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बेटे की फोटो लेकर पांच दिन से सिरसा में भटक रहे है माता-पिता
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:16 AM IST
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बेटे की फोटो लेकर पांच दिन से सिरसा में भटक रहे हैं माता-पिता
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
हैदराबाद से कोटा जाते समय ट्रेन में सवार एक युवक लापता हो गया। परिजन उसकी तलाश में पिछले पांच दिन से इस उम्मीद में सिरसा में डेरा डाले हुए हैं कि सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उनका बेटा डेरा सच्चा सौदा में जरूर मिल जाएगा। हालात ऐसे हैं कि उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कर्फ्यू समाप्त होने के बाद आने को कहा गया है। एक मां को उम्मीद है कि उसका बेटा डेरा या उसके आसपास जरूर है।
कोटा राजस्थान आईएल टाउनशिप निवासी सैैयद मुमसाद असदक, उनकी पत्नी फरहत परवीन ने बताया कि उनके बडे़ बेटे सैयद शादाब असदक ने एमआईटी कोटा से इंजीनियरिंग की और उसके बाद आईएल कोटा में नौकरी करने लगा। सितंबर 2009 को उनका पुत्र सैयद शादाब असदक कंपनी के कार्य से कोटा से सिकंदराबाद गया था। सात सितंबर 2009 को वह कोटा आने के लिए सिकंदराबाद-जयपुर ट्रेन में सवार हुआ। वह एचवन-12 सीट पर यात्रा कर रहा था। इसके बाद वह गायब हो गया। इस बारे में ट्रेन के कंडेक्टर ने उन्हें फोन पर सूचित किया उनका बेटा बर्थ से गायब है और उसका सामान उनके पास है आकर ले जाए। कोटा जंक्शन से उन्हें सामान सौंप दिया गया।
उन्होंने बताया कि नौ सितंबर 2009 को बेटे की गुमशुदगी जीआरपी कोटा जंक्शन में लिखवा दी गई। तब से वे लोग अपने पुत्र की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य में भटक रहे हैं। सैैयद मुमसाद असदक ने बताया कि इस बीच वे सेवानिवृत्त हो गए और जो भी पैसा मिला वह भी बेटे की तलाश में खत्म हो गया। उन्हाेेंने बताया कि 25 अगस्त की सुबह वे लोग टीवी पर डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख से संबंधित समाचार देख रहे थे। डेरा प्रमुख के पंचकूला की ओर जाते समय रास्ते में कुछ लोग उनकी गाड़ी के आगे लेटकर उन्हें रोक रहे थे। रोकने वालों में उनका बेटा शादाब असदक भी था, जिसकी तलाश में वे सिरसा आए और पुलिस से मदद की गुहार की। थाना सदर सिरसा प्रभारी दिनेश कुमार ने कहा कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। जब उन्हें पता चला कि डेरा में सर्चअभियान शुरू होने वाला है तो वे पांच दिन पहले सिरसा पहुंचे और पुलिस से मदद की गुहार की।
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सर्च आपरेशन शुरू हुआ तो वे भी डेरा में जाना चाहते थे, ताकि अपने पुत्र को पहचान सके पर कर्फ्यू का हवाला देते हुए उन्हें साथ लेे जाने से इंकार कर दिया। वे इसी उम्मीद में सिरसा में ठहरे हुए हैं कि एक दिन तो खबर आएगी कि उनका बेटा डेरा से मिल गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
हैदराबाद से कोटा जाते समय ट्रेन में सवार एक युवक लापता हो गया। परिजन उसकी तलाश में पिछले पांच दिन से इस उम्मीद में सिरसा में डेरा डाले हुए हैं कि सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उनका बेटा डेरा सच्चा सौदा में जरूर मिल जाएगा। हालात ऐसे हैं कि उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कर्फ्यू समाप्त होने के बाद आने को कहा गया है। एक मां को उम्मीद है कि उसका बेटा डेरा या उसके आसपास जरूर है।
कोटा राजस्थान आईएल टाउनशिप निवासी सैैयद मुमसाद असदक, उनकी पत्नी फरहत परवीन ने बताया कि उनके बडे़ बेटे सैयद शादाब असदक ने एमआईटी कोटा से इंजीनियरिंग की और उसके बाद आईएल कोटा में नौकरी करने लगा। सितंबर 2009 को उनका पुत्र सैयद शादाब असदक कंपनी के कार्य से कोटा से सिकंदराबाद गया था। सात सितंबर 2009 को वह कोटा आने के लिए सिकंदराबाद-जयपुर ट्रेन में सवार हुआ। वह एचवन-12 सीट पर यात्रा कर रहा था। इसके बाद वह गायब हो गया। इस बारे में ट्रेन के कंडेक्टर ने उन्हें फोन पर सूचित किया उनका बेटा बर्थ से गायब है और उसका सामान उनके पास है आकर ले जाए। कोटा जंक्शन से उन्हें सामान सौंप दिया गया।
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उन्होंने बताया कि नौ सितंबर 2009 को बेटे की गुमशुदगी जीआरपी कोटा जंक्शन में लिखवा दी गई। तब से वे लोग अपने पुत्र की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य में भटक रहे हैं। सैैयद मुमसाद असदक ने बताया कि इस बीच वे सेवानिवृत्त हो गए और जो भी पैसा मिला वह भी बेटे की तलाश में खत्म हो गया। उन्हाेेंने बताया कि 25 अगस्त की सुबह वे लोग टीवी पर डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख से संबंधित समाचार देख रहे थे। डेरा प्रमुख के पंचकूला की ओर जाते समय रास्ते में कुछ लोग उनकी गाड़ी के आगे लेटकर उन्हें रोक रहे थे। रोकने वालों में उनका बेटा शादाब असदक भी था, जिसकी तलाश में वे सिरसा आए और पुलिस से मदद की गुहार की। थाना सदर सिरसा प्रभारी दिनेश कुमार ने कहा कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। जब उन्हें पता चला कि डेरा में सर्चअभियान शुरू होने वाला है तो वे पांच दिन पहले सिरसा पहुंचे और पुलिस से मदद की गुहार की।
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सर्च आपरेशन शुरू हुआ तो वे भी डेरा में जाना चाहते थे, ताकि अपने पुत्र को पहचान सके पर कर्फ्यू का हवाला देते हुए उन्हें साथ लेे जाने से इंकार कर दिया। वे इसी उम्मीद में सिरसा में ठहरे हुए हैं कि एक दिन तो खबर आएगी कि उनका बेटा डेरा से मिल गया है।