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परिणाम आधारित शिक्षा का उद्देश्य व्यावहारिक ज्ञान देना है : कुलपति
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आईजीयू में आयोजित कार्यशाला में भाग लेते विद्यार्थी व स्टॉफ। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से मंगलवार को परिणाम आधारित शिक्षा (ओबीई) में मूल्यांकन एवं प्राप्ति कार्यप्रणाली विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। राव तुलाराम ब्लॉक के सेमिनार हॉल-2 में आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों को विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों के आकलन की आधुनिक विधियों की जानकारी दी गई।
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने संदेश में कहा कि परिणाम आधारित शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों में शिक्षकों की दक्षता विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में सहायक होगी।
मुख्य वक्ता एवं आईक्यूएसी सलाहकार प्रो. संदीप ग्रोवर ने शिक्षा के ज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोप्रेरणात्मक पक्षों के संतुलित विकास पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान के विजन और मिशन के अनुरूप शैक्षणिक उद्देश्यों तथा कोर्स एवं प्रोग्राम आउटकम्स का समन्वय जरूरी है।
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उन्होंने मध्यावधि व सत्रांत परीक्षाओं, क्विज, केस स्टडी, प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे प्रत्यक्ष मूल्यांकन साधनों के साथ छात्र एवं नियोक्ता सर्वेक्षण जैसे अप्रत्यक्ष तरीकों की उपयोगिता समझाई। प्रश्नपत्रों को कोर्स आउटकम्स के अनुरूप तैयार करने और तीन स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह, अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रो. सुनील कुमार, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. विकास बत्रा, प्रो. दीपक गुप्ता और प्रो. रीतू बजाज सहित प्राध्यापक व शोधार्थी मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ. रीना हुड्डा ने किया।
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कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने संदेश में कहा कि परिणाम आधारित शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों में शिक्षकों की दक्षता विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में सहायक होगी।
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मुख्य वक्ता एवं आईक्यूएसी सलाहकार प्रो. संदीप ग्रोवर ने शिक्षा के ज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोप्रेरणात्मक पक्षों के संतुलित विकास पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान के विजन और मिशन के अनुरूप शैक्षणिक उद्देश्यों तथा कोर्स एवं प्रोग्राम आउटकम्स का समन्वय जरूरी है।
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उन्होंने मध्यावधि व सत्रांत परीक्षाओं, क्विज, केस स्टडी, प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे प्रत्यक्ष मूल्यांकन साधनों के साथ छात्र एवं नियोक्ता सर्वेक्षण जैसे अप्रत्यक्ष तरीकों की उपयोगिता समझाई। प्रश्नपत्रों को कोर्स आउटकम्स के अनुरूप तैयार करने और तीन स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह, अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रो. सुनील कुमार, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. विकास बत्रा, प्रो. दीपक गुप्ता और प्रो. रीतू बजाज सहित प्राध्यापक व शोधार्थी मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ. रीना हुड्डा ने किया।