Haryana: यशपाल मलिक बोले- लठों से नहीं, बातचीत से मिलेगा आरक्षण, 2016 की हिंसा से कमजोर हुआ आंदोलन
जसिया में छोटूराम जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करने से पहले जाट नेता मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले खुलासा करूंगा कि जाट कौम के लिए किसने क्या सहयोग दिया। कहा कि व्यक्तिगत एजेंडे के चलते मेरा जसिया में विरोध किया गया, इससे आहत हूं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
व्यक्तिगत एजेंडे के चलते मेरा जसिया में विरोध किया गया। जाट समाज तय करे कि छोटूराम धाम की जड़े पूरे देश में फैलानी हैं या जसिया व रोहतक जिले में ही समेटना है। मलिक शनिवार को जसिया में छोटूराम जयंती पर हुए जाट समाज के कार्यक्रम को संबोधित करने से पहले मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति व जाट सेवा संघ की तरफ से साल 2023 के फरवरी माह के तीसरे रविवार को प्रदेश स्तरीय बलिदान दिवस मनाया जाएगा। यह रोहतक, जींद या तीसरी जगह होगा, यह तय कार्यक्रम से 15 दिन पहले किया जाएगा।
वहीं, कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, इनेलो नेता अभय चौटाला, पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह, जजपा नेता अजय चौटाला व राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा सहित अन्य दिग्गज जाट नेता नहीं आए। दिल्ली कैंट से आप विधायक वीरेंद्र कादयान, जम्मू-कश्मीर के पूर्व विधायक रहीम डार, एनसीपी नेता सोनिया दलाल सहित जाट आरक्षण संघर्ष समिति व जाट सेवा संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
‘छोटूराम धाम को जसिया या रोहतक में समेटना है या नहीं, जाट समाज के लोग तय करें’
मलिक ने कहा कि 2017 में शांतिपूर्ण आंदोलन चला। सरकार से बातचीत हुई, जिसके बाद समाज के शहीदों को सम्मान मिला और आश्रितों को नौकरी दी गई। साथ ही 2 हजार से ज्यादा केस वापस किए गए, जो 2016 में हुई हिंसा के चलते दर्ज हुए थे। उन्होंने कहा कि हाथी तो निकल गया, पूछ रह गई। उस पूछ को लेकर मुझे गालियां दी जा रही हैं। वे सरकार, नेताओं व गुंडों से नहीं लड़ते, बल्कि जाट समाज के गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा। उन्होंने जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जाट सेवा संघ के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया है, समाज नहीं छोड़ा है। 10 दिन पहले जाट समाज के लोग गृहमंत्री अनिल विज से मिले थे। विज ने आश्वासन दिया हुआ है कि 19 दिसंबर को हाई कोर्ट में सरकार की तरफ से याचिका दायर कर केस वापसी पर लगी रोक हटवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेरा बेवजह विरोध किया गया, उनका व्यक्तिगत एजेंडा है। सर छोटूराम धाम को जसिया या जिले में समेटना है या जाट समाज के लोग तय करें। छोटूराम के अनुयायी तो जम्म-कश्मीर, यूपी, दिल्ली व पंजाब तक आए हुए हैं। जल्द वे राजनीति दलों के नेताओं की भूमिका का खुलासा करेंगे।
दिग्गज जाट नेता नहीं पहुंचे, ना ही उम्मीद के मुताबिक भीड़ उमड़ी
2006 से प्रदेश में जाट समाज को आरक्षण दिलवाने के लिए आंदोलन चल रहा था। 2014 में आरक्षण मिल भी गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण देने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। केंद्र व राज्य में 2014 में कांग्रेस की जगह भाजपा सत्ता में आई। प्रदेश के अंदर 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन हिंसक हो गया। खासकर रोहतक, सोनीपत व झज्जर जिले में ज्यादा हिंसा हुई।
हालांकि जींद, कैथल, भिवानी व हिसार में भी घटनाएं हुईं। उसके बाद यूपी से आए जाट नेता यशपाल मलिक ने जाट आरक्षण संघर्ष समिति का गठन किया। साथ ही छोटूराम धाम, जसिया का गठन किया। संघर्ष समिति व छोटूराम धाम की तरफ से 10 दिसंबर को छोटूराम जयंती मनाने का लिर्णय लिया था।
युवाओं को नशा से दूर रहने की सलाह देने के बाद योग का प्रदर्शन करते मेजर जनरल रंजीत सिंह । अमर उजाला
दो दिन पहले जसिया के ग्रामीणों ने यशपाल मलिक को चेतावनी दी कि वे जसिया न आएं। हालांकि शुक्रवार को दोनों पक्षों में सहमति बन गई और यशपाल मलिक का विरोध न करने का निर्णय लिया था। शनिवार को हुए कार्यक्रम में दिग्गज जाट नेता नहीं पहुंचे। ना ही उम्मीद के मुताबिक भीड़ उमड़ी।
जसिया में भावुक हुए यशपाल मलिक, बोले -साजिश के तहत मुझे गालियां दी जा रही, समय आने पर दूंगा जवाब
जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर सक्रिय रहे यूपी के जाट नेता यशपाल मलिक शनिवार को जसिया में भावुक हो गए। मीडिया के सामने खुलकर अपने दिल का दर्द यूं बयां किया।
सवाल : आपका जसिया में ही विरोध किया गया। ऐसा क्यों।
जवाब : इसके पीछे राजनीतिक साजिश है। मंच पर ही मेरे खिलाफ खींचतान होती है। समय आने पर जवाब दूंगा।
सवाल : 2017 से 2022 तक आपको जाट आरक्षण आंदोलन में किस नेता का साथ मिला।
जवाब : किसी नेता ने खुलकर साथ दिया तो कोई टांग खींचता रहा। लोकसभा व विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसका खुलासा करूंगा। फिर जाट समाज खुद निर्णय करे।
सवाल : क्या आप अब जसिया नहीं आएंगे।
जवाब : मैंने राष्ट्रीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जाट सेवा संघ के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया है। जाट समाज से आम आंदोलनकारी की तरह ही जुड़ा रहूंगा। समाज जब बुलाएंगा आऊंगा।
सवाल : जाट आरक्षण आंदोलन क्यों कामयाब नहीं हो सका।
जवाब : 2006 से आंदोलन चल रहा था। 2014 में आरक्षण भी मिल गया था। फिर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ गया। आंदोलन बातचीत से चलता है। लठ से नहीं। 2016 में रोहतक, सोनीपत व झज्जर में जमकर हिंसा हुई। इसलिए आंदोलन कमजोर हो गया।
सवाल : आरोप है जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज सभी केस वापस नहीं हुए। युवाओं की सहायता नहीं की जा रही है।
जवाब : ज्यादातर केसों को वापस लेने की सहमति बन गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्टे लगा दी। अब भी प्रयास जारी हैं।
सवाल : जाट समाज को आरक्षण कैसे मिलेगा।
जवाब : अपना हक जाट समाज बातचीत के माध्यम से ही ले सकता है। डंडे के जोर पर कभी हक नहीं मिलता। 2016 की हिंसा के बाद केस वापस करवाना पहला व आरक्षण हासिल करने का मुद्दा पीछे चला गया।
सवाल : जसिया में शनिवार हुए सम्मेलन में न तो कोई बड़ा जाट नेता आया और न ही भीड़ जुट सकी।
जवाब : नेताओं का आना न आना उनकी मर्जी पर निर्भर है। इतना जरूर कहूंगा जो विरोध की बात सामने आई, उसका असर जरूर पड़ा।
पत्रिका का विमोचन करते दिल्ली के विधायक विरेन्द्र कादायान। साथ में यशपाल मलिक। अमर उजाला
ये पहुंचे छोटूराम जयंती पर जसिया
जम्मू-कश्मीर से एनसीपी के पूर्व विधायक रहीम डार, आप के दिल्ली कैंट से विधायक वीरेंद्र कादियान, सिरसा व जींद विवि के पूर्व वीसी मेजर रणजीत सिंह, गन्नौर से कर्मबीर राठी, गोहाना से बलजीत मलिक, पानीपत से ईश्वर जागलान, हिसार के पेटवाड़ से एनसीपी नेता सोनिया दूहन, यूपी के आगरा से प्रोफेसर दुर्ग पाल, मथुरा से वीरपाल व भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी सहित अन्य लोग भी पहुंचे। इसके अलावा सोनीपत से प्रताप दहिया, गोहाना से आजाद लठवाल, हिसार से गंगाराम श्योराण, मोहाली से वेदपाल, रणधीर सिंह एडवोकेट, शाहबाद से कुलदीप सिंह ढींढसा, कुरुक्षेत्र बलदेव राठी भी पहुंचे। इसके अलावा सुदीप कलकल, मनोज दूहन, सोमबीर जसिया, धर्मेंद्र हुड्डा व गौरव बुधवार भी छोटूराम जयंती में पहुंचे।