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गो तस्कर को अदालत ने सुनाई छह साल कैद
amarujala/Sirsa
Updated Fri, 24 Mar 2017 12:05 AM IST
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गो वंश की तस्करी करके उन्हेें मारने के लिए ले जाने वाले तस्कर अकरम खान को जिला एवं सत्र न्यायालय ने छह साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले के एक अन्य आरोपी मोहम्मद उमर ने जिला जेल में पिछले वर्ष अधिक मात्रा में नशीली दवाइयां खाकर आत्महत्या कर ली थी। खास बात यह है कि सिरसा जिले में ये पहला मामला है, जब गो हत्या रोकथाम अधिनियम के तहत तस्करों को सजा हुई है।
11 जनवरी 2016 को सदर डबवाली पुलिस टीम गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिस ने सामने से आ रहे एक ट्रक को रुकवाया। ट्रक में काफी संख्या में गो वंश लदा था। पुलिस ने ट्रक में सवार दो लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ में एक की पहचान उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद के शहर भोजपुर वार्ड नंबर 15 निवासी अकरम और दूसरे की पहचान मुरादाबाद निवासी मोहम्मद उमर के रूप में हुई। अकरम और मोहम्मद उमर ने बताया कि वे गो वंश को मुरादाबाद ले जा रहे थे।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ गो हत्या रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज करके उन्हें अदालत में पेश किया। अदालत ने अकरम और मोहम्मद उमर को जेल भेज दिया। कुछ दिनों बाद मोहम्मद उमर ने जेल में अधिक मात्रा में नशीली दवा खा ली। उसकी हालत बिगड़ने पर रात को उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मोहम्मद उमर की मौत हो गई। मोहम्मद उमर ने जेल में आत्महत्या इसलिए की, क्योंकि उसे जमानत नहीं मिल रही थी। उसकी जमानत के लिए परिवार में से किसी ने प्रयास नहीं किया था। मोहम्मद की मौत के बाद अकरम ही इस मामले में मुख्य अभियुक्त है। वीरवार को इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर ने आरोपी अकरम को दोषी करार देते हुए छह साल कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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11 जनवरी 2016 को सदर डबवाली पुलिस टीम गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिस ने सामने से आ रहे एक ट्रक को रुकवाया। ट्रक में काफी संख्या में गो वंश लदा था। पुलिस ने ट्रक में सवार दो लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ में एक की पहचान उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद के शहर भोजपुर वार्ड नंबर 15 निवासी अकरम और दूसरे की पहचान मुरादाबाद निवासी मोहम्मद उमर के रूप में हुई। अकरम और मोहम्मद उमर ने बताया कि वे गो वंश को मुरादाबाद ले जा रहे थे।
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पुलिस ने दोनों के खिलाफ गो हत्या रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज करके उन्हें अदालत में पेश किया। अदालत ने अकरम और मोहम्मद उमर को जेल भेज दिया। कुछ दिनों बाद मोहम्मद उमर ने जेल में अधिक मात्रा में नशीली दवा खा ली। उसकी हालत बिगड़ने पर रात को उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मोहम्मद उमर की मौत हो गई। मोहम्मद उमर ने जेल में आत्महत्या इसलिए की, क्योंकि उसे जमानत नहीं मिल रही थी। उसकी जमानत के लिए परिवार में से किसी ने प्रयास नहीं किया था। मोहम्मद की मौत के बाद अकरम ही इस मामले में मुख्य अभियुक्त है। वीरवार को इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर ने आरोपी अकरम को दोषी करार देते हुए छह साल कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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