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Rohtak: मूक-बधिर को सांकेतिक भाषा सिखाएगी MDU, शुरू किए गए हैं दो कोर्स
Fri, 08 Jul 2022 12:35 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 08 Jul 2022 12:35 AM IST
सार
नए शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के तहत सांकेतिक भाषा के दो कोर्स शुरू किए गए हैं। डीन प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सांकेतिक भाषा का पठन-पाठन समय की जरूरत है।
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एमडीयू
- फोटो : file photo
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विस्तार
मूक-बधिर व ऐसे लोगों के लिए कुछ करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। ये अब एक दूसरे की बात को न केवल समझ सकेंगे, बल्कि इशारों में अपनी बात कह भी सकेंगे। इसके लिए रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2022-2023 में सेंटर फॉर डिसेबिलिटि स्टडीज (सीडीएस) के तत्वावधान में दो डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं।
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इन कोर्सों में दक्ष होने पर इनके लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। एमडीयू के सेंटर फॉर डिसेबिलिटि स्टडीज निदेशक प्रो. राधेश्याम व फैकल्टी ऑफ इंटर डिसीप्लीनरी स्टडीज के डीन प्रो. सुरेंद्र कुमार ने गुरुवार को इन पाठ्यक्रमों की जानकारी मीडिया को दी।
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प्रो. राधेश्याम ने कहा कि भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा इन इंडियन लैंग्वेज इंटरप्रेटिंग (डीआईएसएलआई) व डिप्लोमा इन टीचिंग इंडियन साइन लैंग्वेज (डीटीआईएसएलआई) प्रारंभ किए जा रहे हैं। इन दोनों पाठ्यक्रम में 30-30 सीटें होंगी।
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प्रवेश आरसीआई की ओर से आयोजित ऑल इंडिया ऑनलाइन एप्टीट्यूट टेस्ट के जरिए होगा। प्रवेश प्रक्रिया 22 जून को प्रारंभ हो चुकी है। अंतिम तिथि 21 जुलाई है। प्रवेश के लिए आरसीआई की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा। कोर्स के लिए 10 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर शुल्क रखा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय भारतीय सांकेतिक भाषा से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारंभ करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। एमडीयू का हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्संस विद स्पीच एंड हियरिंग इंपेयरमेंट के साथ एमओयू है। इससे इन पाठ्यक्रमों के संचालन में काफी मिलेगी।
डीन प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सांकेतिक भाषा का पठन-पाठन समय की जरूरत है। इससे न केवल मूक-बधिर विद्यार्थी लाभान्वित होंगे, बल्कि इससे नई शिक्षा नीति एनआईपी 2020 के समावेशी शिक्षा के संकल्प को पूरा करने में भी आसानी होगी। इन पाठ्यक्रमों के जरिए समाज की मुख्यधारा से मूक-बधिर विद्यार्थियों को जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्संस विद स्पीच एंड हियरिंग इंपेयरमेंट की परियोजना अधिकारी पल्लवी ने मूक बधिर व्यक्तिओं की शैक्षणिक जरूरतों के लिए इन दोनों पाठ्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय सांकेतिक भाषा को प्रोत्साहन दे रही है। कार्यक्रम का संचालन व समन्वयन निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने किया। समन्वयन सहयोग जनसंपर्क अधिकारी पंकज नैन ने किया। सांकेतिक भाषा शिक्षक-द्वय श्रेया व इमरान ने सांकेतिक भाषा के प्रयोग की जानकारी दी।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा ने कहा कि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह व हरियाणा वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर के विशेष प्रयासों से एमडीयू में सेंटर फॉर डिसेबिलिटि स्टडीज की स्थापना हुई है। एनईपी 2020 के समावेशी शिक्षा की लक्ष्यपूर्ति में यह सेंटर अहम भूमिका निभाएगा।