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अर्जुन अवार्डी संजय पहलवान ने कांग्रेस छोड़ी
खरखौदा (सोनीपत)/ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2013 11:36 PM IST
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कांग्रेस में राज्यस्तरीय नेताओं द्वारा भेदभाव और अनदेखी के आरोप लगाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पार्टी में अनदेखी की वजह से हिंद केसरी और अर्जुन अवार्डी संजय पहलवान ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश खेल प्रकोष्ठ के चेयरमैन पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने वर्ष 1998 में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। शुक्रवार को खरखौदा में प्रेसवार्ता में घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र चंडीगढ़ निदेशालय और कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है।
उन्होंने कहा कि हाईकमान द्वारा उनके साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न कांग्रेस नेताओं की अनदेखी की जा रही है। एक खिलाड़ी होने के नाते क्षेत्र के खिलाड़ियों को उनसे काफी उम्मीदें थीं, किंतु कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ के चेयरमैन होने के बावजूद वे खिलाड़ियों के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। अब पदमुक्त होकर खिलाड़ियों के हक की आवाज उठाने के लिए आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के संघर्ष के दिनों में उन्होंने पूरा साथ दिया, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
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पार्टी में अनदेखी की वजह से हिंद केसरी और अर्जुन अवार्डी संजय पहलवान ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश खेल प्रकोष्ठ के चेयरमैन पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने वर्ष 1998 में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। शुक्रवार को खरखौदा में प्रेसवार्ता में घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र चंडीगढ़ निदेशालय और कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है।
उन्होंने कहा कि हाईकमान द्वारा उनके साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न कांग्रेस नेताओं की अनदेखी की जा रही है। एक खिलाड़ी होने के नाते क्षेत्र के खिलाड़ियों को उनसे काफी उम्मीदें थीं, किंतु कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ के चेयरमैन होने के बावजूद वे खिलाड़ियों के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। अब पदमुक्त होकर खिलाड़ियों के हक की आवाज उठाने के लिए आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के संघर्ष के दिनों में उन्होंने पूरा साथ दिया, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
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