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Sirsa News: छठ पूजा के लिए श्रद्धालु बना रहे अपने घाट, व्रत की तैयारियों में जुटीं महिलाएं
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सिरसा। दिल्ली पुल पर नहाय खाए के लिए नहर पर साफ -सफाई करते हुए पूर्वांचल के लोग। संवाद
सिरसा। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ पूजा जिलेभर में रह रहे पूर्वांचल के लोगों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। दिल्ली पुल स्थित मेजर नहर के किनारे पिछले एक सप्ताह से श्रद्धालु घाटों की सजावट और सफाई में जुटे हुए हैं। हर ओर धार्मिक माहौल बना हुआ है।
25 अक्तूबर से नहाय-खाय के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। इसके बाद श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा-अर्चना करेंगे। छठ पूजा का यह चार दिवसीय पर्व 25 अक्तूबर से शुरू होकर 28 अक्तूबर तक चलेगा। श्रद्धालुओं ने दिल्ली पुल से लेकर बाजेकां फाटक तक नहर किनारे अपने-अपने घाट स्थापित किए हैं। घाटों की सफाई और सजावट का कार्य निरंतर जारी है।
कई परिवार अपने स्तर पर मिट्टी, फूल और रंग-बिरंगी सजावट से घाटों को सजा रहे हैं। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, पेयजल और साफ-सफाई के लिए स्वयंसेवक लगातार सक्रिय हैं। पूर्वांचल के लोगो में छठ पर्व के लिए आस्था और उल्लास का माहौल है। महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं पुरुष घाट निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।
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संकीर्तन के लिए लगाए जा रहे हैं टेंट
पूर्वांचल सेवा समिति की ओर से छठ पूजा कार्यक्रम के लिए दिल्ली पुल नहर पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नहर पर सफाई अभियान के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पूजा की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा नहर के आसपास भजन संकीर्तन के लिए टेंट भी लगाए जा रहे हैं, छठ पूजा के लिए जय मां सरस्वती सेवा समिति के सदस्यों की ओर से नहर की सफाई और घाट निर्माण का कार्य किया जाएगा।
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खरीदारी के लिए सजने लगे बाजार
छठ पूजा के लिए बाजार सजने लगे हैं। बाजार में फल, पूजा सामग्री, गन्ना और अन्य सामान की बिक्री होने लगी है। श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी शुरू कर दी है। छठ पर्व पर श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के फल अर्पित करते हैं। बाजारों में टोकरियां और पूजा सामग्री बिकने लगी हैं। वहीं गन्ना, अनानास सहित विभिन्न प्रकार के फलों की दुकानें लग रही हैं। छठ पूजा में गन्ने और अनानास का विशेष महत्व है।
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पहला दिन : नहाय खाय
नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान करके भोजन करती हैं। इस दिन महिलाएं भात, चना दाल और लौकी का भोजन करती हैं।
दूसरा दिन : खरना
इस दिन व्रतधारी खरना पूजन करती हैं। सबसे पहले उपासक स्नान करती हैं। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर साठ के चावल, गुड़ और दूध की खीर बनाती हैं। भोग स्वरूप खीर को माता छठ को अर्पित किया जाता है। अंत में व्रती प्रसाद को ग्रहण करती हैं। इस दिन एक समय ही भोजन का विधान है। इसी दिन से 36 घंटे के लिए निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य
इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, व्रती महिलाएं पवित्र नदी या कुंड में डुबकी लगाती हैं। सूर्य और छठी मैय्या की पूजा की जाती है। सूर्यास्त के समय लोकगीत गाए जाते हैं। प्रसाद के रूप में पारंपरिक व्यंजन सूर्य देव को चढ़ाए जाते हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, भक्त न कुछ खाते हैं और न ही जल पीते हैं।
चौथे दिन : पारण
छठ पूजा के चौथे दिन यानी सप्तमी के दिन सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न होती है।
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छठ पूजा पर्व हमारा मुख्य पर्व है। शहरवासी मिलजुल कर धूमधाम से इस पर्व को मनाते हैं। 25 अक्तूबर को नहाय-खाय से छठ पूजा आरंभ होगी और 27 अक्तूबर को पारण होगा। महिलाओं के साथ पुरुष भी इस त्योहार में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं।
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महेंद्र कुमार, सदस्य, जय मां सरस्वती सेवा समिति
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25 अक्तूबर से नहाय-खाय के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। इसके बाद श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा-अर्चना करेंगे। छठ पूजा का यह चार दिवसीय पर्व 25 अक्तूबर से शुरू होकर 28 अक्तूबर तक चलेगा। श्रद्धालुओं ने दिल्ली पुल से लेकर बाजेकां फाटक तक नहर किनारे अपने-अपने घाट स्थापित किए हैं। घाटों की सफाई और सजावट का कार्य निरंतर जारी है।
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कई परिवार अपने स्तर पर मिट्टी, फूल और रंग-बिरंगी सजावट से घाटों को सजा रहे हैं। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, पेयजल और साफ-सफाई के लिए स्वयंसेवक लगातार सक्रिय हैं। पूर्वांचल के लोगो में छठ पर्व के लिए आस्था और उल्लास का माहौल है। महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं पुरुष घाट निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।
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संकीर्तन के लिए लगाए जा रहे हैं टेंट
पूर्वांचल सेवा समिति की ओर से छठ पूजा कार्यक्रम के लिए दिल्ली पुल नहर पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नहर पर सफाई अभियान के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पूजा की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा नहर के आसपास भजन संकीर्तन के लिए टेंट भी लगाए जा रहे हैं, छठ पूजा के लिए जय मां सरस्वती सेवा समिति के सदस्यों की ओर से नहर की सफाई और घाट निर्माण का कार्य किया जाएगा।
खरीदारी के लिए सजने लगे बाजार
छठ पूजा के लिए बाजार सजने लगे हैं। बाजार में फल, पूजा सामग्री, गन्ना और अन्य सामान की बिक्री होने लगी है। श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी शुरू कर दी है। छठ पर्व पर श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के फल अर्पित करते हैं। बाजारों में टोकरियां और पूजा सामग्री बिकने लगी हैं। वहीं गन्ना, अनानास सहित विभिन्न प्रकार के फलों की दुकानें लग रही हैं। छठ पूजा में गन्ने और अनानास का विशेष महत्व है।
पहला दिन : नहाय खाय
नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान करके भोजन करती हैं। इस दिन महिलाएं भात, चना दाल और लौकी का भोजन करती हैं।
दूसरा दिन : खरना
इस दिन व्रतधारी खरना पूजन करती हैं। सबसे पहले उपासक स्नान करती हैं। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर साठ के चावल, गुड़ और दूध की खीर बनाती हैं। भोग स्वरूप खीर को माता छठ को अर्पित किया जाता है। अंत में व्रती प्रसाद को ग्रहण करती हैं। इस दिन एक समय ही भोजन का विधान है। इसी दिन से 36 घंटे के लिए निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य
इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, व्रती महिलाएं पवित्र नदी या कुंड में डुबकी लगाती हैं। सूर्य और छठी मैय्या की पूजा की जाती है। सूर्यास्त के समय लोकगीत गाए जाते हैं। प्रसाद के रूप में पारंपरिक व्यंजन सूर्य देव को चढ़ाए जाते हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, भक्त न कुछ खाते हैं और न ही जल पीते हैं।
चौथे दिन : पारण
छठ पूजा के चौथे दिन यानी सप्तमी के दिन सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न होती है।
छठ पूजा पर्व हमारा मुख्य पर्व है। शहरवासी मिलजुल कर धूमधाम से इस पर्व को मनाते हैं। 25 अक्तूबर को नहाय-खाय से छठ पूजा आरंभ होगी और 27 अक्तूबर को पारण होगा। महिलाओं के साथ पुरुष भी इस त्योहार में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं।
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महेंद्र कुमार, सदस्य, जय मां सरस्वती सेवा समिति