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बर्ड फ्लू पर हरियाणा में अलर्ट, तिलियार में पक्षियों की जांच
विनीत तोमर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2016 02:13 AM IST
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प्रवासी पक्षियों वाले स्थानों और चिड़ियाघरों को लेकर अलर्ट जारी
- फोटो : amar ujala
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दिल्ली में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद हरियाणा भी अलर्ट हो गया है। सुरक्षा के मद्देनजर तिलियार चिड़ियाघर के सभी पक्षियों की तत्काल मेडिकल जांच कराई गई। शुरुआती जांच में बर्ड फ्लू का संकेत नहीं मिला है। फिर भी तिलियार, पिपली एवं भिवानी स्थित प्रदेश के तीनों चिड़ियाघरों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह पोल्ट्री फार्म वालों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है।
दो साल बाद देश में बर्ड फ्लू ने फिर दस्तक दी है। प्रवासी पक्षियों से फैलने वाला एवियन इनफ्लूएंजा नाम का यह विषाणु इससे पहले वर्ष 2014 में आया था। उस समय चंडीगढ़ की सुखना लेख में पहला केस सामने आया था। इसके बाद हरियाणा समेत आसपास के प्रदेशों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया था। दो साल बाद अब दिल्ली में बर्ड फ्लू ने दस्तक दी है। इसके बाद हरियाणा में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दरअसल, प्रवासी पक्षियों की वजह से बर्ड फ्लू के विषाणु फैलते हैं। इसी वजह से चिड़ियाघर व जहां प्रवासी पक्षियों का आवागमन रहता है उन स्थानों पर विशेष सुरक्षा बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
यह है बर्ड फ्लू
हिसार स्थित लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वेटरनरी पब्लिक हेल्थ के एचओडी डॉ. एनके महाजन के अनुसार, बर्ड फ्लू को एवियन इनफ्लूएंजा विषाणु भी कहा जाता है। यह विषाणु एच-1 और एच-2 आदि कई प्रकार का होता है, लेकिन पक्षियों में सबसे अधिक एच-597 नामक विषाणु पाया जाता है। इस विषाणु से संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने या हवा के माध्यम से व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षी या व्यक्ति की आंखें सूज जाती हैं और पानी आने लगता है। उपचार नहीं मिलने पर 24 से 72 घंटे में मौत भी हो सकती है।
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होता है एक्शन प्लान लागू
यदि किसी स्थान पर बर्ड फ्लू का केस सामने आता है तो वहां सरकार की तरफ से एक्शन प्लान लागू किया जाता है। इसके तहत निर्धारित किया जाता है कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में सभी पक्षियों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। एक से दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले पक्षियों की नियमित जांच की जाए।
देश में जांच के लिए केवल एक लैब
बर्ड फ्लू की फाइनल जांच के लिए देश भर में केवल एक लेबोरेट्री है, जो भोपाल में है। प्रदेश में इसकी जांच की सुविधा नहीं है। यदि किसी जगह बर्ड फ्लू की आशंका होती है तो स्थानीय टीम पहले उसे नार्थ जोन की जालंधर रीजनल डिजीज डायग्नोस्टिक लैब भेजती है। वहां पर सिर्फ बर्ड फ्लू के बैक्टीरिया की जांच होती है। बर्ड फ्लू के एच-597 की जांच केवल भोपाल लेबोरेट्री में होती है। हालांकि, इसकी शुरुआती जांच हिसार स्थित लुवास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी करते हैं।
मुर्गी फार्म पर भी खतरा
प्रदेश में काफी संख्या में लोगों ने मुर्गी फार्म खोल रखे हैं। इनकी सबसे अधिक संख्या हिसार और उसके आसपास वाले जिलों में है। मुर्गी फार्म संचालकों को सचेत रहना होगा। फार्म में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
घबराने की जरूरत नहीं, बरतें सावधानियां
बर्ड फ्लू प्रवासी पक्षियों से फैलता है। फिलहाल, ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से सावधानियां बरतनी चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और नियमित तौर पर पक्षियों के बीच दवाइयों का छिड़काव करते रहें, जिससे विषाणु पक्षियों में न फैलें। पक्षी की हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सक से जांच कराएं।
- डॉ. एनके महाजन, एचओडी वेटनरी पब्लिक हेल्थ लुवास
चिड़ियाघर के सभी पक्षियों की मेडिकल जांच कराई गई है, जिसमें सभी स्वस्थ पाए गए हैं। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से स्टाफ को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामले में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
- पवन ग्रोवर, डिवीजन वर्ल्ड लाइफ ऑफिसर तिलियार
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दो साल बाद देश में बर्ड फ्लू ने फिर दस्तक दी है। प्रवासी पक्षियों से फैलने वाला एवियन इनफ्लूएंजा नाम का यह विषाणु इससे पहले वर्ष 2014 में आया था। उस समय चंडीगढ़ की सुखना लेख में पहला केस सामने आया था। इसके बाद हरियाणा समेत आसपास के प्रदेशों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया था। दो साल बाद अब दिल्ली में बर्ड फ्लू ने दस्तक दी है। इसके बाद हरियाणा में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दरअसल, प्रवासी पक्षियों की वजह से बर्ड फ्लू के विषाणु फैलते हैं। इसी वजह से चिड़ियाघर व जहां प्रवासी पक्षियों का आवागमन रहता है उन स्थानों पर विशेष सुरक्षा बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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यह है बर्ड फ्लू
हिसार स्थित लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वेटरनरी पब्लिक हेल्थ के एचओडी डॉ. एनके महाजन के अनुसार, बर्ड फ्लू को एवियन इनफ्लूएंजा विषाणु भी कहा जाता है। यह विषाणु एच-1 और एच-2 आदि कई प्रकार का होता है, लेकिन पक्षियों में सबसे अधिक एच-597 नामक विषाणु पाया जाता है। इस विषाणु से संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने या हवा के माध्यम से व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षी या व्यक्ति की आंखें सूज जाती हैं और पानी आने लगता है। उपचार नहीं मिलने पर 24 से 72 घंटे में मौत भी हो सकती है।
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होता है एक्शन प्लान लागू
यदि किसी स्थान पर बर्ड फ्लू का केस सामने आता है तो वहां सरकार की तरफ से एक्शन प्लान लागू किया जाता है। इसके तहत निर्धारित किया जाता है कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में सभी पक्षियों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। एक से दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले पक्षियों की नियमित जांच की जाए।
देश में जांच के लिए केवल एक लैब
बर्ड फ्लू की फाइनल जांच के लिए देश भर में केवल एक लेबोरेट्री है, जो भोपाल में है। प्रदेश में इसकी जांच की सुविधा नहीं है। यदि किसी जगह बर्ड फ्लू की आशंका होती है तो स्थानीय टीम पहले उसे नार्थ जोन की जालंधर रीजनल डिजीज डायग्नोस्टिक लैब भेजती है। वहां पर सिर्फ बर्ड फ्लू के बैक्टीरिया की जांच होती है। बर्ड फ्लू के एच-597 की जांच केवल भोपाल लेबोरेट्री में होती है। हालांकि, इसकी शुरुआती जांच हिसार स्थित लुवास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी करते हैं।
मुर्गी फार्म पर भी खतरा
प्रदेश में काफी संख्या में लोगों ने मुर्गी फार्म खोल रखे हैं। इनकी सबसे अधिक संख्या हिसार और उसके आसपास वाले जिलों में है। मुर्गी फार्म संचालकों को सचेत रहना होगा। फार्म में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
घबराने की जरूरत नहीं, बरतें सावधानियां
बर्ड फ्लू प्रवासी पक्षियों से फैलता है। फिलहाल, ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से सावधानियां बरतनी चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और नियमित तौर पर पक्षियों के बीच दवाइयों का छिड़काव करते रहें, जिससे विषाणु पक्षियों में न फैलें। पक्षी की हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सक से जांच कराएं।
- डॉ. एनके महाजन, एचओडी वेटनरी पब्लिक हेल्थ लुवास
चिड़ियाघर के सभी पक्षियों की मेडिकल जांच कराई गई है, जिसमें सभी स्वस्थ पाए गए हैं। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से स्टाफ को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामले में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
- पवन ग्रोवर, डिवीजन वर्ल्ड लाइफ ऑफिसर तिलियार