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Sirsa News: संत पंचमी पर सरस्वती माता मंदिर में लगा मेला, दिनभर लगा रहा भक्तों का तांता
Mon, 03 Feb 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 03 Feb 2025 12:08 AM IST
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सिरसा से निकलते ही जमाल रोड पर दक्षिण की तर्ज पर बना मां सरस्वती का मंदिर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। वसंत पंचमी पर सिरसा से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर गांव रंगड़ी खेड़ा के समीप सरस्वती मंदिर मेंं रविवार को मेला आयोजित किया गया। मंदिर में सुबह के समय पूजा अर्चना व हवन हुआ। इसके बाद दिनभर मंदिर में सरस्वती मां का गुणगान हुआ।
मंदिर में दिनभर दूर-दराज से श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। मंदिर परिसर में हलवा, पूरी व सब्जी का दिनभर भंडारे चलता रहा। समाज सेवी जुगल सेठी ने बताया कि मंदिर परिसर में हर साल वसंत पंचमी पर भंडारा लगाया जाता है। इस मंदिर से लोगों को की काफी आस्था है। वसंत पंचमी के दिन यहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है।
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दक्षिणी भारत के मंदिरों की तरह ही सरस्वती माता का मंदिर
सरस्वती माता का यह मंदिर पूरी तरह दक्षिणी भारत के मंदिरों की तरह ही है। यह सिरसा में मां सरस्वती का एकमात्र मंदिर है। मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण जुगल किशोर सेठी ने अपनी माता शकुंतला सेठी की इच्छा पूरी करने के लिए करवाया है। 2002 में इस मंदिर की नींव रखी गई और 2006 में मंदिर बनकर तैयार हुआ। उस वक्त इस मंदिर के निर्माण में करीब 50 लाख की राशि खर्च हुई थी।
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निर्माण के लिए तमिलनाडु से आए थे कारीगर
पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि जुगल किशोर सेठी को व्यापार की वजह से तमिलनाडु जाना होता था। तमिलनाडु में उन्होंने वहां के सभी मंदिर देखे, तो उन मंदिरों को देखकर उनको ख्याल आया कि सिरसा में भी ऐसा मंदिर होना चाहिए। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु से कारीगर बुलाए और मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। आज भी मंदिर का रंग रोगन करना होता है तो तमिलनाडु के कारीगर ही बुलाए जाते हैं।
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चोपटा। वसंत पंचमी पर सिरसा से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर गांव रंगड़ी खेड़ा के समीप सरस्वती मंदिर मेंं रविवार को मेला आयोजित किया गया। मंदिर में सुबह के समय पूजा अर्चना व हवन हुआ। इसके बाद दिनभर मंदिर में सरस्वती मां का गुणगान हुआ।
मंदिर में दिनभर दूर-दराज से श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। मंदिर परिसर में हलवा, पूरी व सब्जी का दिनभर भंडारे चलता रहा। समाज सेवी जुगल सेठी ने बताया कि मंदिर परिसर में हर साल वसंत पंचमी पर भंडारा लगाया जाता है। इस मंदिर से लोगों को की काफी आस्था है। वसंत पंचमी के दिन यहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है।
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दक्षिणी भारत के मंदिरों की तरह ही सरस्वती माता का मंदिर
सरस्वती माता का यह मंदिर पूरी तरह दक्षिणी भारत के मंदिरों की तरह ही है। यह सिरसा में मां सरस्वती का एकमात्र मंदिर है। मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण जुगल किशोर सेठी ने अपनी माता शकुंतला सेठी की इच्छा पूरी करने के लिए करवाया है। 2002 में इस मंदिर की नींव रखी गई और 2006 में मंदिर बनकर तैयार हुआ। उस वक्त इस मंदिर के निर्माण में करीब 50 लाख की राशि खर्च हुई थी।
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निर्माण के लिए तमिलनाडु से आए थे कारीगर
पुजारी ओमप्रकाश ने बताया कि जुगल किशोर सेठी को व्यापार की वजह से तमिलनाडु जाना होता था। तमिलनाडु में उन्होंने वहां के सभी मंदिर देखे, तो उन मंदिरों को देखकर उनको ख्याल आया कि सिरसा में भी ऐसा मंदिर होना चाहिए। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु से कारीगर बुलाए और मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। आज भी मंदिर का रंग रोगन करना होता है तो तमिलनाडु के कारीगर ही बुलाए जाते हैं।