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जानें... ये रहे मस्तनाथ मठ के महंत
Updated Sat, 30 Jul 2016 02:44 AM IST
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अस्थल बोहर मस्तनाथ मठ
- फोटो : अमर उजाला
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सबसे पहले महंत बने थे सिद्ध योगी तोतानाथ
महासिद्ध चौरंगीनाथ की तप स्थली पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह तपस्थली नाथ पंथ में एक महत्त्वपूर्ण गद्दी मानी जाती है। इस स्थान पर बाबा मस्तनाथ ने घोर तपस्या की और इसका जीर्णोद्धार करके ‘अस्थल बोहर मठ’ की स्थापना की। बाबा मस्तनाथ की कठोर तपस्या और सिद्धियों के कारण उन्हें ‘गोरखनाथ’ के अवतार की संज्ञा दी गई। उनकी शिष्य परंपरा पूरे देश में फैली है, लेकिन इस परंपरागत मूल गद्दी का महंत होना इस परंपरा में गौरव का स्थान है। इस गद्दी के महंत श्रेयोनाथ अपने समय के जाने माने वैद्य थे। इस गद्दी की दिन दोगुनी और रात चौगुनी उन्नति की, जो सातवें दशक में हरियाणा राज्य बनने के बाद सरकार में मंत्री रहे। उन्हें इस गद्दी के उत्तराधिकारी की चिंता थी, जिस पर महंत चांदनाथ विराजमान हुए।
मठ के अभी तक के महंत
सिद्ध योगी तोतानाथ-संवत् 1864 से संवत् 1894
सिद्ध योगिराज मेघनाथ-संवत् 1894 से संवत् 1923
सिद्ध योगीराज मोहरनाथ-संवत् 1922 से संवत् 1935
सिद्ध योगी चेतनाथ-संवत् 1935 से संवत् 1963
सिद्ध योगीराज पूर्णनाथ-संवत् 1963 से सन् 1939
सिद्ध योगी श्रेयोनाथ-सन् 1939 से सन् 1985
महंत चांदनाथ योगी-सन् 1985 से अभी तक
महंत चांदनाथ का कार्यकाल सबसे जुदा
1987 में सिविल रोड रोहतक में पब्लिक स्कूल की स्थापना
1988 में अस्थल बोहर मठ में आवासीय पब्लिक स्कूल
1989 में बाबा मस्तनाथ सभागार का निर्माण
1990 में शिव मंदिर की स्थापना
1991 में प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार
1992 में थेहड़ी में डेरे के मंदिर का निर्माण
1993 में चक 7 एलएल का निर्माण
1994 में श्री बद्रीनाथ धर्मशाला का निर्माण
1995 में एमबीए कॉलेज प्रारंभ कराया
1996 में फार्मेसी एवं डीएड कॉलेज प्रारम्भ कराया
1997 में डेंटल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज प्रारंभ कराया
1998 में फीजियोथैरेपी एवं माडर्न साइंसेज के कोर्स चलवाए
1999 में संस्कृत महाविद्यालय आरंभ किया
2000 में नर्सिंग महाविद्यालय प्रारंभ किया
2001 में कन्या छात्रावास प्रारंभ कराया
2002 में रणपत धातानाथ समाधि स्थल का निर्माण करवाया
2003 में रैबारी धर्मशाला का निर्माण
2005 में चिकित्सा रत्न एवं छात्रावास नं. 2 का निर्माण
2006 में बाबा मस्तनाथ की विशाल मूर्ति का निर्माण
2008 में बीएड कॉलेज शुरू करवाया
2009 में एमटेक और एम फार्मा कोर्स प्रारंभ करवाए
2010 में एमसीए एवं सिविल इंजीनियरिंग के कोर्स शुरू करवाए
2011 में बाबा मस्तनाथ पॉलिटेक्निक शुरू करवाया
2012 में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय प्रारंभ किया
2013 में बाबा मस्तनाथ विधि विभाग का निर्माण करवाया
2015 में होम साइंस, पत्रकारिता के कोर्स शुरू करवाए
-वर्तमान में 150 करोड़ की लागत से अक्षरधाम की तर्ज पर भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अपनी तरह का अनूठा समाधि स्थल और मंदिर होगा
महासिद्ध चौरंगीनाथ की तप स्थली पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह तपस्थली नाथ पंथ में एक महत्त्वपूर्ण गद्दी मानी जाती है। इस स्थान पर बाबा मस्तनाथ ने घोर तपस्या की और इसका जीर्णोद्धार करके ‘अस्थल बोहर मठ’ की स्थापना की। बाबा मस्तनाथ की कठोर तपस्या और सिद्धियों के कारण उन्हें ‘गोरखनाथ’ के अवतार की संज्ञा दी गई। उनकी शिष्य परंपरा पूरे देश में फैली है, लेकिन इस परंपरागत मूल गद्दी का महंत होना इस परंपरा में गौरव का स्थान है। इस गद्दी के महंत श्रेयोनाथ अपने समय के जाने माने वैद्य थे। इस गद्दी की दिन दोगुनी और रात चौगुनी उन्नति की, जो सातवें दशक में हरियाणा राज्य बनने के बाद सरकार में मंत्री रहे। उन्हें इस गद्दी के उत्तराधिकारी की चिंता थी, जिस पर महंत चांदनाथ विराजमान हुए।
मठ के अभी तक के महंत
सिद्ध योगी तोतानाथ-संवत् 1864 से संवत् 1894
सिद्ध योगिराज मेघनाथ-संवत् 1894 से संवत् 1923
सिद्ध योगीराज मोहरनाथ-संवत् 1922 से संवत् 1935
सिद्ध योगी चेतनाथ-संवत् 1935 से संवत् 1963
सिद्ध योगीराज पूर्णनाथ-संवत् 1963 से सन् 1939
सिद्ध योगी श्रेयोनाथ-सन् 1939 से सन् 1985
महंत चांदनाथ योगी-सन् 1985 से अभी तक
महंत चांदनाथ का कार्यकाल सबसे जुदा
1987 में सिविल रोड रोहतक में पब्लिक स्कूल की स्थापना
1988 में अस्थल बोहर मठ में आवासीय पब्लिक स्कूल
1989 में बाबा मस्तनाथ सभागार का निर्माण
1990 में शिव मंदिर की स्थापना
1991 में प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार
1992 में थेहड़ी में डेरे के मंदिर का निर्माण
1993 में चक 7 एलएल का निर्माण
1994 में श्री बद्रीनाथ धर्मशाला का निर्माण
1995 में एमबीए कॉलेज प्रारंभ कराया
1996 में फार्मेसी एवं डीएड कॉलेज प्रारम्भ कराया
1997 में डेंटल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज प्रारंभ कराया
1998 में फीजियोथैरेपी एवं माडर्न साइंसेज के कोर्स चलवाए
1999 में संस्कृत महाविद्यालय आरंभ किया
2000 में नर्सिंग महाविद्यालय प्रारंभ किया
2001 में कन्या छात्रावास प्रारंभ कराया
2002 में रणपत धातानाथ समाधि स्थल का निर्माण करवाया
2003 में रैबारी धर्मशाला का निर्माण
2005 में चिकित्सा रत्न एवं छात्रावास नं. 2 का निर्माण
2006 में बाबा मस्तनाथ की विशाल मूर्ति का निर्माण
2008 में बीएड कॉलेज शुरू करवाया
2009 में एमटेक और एम फार्मा कोर्स प्रारंभ करवाए
2010 में एमसीए एवं सिविल इंजीनियरिंग के कोर्स शुरू करवाए
2011 में बाबा मस्तनाथ पॉलिटेक्निक शुरू करवाया
2012 में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय प्रारंभ किया
2013 में बाबा मस्तनाथ विधि विभाग का निर्माण करवाया
2015 में होम साइंस, पत्रकारिता के कोर्स शुरू करवाए
-वर्तमान में 150 करोड़ की लागत से अक्षरधाम की तर्ज पर भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अपनी तरह का अनूठा समाधि स्थल और मंदिर होगा