राज्यसभा चुनाव से पहले गरमाई हरियाणा की राजनीति
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कांग्रेस ने हरियाणा की अपने हिस्से की राज्यसभा की इकलौती सीट से केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री कुमारी सैलजा को उम्मीदवार बनाया है।
उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सैलजा ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। 51 वर्षीय कुमारी सैलजा ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के सचिव और रिटर्निंग अफसर सुमित कुमार के सामने नामांकन पत्र भरा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा, शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, परिवहन मंत्री आफताब अहमद, सीपीएस रामकिशन गुर्जर, विधायक बीबी बत्तरा, डीके बंसल, आनंद कौशिक, जयतीर्थ दहिया और जगबीर मलिक ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा।
नामांकन पत्र भरने के समय प्रदेश कांग्रेस प्रभारी डॉ शकील अहमद, प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद मुलाना, राज्यसभा सदस्य ईश्वर सिंह, विधायक नरेश सेलवाल, राजपाल भूखड़ी भी उपस्थित थे।
सैलजा, कश्यप का निर्विरोध चुना जाना तय
हरियाणा से राज्यसभा के लिए दो सीटों का चुनाव होना है। कांग्रेस के पास 46 विधायक हैं। उन्हें सात निर्दलीय और एक बीएसपी विधायक का समर्थन है। इनेलो और अकाली दल के 31 विधायक हैं।
कांग्रेस की तरफ से केवल कुमारी सैलजा ने नामांकन पत्र भरा है। इनेलो के कवरिंग उम्मीदवार बलदेव वाल्मीकि नामांकन पत्र वापस ले लेंगे तो इनेलो के राम कुमार कश्यप उम्मीदवार रह जाएंगे।
रिटर्निंग अफसर सुमित कुमार ने बताया कि 29 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 31 जनवरी को शाम तीन बजे नामांकन पत्र वापसी के बाद अगर दो उम्मीदवार रहे तो उसी दिन दोनों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा।
कांग्रेस नेतृत्व ने दिया हुड्डा को झटका
कांग्रेस ने हरियाणा की राज्यसभा की सीट से कुमारी सैलजा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि हरियाणा की बदली राजनीतिक परिस्थिति में उन्हें राज्य कांग्रेस संगठन की भी कमान दी जा सकती है।
उधर सैलजा को उम्मीदवार बना कर पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे को बीते करीब नौ साल में पहली बार करारा झटका दिया है। मुख्यमंत्री खुद रामप्रकाश या राज्य पीसीसी के अध्यक्ष फूलचंद मुलाना को राज्यसभा प्रत्याशी बनाने के लिए सोमवार की शाम तक प्रयासरत थे।
हुड्डा की कोशिश सैलजा-चौधरी बीरेंद्र सिंह खेमे के ईश्वर सिंह की राह भी रोकने की थी। मगर आलाकमान ने नामांकन की अंतिम तिथि से चंद घंटे पहले सैलजा के नाम पर मुहर लगा कर हुड्डा खेमे को निराश कर दिया।
क्या ये है संतुलन बनाने की कवायद?
आलाकमान के इस कदम को राज्य की राजनीति में हुड्डा और सैलजा खेमे में संतुलन बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। इस सीट को राज्य के दोनों गुटों ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था।
मुख्यमंत्री ने सोमवार की शाम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर अंतिम कोशिश भी की। उधर ईश्वर सिंह को दूसरा कार्यकाल दिए जाने का दबाव डाल रही सैलजा ने रणनीति में बदलाव करते हुए खुद अपना नाम आगे बढ़ा दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष की करीबी होने के कारण यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री का पद हासिल करने वाली सैलजा के इस अनुरोध को पार्टी नेतृत्व टाल नहीं पाया।
उधर, हुड्डा समर्थकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में अंबाला सीट को अपने लिए सुरक्षित न पाने के बाद सैलजा ने पहले तो अपनी सीट बदलने की कोशिश की। मगर इसमें कामयाब न होने के बाद राज्यसभा के लिए दावेदारी पेश कर दी।
बहरहाल, चूंकि बीते नौ साल में पहली बार सैलजा खेमे ने मुख्यमंत्री खेमे को शिकस्त दी है, इसलिए चुनाव से ठीक पहले इस खेमे में उत्साह है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अब बदली राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी नेतृत्व सैलजा को पीसीसी अध्यक्ष बना सकता है।