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इंडिया की वनडे क्रिकेट टीम में खेलेगा सिरसा का बरिंद्र
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2015 12:05 AM IST
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ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए शनिवार को भारतीय क्रिकेट टीम का एलान हो गया। पाकिस्तानी मीडियम पेसर वसीम अकरम की तरह गेंदबाजी करने वाले डबवाली के गांव पन्नीवाला मोरिकां के बरिंद्र सरां का सेलेक्शन वन डे टीम में हुआ है।
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पंजाब की ओर से खेलने वाले बरिंद्र के चयन की जानकारी होने के बाद गांव में होली, दीपावली एक साथ मन रही है। किसान बलवीर सिंह बेटे बरिंद्र की उपलब्धि से गदगद हैं।
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आईपीएल सीजन 8 में हुआ था चयन
फरवरी 2015 में बरिंद्र सरां ट्रायल देने के लिए मुंबई गया था। सरां की बॉलिंग ने राजस्थान रॉयल के मेंटर राहुल द्रविड़ को काफी आकर्षित किया।
द्रविड़ की वजह से ही राजस्थान रॉयल ने इस खिलाड़ी को 10 लाख रुपये में बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया था।
पंजाब की ओर से खेलने वाले 23 साल के बरिंद्र सरां ने 11 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं, जिनमें 32 विकेट अपने नाम किए।
पिछले दिनों विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने छह मैचों में 13 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था। कॅरियर में 27 रन देकर चार विकेट उसका बेहतरीन प्रदर्शन है।
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वर्ष 2011 में रणजी खेलने के बाद बरिंद्र को चोट ने घेरे रखा। दो बार फ्रेक्चर होने के कारण मैदान से दूरी बनाए रखी। एक बार हादसे का शिकार हो गया।
पंजाब के पूर्व खिलाड़ी ने की मदद
पंजाब के पूर्व रणजी खिलाड़ी तथा पेसर अमित उनियाल ने बरिंद्र सरां की जिंदगी में नया सवेरा लाने में मदद की। उन्होंने अपनी क्रिकेट अकादमी में चोट से उभरे इस खिलाड़ी को फिटनेस मंत्र दिया, वहीं गेंदबाजी में कमियों को दूर किया।
प्राइमरी स्कूल के मैदान से आईपीएल तक पहुंचा बरिंद्र
ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में सिलेक्ट हुए मीडियम पेसर बरिंद्र सिंह सरां का बचपन खेत तथा पशुओं के बीच बीता है।
गांव में खेलने के लिए मैदान या फिर पर्याप्त खेल सुविधाएं न होने के बावजूद यह खिलाड़ी विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए इंडियन क्रिकेट टीम तक जा पहुंचा है।
पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम की गेंदबाजी के मुरीद हैं। वे उनकी तरह की गेंदबाजी करना चाहते हैं। बेटे की सिलेक्शन से मां जसप्रीत कौर फूली नहीं समा रही। इस संवाददाता से बातचीत करते हुए उन्होंने बरिंद्र के बचपन से जुड़ी यादें ताजा की।
घर के पिछले दरवाजे से क्रिकेट खेलने निकल जाता
गांव पन्नीवाला मोरिकां हरियाणा के आखिरी छोर पर बसा हुआ उपमंडल डबवाली का गांव है। जोकि पूरी तरह से पंजाब के जिला बठिंडा से सटा हुआ है।
बरिंद्र सरां ने साथ लगते गांव फल्लड़ स्थित एक निजी स्कूल से दसवीं पास की। ग्यारहवीं तथा बारहवीं मंडी किलियांवाली के एक निजी विद्यालय में की।
जसप्रीत कौर ने बताया कि उसके बेटे को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौंक था। स्कूल में छुट्टी के बाद घर आते ही स्कूल बैग रखकर घर के पिछले दरवाजे से क्रिकेट खेलने निकल जाता।
वह उसे खाना खाने के लिए आवाज लगाती रहती, लेकिन वह खेतों से होता हुआ भाग जाता। एक पुलिस वाले के कहने पर वह बारहवीं करने के बाद बॉक्सिंग के गुर सीखने के लिये भिवानी चला गया।
डेढ़ साल तक बॉक्सिंग की। अपने क्रिकेट प्रेम को दोस्तों से सांझा करने के बाद वह ट्रायल देने के लिये हिसार पहुंच गया। हिसार में कोच ने उसकी गेंदबाजी को बेहतरीन करार देते हुए सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में प्रशिक्षण लेने के लिये भेज दिया।
सिरसा में करीब छह माह बिताने के बाद वह प्रिंटी जिंटा की पंजाब सुपर किंग्स में शामिल होने के लिए ट्रायल देने के लिये मोहाली चला गया।
1800 युवाओं में से उसे 40वां नंबर मिला। कुछ समय चंडीगढ़ बिताने के बाद वह मोहाली शिफ्ट हो गया। वर्ष 2011 में पंजाब रणजी टीम में शामिल हो गया।
जब भी घर आता शीशे, बर्तन तोड़ देता
बरिंद्र की मां जसप्रीत कौर ने बताया कि उसके बेटे पर क्रिकेट का जनून इस कदर सवार है कि वह अकादमी से जब भी घर आता तो पूरा दिन गेंदबाजी करता रहता।
गेंदबाजी के चक्कर में घर के शीशे तथा बर्तन तोड़ देता। घर पर उसका ऐसा कोई दौरा उसे याद नहीं, जब उसने कोई सामान न तोड़ा हो।
इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल होने के बाद करूंगा शादी
इस क्रिकेटर के पिता बलवीर सिंह तथा मां जसप्रीत कौर रिश्तेदारों के दबाव के कारण उसकी शादी करना चाहते थे। लेकिन वह हर बार शादी की बात को टाल देता।
जसप्रीत कौर के अनुसार मोहाली में अकेले रहते हुए बरिंद्र की चिंता उसे सताती थी। वह उसे शादी करने के लिए कहती है, लेकिन वह कहता है कि इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल होने के बाद शादी करूंगा।
आईपीएल में सिलेक्शन होने के बाद उनका हौंसला बढ़ गया था। उस समय लगने लगा था कि बेटा जरूर देश की टीम का हिस्सा बनेगा।
गुड़ की चूरी खाने का शौकीन है क्रिकेटर
गेंदबाज बरिंद्र गुड़ की बनी चूरी तथा दूध में बनी सेवियां खाने का शौकीन है। जसप्रीत कौर ने बताया कि वह जब भी गांव में आता तो दोनों चीजें बड़े चाव से खाता है। जब भी उससे बात होती है तो वह कहता है कि चंडीगढ़ या मोहाली में तुहाड़े हथ दी बणी चूरी बहोत याद आऊंदी आ।
...जब बरिंद्र ने गोबर के उप्पलों से सुखाई पिच
बचपन से ही बरिंद्र में प्रतिभा थी। क्रिकेट के प्रति उसकी दीवानगी देखकर पंचायत ने वर्ष 2005 से क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया था। टूर्नामेंट के फाइनल मैच से ठीक पहले कई बार बारिश हुई।
पिच को बचाने के लिये उसके भतीजे ने अपने साथी खिलाडिय़ों के साथ मिलकर पिच को गोबर से सूखाकर खेलने लायक बनाया था।
बरिंद्र की गेंदबाजी की बदौलत कभी भी पन्नीवाला मोरिकां की टीम फाइनल मैच में नहीं हारी थी। उस समय से शुरू हुये क्रिकेट टूर्नामेंट प्रति वर्ष होते हैं। लेकिन कमी है, सिर्फ स्टेडियम की।