह घंटे तक बाधित रहा, रात को यात्री कहां जाएं कै से जाएं इसे लेकर यात्री परेशान हो गए। करीब दो हजार यात्री ट्रेन से उतकर किसी तरह पैदल सिरसा पहुंचे और किराए पर वाहन करके कालांवाली, राममंडी व बठिंडा की ओर रवाना हुए। रेल अधिकारियों ने देर रात ढाई बजे किसी तरह मालगाड़ी का इंजन मंगवाकर किसान एक्सप्रेस से जोड़कर उसे बठिंडा रवाना किया।
जानकारी के अनुसार दिल्ली से बठिंडा जाने वाली किसान एक्सप्रेस रेलगाड़ी अपने निर्धारित समय आठ बजकर 20 मिनट पर सिरसा स्टेशन पर पहुंची और साढ़े आठ बजे सिरसा से बठिंडा के लिए रवाना हो गई। चतरगढ़पट्टी रेलवे फाटक से कुछ ही दूरी पर लावारिस सांडों का झुंड किसान एक्सप्रेस के सामने आ गया। तेज की रफ्तार होने के चलते ड्राइवर एकदम से ब्रेक नहीं लगा सकता था, रेलगाड़ी सीधा लावारिस पशुओं से टकरा गई, जिससे जोरदार धमका हुआ। रेलगाड़ी में सवार यात्री तेज झटके और धमाके की आवाज से सहम गए। तीन सांड रेल इंजन तले कट चुके थे और इंजन खराब हो गया। घटना की सूचना मिलने पर सिरसा स्टेशन से सभी अधिकारी और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। ट्रेन चालक ने इंजन को स्टार्ट करने का प्रयास किया, लेकिन इंजन में टक्कर के कारण बड़ी खराब आ चुकी थी इसलिए वह ठीक नहीं हुआ। सिंगल ट्रैक होनेे के चलते जब तक दूसरे इंजन का प्रबंध नहीं होता जब तक सिरसा-बठिंडा रेलवे ट्रैक बाधित रहता। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि ये तो भगवान का शुक्र है कि बड़ा हादसा टल गया और इंजन ही खराब होकर रह गया।
रेल यात्रियों ने किया हंगामा
रेलगाड़ी में सवार हजारों यात्री इंजन खराब होेने के चलते सुनसान जगह में फंसकर रह गए थे। परेशान यात्री हंगामा करके रेलवे अधिकारियों को कोसने लगे। अधिकारी यात्रियों को भरोसा देते रहे कि जल्द दूसरा इंजन आने वाला है, लेकिन रात दस बजे यात्रियों के सब्र का बांध टूट गया और देखते ही देखते रेलगाड़ी के सारे यात्री किसान एक्सप्रेस को छोड़कर पैदल-पैदल सिरसा की तरफ रवाना हो गए। यात्रियों ने अधिकारियों से अपना किराया वापस मांगा जो उन्हें नहीं दिया गया।
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पेपर देने जाना था, रेल प्रशासन के भरोस रहता तो छूट जाता
किसान एक्सप्रेस में हादसे के समय करीब दो हजार यात्री थे जिन्हें बठिंडा तक जाना था। यात्रियों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की थी। ट्रेन में सफर कर रहे सिरसा निवासी शशि कुमार, ऋषभ ने बताया कि वे सिरसा से बठिंडा के लिए रवाना हुए थे। सभी यात्री आराम से अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। अचानक जोरदार झटका लगा, जिससे सभी सहम गए। रेलगाड़ी रुकी तो सभी इंजन की तरफ भागे और वहां पहुंचकर दृश्य विचलित करने वाला था। इंजन की टक्कर से लावारिस पशुओं अंग चारों तरफ फैले हुए थे। डेढ़ घंटे दूसरे इंजन की इंतजार करने के बाद महसूस होने लगा कि अब कोई फायदा नहीं। रेलगाड़ी के सभी यात्री पैदल सिरसा पहुंचे और फिर बसों व वाहन किराए पर करके आगे रवाना हुए। शशि का कहना है कि उसने चंडीगढ़ में पेपर देने जाना था, ट्रेन के भरोसे रहता तो नौकरी की परीक्षा नहीं दे पाता।
रात ढाई बजे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन
देर रात मालगाड़ी सिरसा स्टेशन पर पहुंची तो रेलवेे अधिकारियों ने मालगाड़ी का इंजन किसान एक्सप्रेस से जोड़ा। फिर किसान एक्सप्रेस को सिरसा स्टेशन लाया गया। जींद से सिरसा होकर हिसार जाने वाली रेलगाड़ी भी किसान एक्सप्रेस के चक्कर में काफी देर खड़ी रही। रात ढाई बजे सिरसा स्टेशन से किसान एक्सप्रेस के आगे मालगाड़ी का इंजन लगाकर उसे बठिंडा के लिए रवाना किया गया। ट्रेन जब रवाना हुई तो सभी डिब्बे यात्रियों के बिना खाली थे। शनिवार सुबह किसान अपने निर्धारित समय सुबह सवा आठ बजे बठिंडा से सिरसा पहुंची।
हादसे के कारण रेलगाड़ी का इंजन खराब हो गया था, दूसरे इंजन का प्रबंध करने में समय लगा जिससे यात्रियों को असुविधा झेलने पड़ी। टिकट बुकिंग की स्थिति में यात्रियों को कुछ रकम काटकर उनका पैसा वापिस कर दिया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में टिकट का रुपया वापस करने कोई प्रावधान नहीं है। हादसे का मुख्य कारण लावारिस पशु हैं, प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। किसान एक्सप्रेस को रात ढाई बजे सिरसा से रवाना किया गया था।
अमर सिंह, स्टेशन मास्टर, सिरसा।
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जानकारी के अनुसार दिल्ली से बठिंडा जाने वाली किसान एक्सप्रेस रेलगाड़ी अपने निर्धारित समय आठ बजकर 20 मिनट पर सिरसा स्टेशन पर पहुंची और साढ़े आठ बजे सिरसा से बठिंडा के लिए रवाना हो गई। चतरगढ़पट्टी रेलवे फाटक से कुछ ही दूरी पर लावारिस सांडों का झुंड किसान एक्सप्रेस के सामने आ गया। तेज की रफ्तार होने के चलते ड्राइवर एकदम से ब्रेक नहीं लगा सकता था, रेलगाड़ी सीधा लावारिस पशुओं से टकरा गई, जिससे जोरदार धमका हुआ। रेलगाड़ी में सवार यात्री तेज झटके और धमाके की आवाज से सहम गए। तीन सांड रेल इंजन तले कट चुके थे और इंजन खराब हो गया। घटना की सूचना मिलने पर सिरसा स्टेशन से सभी अधिकारी और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। ट्रेन चालक ने इंजन को स्टार्ट करने का प्रयास किया, लेकिन इंजन में टक्कर के कारण बड़ी खराब आ चुकी थी इसलिए वह ठीक नहीं हुआ। सिंगल ट्रैक होनेे के चलते जब तक दूसरे इंजन का प्रबंध नहीं होता जब तक सिरसा-बठिंडा रेलवे ट्रैक बाधित रहता। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि ये तो भगवान का शुक्र है कि बड़ा हादसा टल गया और इंजन ही खराब होकर रह गया।
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रेल यात्रियों ने किया हंगामा
रेलगाड़ी में सवार हजारों यात्री इंजन खराब होेने के चलते सुनसान जगह में फंसकर रह गए थे। परेशान यात्री हंगामा करके रेलवे अधिकारियों को कोसने लगे। अधिकारी यात्रियों को भरोसा देते रहे कि जल्द दूसरा इंजन आने वाला है, लेकिन रात दस बजे यात्रियों के सब्र का बांध टूट गया और देखते ही देखते रेलगाड़ी के सारे यात्री किसान एक्सप्रेस को छोड़कर पैदल-पैदल सिरसा की तरफ रवाना हो गए। यात्रियों ने अधिकारियों से अपना किराया वापस मांगा जो उन्हें नहीं दिया गया।
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पेपर देने जाना था, रेल प्रशासन के भरोस रहता तो छूट जाता
किसान एक्सप्रेस में हादसे के समय करीब दो हजार यात्री थे जिन्हें बठिंडा तक जाना था। यात्रियों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की थी। ट्रेन में सफर कर रहे सिरसा निवासी शशि कुमार, ऋषभ ने बताया कि वे सिरसा से बठिंडा के लिए रवाना हुए थे। सभी यात्री आराम से अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। अचानक जोरदार झटका लगा, जिससे सभी सहम गए। रेलगाड़ी रुकी तो सभी इंजन की तरफ भागे और वहां पहुंचकर दृश्य विचलित करने वाला था। इंजन की टक्कर से लावारिस पशुओं अंग चारों तरफ फैले हुए थे। डेढ़ घंटे दूसरे इंजन की इंतजार करने के बाद महसूस होने लगा कि अब कोई फायदा नहीं। रेलगाड़ी के सभी यात्री पैदल सिरसा पहुंचे और फिर बसों व वाहन किराए पर करके आगे रवाना हुए। शशि का कहना है कि उसने चंडीगढ़ में पेपर देने जाना था, ट्रेन के भरोसे रहता तो नौकरी की परीक्षा नहीं दे पाता।
रात ढाई बजे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन
देर रात मालगाड़ी सिरसा स्टेशन पर पहुंची तो रेलवेे अधिकारियों ने मालगाड़ी का इंजन किसान एक्सप्रेस से जोड़ा। फिर किसान एक्सप्रेस को सिरसा स्टेशन लाया गया। जींद से सिरसा होकर हिसार जाने वाली रेलगाड़ी भी किसान एक्सप्रेस के चक्कर में काफी देर खड़ी रही। रात ढाई बजे सिरसा स्टेशन से किसान एक्सप्रेस के आगे मालगाड़ी का इंजन लगाकर उसे बठिंडा के लिए रवाना किया गया। ट्रेन जब रवाना हुई तो सभी डिब्बे यात्रियों के बिना खाली थे। शनिवार सुबह किसान अपने निर्धारित समय सुबह सवा आठ बजे बठिंडा से सिरसा पहुंची।
हादसे के कारण रेलगाड़ी का इंजन खराब हो गया था, दूसरे इंजन का प्रबंध करने में समय लगा जिससे यात्रियों को असुविधा झेलने पड़ी। टिकट बुकिंग की स्थिति में यात्रियों को कुछ रकम काटकर उनका पैसा वापिस कर दिया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में टिकट का रुपया वापस करने कोई प्रावधान नहीं है। हादसे का मुख्य कारण लावारिस पशु हैं, प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। किसान एक्सप्रेस को रात ढाई बजे सिरसा से रवाना किया गया था।
अमर सिंह, स्टेशन मास्टर, सिरसा।