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घुकांवाली से बनवाला के बीच टूटी मम्मड़ ब्रांच
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टूटे हिस्से को पाटती जेसीबी मशीन।
- फोटो : Sirsa
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ओढां। गांव घुक्कांवाली से बनवाला के मध्य मम्मड़ ब्रांच नहर टूट गई। जिसके चलते करीब 100 एकड़ में लगी फसलों में जलभराव हो गया। वहीं पानी घुसने के चलत बोरवेलों को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने विभाग के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए कहा कि नहर के किनारे जर्जर अवस्था में हैं, लेकिन विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी का नतीजा है कि किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी मुताबिक गांव घुंकावाली व बनवाला के मध्य मम्मड़ ब्रांच नहर में मंगलवार देर सांय एक हिस्से में दरार आ गई। देखते ही देखते ये दरार बड़े कटाव का रूप धारण कर गई। इसके अलावा नहर का एक किनारा करीब 200 फीट आगे तक क्षतिग्रस्त हो गया। किसानों ने इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को दी, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके चलते किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल में पानी आ गया। नहर टूटने से साथ लगते किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। किसान हरबंस सिंह ने बताया कि उसकी करीब ढाई एकड़ ग्वार व नरमे की फसल में मिट्टी भरने से फसल नष्ट हो गई। किसान बिंद्र सिंह की करीब पौने 4 एकड़ बागवानी व 2 मोटरों में पानी घुस गया। इसके अलावा किसान मक्खन सिंह की 3 मोटरों को नुकसान पहुंचा है। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही की वजह से उन्हें नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा नहरों की सफाई तो करवा दी जाती है, लेकिन लंबे समय से जर्जर हो चुके किनारों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने वन विभाग के खिलाफ भी रोष जताते हुए कहा कि उन्होंने नहर के किनारों पर जो पेड़ लगाए थे वो भी नहर टूटने का कारण बन रहे हैं। किसानों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व बारिश होने के कारण फसलों को पानी की जरूरत न के बराबर थी। नहर के टूट जाने से उनकी सैकड़ों एकड़ फसल में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। किसानों ने बताया कि अगर विभागीय अधिकारी तत्परता दिखाते तो समय रहते टूटे हिस्से पर काबू पाया जा सकता था। विभाग द्वारा करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी टूटे हिस्से को सही नहीं किया जा सका। मौके पर मौजूद जेई महावीर ने बताया कि नहर को पाटने के लिए 2 जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व मजदूर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नहर टूटने का कारण चूहे के बिल हैं। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि जिस जगह नहर टूटी है वहां के आसपास के किनारों की मरम्मत का प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। नहरी बंदी के दौरान ये कार्य किया जाएगा।
किसानों ने बताया कि नहर में बीते दिन ही पानी आया था। अगर विभागीय अधिकारी यहां का निरीक्षण करते तो शायद ये नहर न टूटती। बताया जा रहा है कि नहर टूटने के उपरांत किसानों ने अधिकारियों को सूचना दी थी मगर अधिकारियों ने मौके पर न पहुंचकर बेलदारों को भेज दिया। जिनके पास कोई उपाय न होने के कारण रात भर पानी खेतों में बहता रहा। किसानों का कहना है उनके नुकसान की भरपाई करवाई जाए। वहीं इस बारे विभाग के एसडीओ लखविंद्र सिंह ने बार-बार संपर्क करने के बाद भी फोन नहीं उठाया।
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नहर टूटने की सूचना के बाद हम मौके पर पहुंच गए थे। करीब 60 फीट में कटाव हुआ है। इसके अलावा करीब 200 फीट का किनारा क्षतिग्रस्त हुआ है। चूहों के बिल के कारण नहर टूटी है। टूटे हिस्से को पाटने के लिए जेसीबी, ट्रैक्टर व मजदूर लगाए गए हैं। इस हिस्से की मरम्मत के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है।
-महावीर, जेई (नहरी एवं सिंचाई विभाग)
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उन्होंने वन विभाग के खिलाफ भी रोष जताते हुए कहा कि उन्होंने नहर के किनारों पर जो पेड़ लगाए थे वो भी नहर टूटने का कारण बन रहे हैं। किसानों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व बारिश होने के कारण फसलों को पानी की जरूरत न के बराबर थी। नहर के टूट जाने से उनकी सैकड़ों एकड़ फसल में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। किसानों ने बताया कि अगर विभागीय अधिकारी तत्परता दिखाते तो समय रहते टूटे हिस्से पर काबू पाया जा सकता था। विभाग द्वारा करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी टूटे हिस्से को सही नहीं किया जा सका। मौके पर मौजूद जेई महावीर ने बताया कि नहर को पाटने के लिए 2 जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व मजदूर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नहर टूटने का कारण चूहे के बिल हैं। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि जिस जगह नहर टूटी है वहां के आसपास के किनारों की मरम्मत का प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। नहरी बंदी के दौरान ये कार्य किया जाएगा।
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किसानों ने बताया कि नहर में बीते दिन ही पानी आया था। अगर विभागीय अधिकारी यहां का निरीक्षण करते तो शायद ये नहर न टूटती। बताया जा रहा है कि नहर टूटने के उपरांत किसानों ने अधिकारियों को सूचना दी थी मगर अधिकारियों ने मौके पर न पहुंचकर बेलदारों को भेज दिया। जिनके पास कोई उपाय न होने के कारण रात भर पानी खेतों में बहता रहा। किसानों का कहना है उनके नुकसान की भरपाई करवाई जाए। वहीं इस बारे विभाग के एसडीओ लखविंद्र सिंह ने बार-बार संपर्क करने के बाद भी फोन नहीं उठाया।
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नहर टूटने की सूचना के बाद हम मौके पर पहुंच गए थे। करीब 60 फीट में कटाव हुआ है। इसके अलावा करीब 200 फीट का किनारा क्षतिग्रस्त हुआ है। चूहों के बिल के कारण नहर टूटी है। टूटे हिस्से को पाटने के लिए जेसीबी, ट्रैक्टर व मजदूर लगाए गए हैं। इस हिस्से की मरम्मत के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है।
-महावीर, जेई (नहरी एवं सिंचाई विभाग)