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बंद कंटेनर में ले जाया जा रहा था गोवंश, चालक सहित 2 चढ़े पुलिस के हत्थे

Sat, 11 Jul 2020 12:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2020 12:18 AM IST
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Got the cow dunasty free
थाने में खड़ा कंटेनर। - फोटो : Sirsa
ओढां बस स्टैंड के निकट नाकाबंदी करते हुए पुलिस ने एक बंद बॉडी कंटेनर से गोकशी के लिए ले जाए जा रहे गोवंशों को मुक्त करवाय। पुलिस ने चालक सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। वीरवार रात्रि पुलिस को सूचना मिली थी कि बठिंडा की तरफ से एक बंद बॉडी कंटेनर आ रहा है जिसमें गोवंश भरे हुए है। सूचना के बाद एसआई मदन लाल ने बस स्टैंड के निकट नाकाबंदी करते हुए कंटेनर को रुकवाया। तलाशी के दौरान पुलिस ने कंटेनर से 24 बैल व 3 गाय बरामद की। सभी गोवंश को रस्सियों से बांधकर उनके साथ क्रूरता की हुई थी। थाना प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस ने चालक यूपी निवासी शादाब व परिचालक वकील कुरैशी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। बरामद गोवंशों को पुलिस ने पन्नीवाला मोटा गोशाला में छोड़ दिया गया। पुलिस पूछताछ में चालक शादाब व वकील कुरेशी ने बताया कि वे कंटेनर में पार्सल भरकर पंजाब गए थे। वापिस आते समय उन्होंने लालचवश गोवंश भर लिए।
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प्रबंधक कमेटी बोली, हमारे पास गोवंश रखने की जगह नहीं है : पुलिस जब गोवंश को लेकर पन्नीवाला मोटा गोशाला में पहुंची तो वहां पर प्रबंधन कमेटी ने कहा कि उनके पास पहले ही बहुत गोवंश है। इससे पहले भी पुलिस कई बार इस गोशाला में गोवंश को छोड़ चुकी है लेकिन अभी तक सरकार या विभाग की ओर से उनके पास गोवंश की देखरेख के लिए कोई राशि नहीं भेजी गई। अगर वे इसी तरह यहां गोवंश को छोड़ते रहे तो गोशाला का संचालक करना मुश्किल साबित हो जाएगा। गोशाला के प्रधान कृष्ण लाल खीचड़ व उप प्रधान लाला राम डूडी ने बताया कि पन्नीवाला गोशाला में करीब 600 गोवंश है। बडागुढ़ा, कालांवाली या ओढां पुलिस जब भी कोई ट्रक पकड़ती है तो ज्यादातर गोवंश इसी गोशाला में भेजा जाता है। उन्हें आश्वस्त किया कि जाता है कि गोवंश की देखभाल के लिए उन्हें सरकार की ओर से राशि दिलवा दी जाएगी। अभी तक एक पैसा भी नहीं आया।
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गोशालाएं लोगों के सहयोग से चलती है। हम गोशालाओं में गोवंश को रखने से इन्कार नहीं कर रहे लेकिन जो बैल हैं उन्हें हम गोशालाओं में नहीं रख सकते। उन्हें नंदीशालाओं में रखा जाए अन्य गोवंश के रख-रखाव पर खर्च आता है उसका तो भुगतान प्रशासन को करना चाहिए। अगर इसी तरह से गोशालाओं पर बोझ बढ़ता गया तो उन्हें चलाना मुश्किल साबित हो जाएगा। - योगेश बिश्नोई, राज्य वरिष्ठ उप प्रधान, गोसेवा संघ।
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