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Sirsa News: डेराप्रमुख ने बताए फिल्म के किस्से कहा- भूत से डरने की जरूरत नहीं

Mon, 03 Feb 2025 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 03 Feb 2025 12:13 AM IST
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Dera Pramukh told the story of the film and said - there is no need to be afraid of ghosts
डेरा सच्चा सौदा के मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिसकर्मी।  संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। डेरा प्रमुख राम रहीम ने 1 फरवरी को दिए प्रवचन में अपनी फिल्म के किस्से सुनाकर संगत को बताया कि भूत-प्रेत से डरने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा- आदिवासियों के ऊपर फिल्म बनी थी। प्रोड्यूसर ने शूटिंग के लिये किला चुना। किला खंडहर था। हम लोग जा रहे थे। बच्चे भी साथ थे, सारे दूसरे सेवादार भी साथ थे।

एक जगह पर ‘ओम लिखा था तो रुक गए। बाद में टेंट में चले गए। उस दौरान प्रोड्यूसर कहने लगा कि कहा जा रहे हो सर। मैंने कहा-भानगढ़ के किले में। वह कहने लगा-जी वहां मत जाना। वहां भूत रहते हैं। आदमी फोटो खिंचाएगा तो पीछे औरतें खड़ी नजर आती हैं और औरत फोटो खिंचाएगी तो पीछे आदमी खड़े नजर आते हैं।
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हमने कहा प्रोड्यूसर साहब ऐसे करो ये जूनियर एक्टर जो पीछे नाचते हैं उनको बुलवाने की जरूरत नहीं। कहा क्यों? अब हीरो नाचेगा तो पीछे भूतनियां अपने आप ही आ जाएंगी और हीरोइन नाचेगी तो पीछे भूत आ जाएंगे। हमने कहा कि बेटा अभी झूठी करने जा रहे हैं। हम रात को भी शूटिंग करने की कोशिश करेंगे।
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जब वहां पहुंचे तो बोर्ड पर लिखा था- शाम के 6 बजे के बाद कोई नहीं रहेगा। पुलिस ने कहा-रात के 6:00 बजे के बाद तो अलाउड ही नहीं है। फिर हमने उसकी परमिशन ली। रात को शूटिंग शुरू की। सारा किला घूम लिया लेकिन कोई भूत नहीं मिला। 4-5 दिन बाद पुलिसवाले मिले तो कहने लगे- अब तो गांव के आसपास के लोग डरते ही नहीं। रात को भी आने लग गए।

नामदान कर डेरा प्रमुख ने संगत में भरा जोश, ग्रामीण जोन में चली आतिशबाजी
डेरा सच्चा सौदा सिरसा में साढ़े सात साल बाद रविवार को नामदान का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम को लेकर तीन दिनों से डेरा प्रबंधन तैयारियों में लगा था। प्रबंधन इस आयोजन में भीड़ नहीं जुटाना चाहता था, लिहाजा संगत को ग्रामीण इलाकों में बने ब्लॉक स्तर के नामचर्चा घरों का रुख करना पड़ा।
ब्लॉक स्तर पर बने नामचर्चा घरों पर आतिशबाजी की व्यवस्था की गई थी। ज़ब सुबह 11 बजे के आसपास डेराप्रमुख लाइव आये तों इन नामचर्चा घरों के बाहर आतिशबाजी कर श्रद्धालुओं ने खुशी का इजहार किया।

नामदान के माध्यम से डेरे की संगत को एक बार फिर जोश में लाने और साधने का कार्य किया गया। अहम बात यह रही कि इन नामचर्चा घरों और पुराने डेरे में लोगों की भारी भीड़ जमा न होने पाए, इसके लिए संगत विशेष रूप से चौकस रही। इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों को आने-जाने की व्यवस्था अलग-अलग बनाई गई।


डेरे के समर्थकों में जोश बरकरार रखने के लिए सिरसा में नामदान का कार्यक्रम करना ज़रूरी था। संगत भी मान रही है कि इस कार्यक्रम से उनमें जोश पैदा हुआ है। उनका विश्वास बढ़ा है कि जल्द से जल्द डेरामुखी सिरसा में पूरी तरह से विराजमान होंगे। डेरा प्रबंधन भी शांतिप्रिय आयोजन करवाकर नियमित जमानत की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
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