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Rohtak News: कारगिल के वीरों ने बुलंद हौसले से जीती थी जंग, दुश्मनों को किया था डटकर सामना

Sun, 26 Jul 2026 02:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sun, 26 Jul 2026 02:29 AM IST
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The heroes of Kargil won the war with high morale and stood their ground against the enemy.
05- आईएमटी ​स्थित अमर उजाला यूनिट में संवाद कार्यक्रम में मौजूद कारगिल शहीदों की वीरांगनाएं व प
संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। कारगिल शहीदों ने हौसले और जज्बे से देश की रक्षा के लिए दुश्मनों का डटकर सामना किया था। संकट के समय सैनिकों ने जनता की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। नागरिकों को सैनिकों की कुर्बानियों को भूलना नहीं चाहिए। ये बातें पूर्व सैनिक और कारगिल शहीद की वीरांगनाओं ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में कहीं।
आईएमटी स्थित अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) से एक दिन पहले आयोजित संवाद में कारगिल शहीद की वीरांगनाओं ने पतियों के गौरव की गाथा सुनाई। पूर्व सैनिकों ने शहीदों के जोश और जज्बे को सलाम करते हुए अनुभव साझा किए।
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सांघी से वीर नारी सरोज बाला ने कहा कि 2-3 जून की रात पति शहीद समुंदर सिंह की दुश्मनों के साथ युद्ध में बलिदान हो गए थे। 6 जून को उनका पार्थिव शरीर आने तक की कोई जानकारी नहीं थी।
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देश की रक्षा में पति के शहीद होने पर मुझे गर्व था। थोड़े समय के लिए चुनौती रही लेकिन कभी हौसला नहीं तोड़ा। आज भी उनकी कुर्बानी को नहीं भुला पाती।
टिटौली से वीर नारी राजपति ने कहा कि पति शहीद नायक सिंह ने कारगिल की लड़ाई में बलिदान देने के बाद अपना परिवार छोड़ा है। उनके निधन के बाद परिवार की हालत ठीक नहीं थी।
बच्चों को पाला-पोसकर काबिल बनाया। उनके दोस्त बताते थे कि देश प्रेम की भावना उनमें ऐसी थी कि साथियों को बचाने के लिए खुद अपनी जान की बाजी लगा दी। शहीद परिवार से रामफल हुड्डा, सन्नी कुंडू व श्वेता कुंडू ने भी अपने विचार रखे।
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मैं खुद कारगिल में शामिल रहा लेकिन दुश्मनों का सामना करते समय कभी पीछे नहीं हटे। चार पीढि़यां सेना में रही हैं। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल तक भारत के लिए परिवार ने सारे युद्ध लड़े।
- कैप्टन प्रताप सिंह, कारगिल योद्धा।
28 साल सेना में रहकर सेवाएं दीं इसीलिए कि भारत देश में रहते हैं और इसके लिए ही प्राणों की आहुति दे दें। अग्निवीर के कारण अब थोड़ा दौर बदला है। अधूरे अभ्यास से युवा क्या जोश व जज्बा रखेंगे।
- सूबेदार मेजर सुरेंद्र सिंह, पूर्व सैनिक।
कारगिल की लड़ाई में 527 वीर सैनिकों ने अपना बलिदान दिया है। इनमें नौ सैनिक रोहतक जिले थे। हर युद्ध में भारतीय सैनिक ने मोर्चे पर डटकर दुश्मनों का सामना किया है। उन्हें सलाम है।
- प्रवीण कुमार, खेड़ी साध।
भारतीय सेना को जब भी किसी देश ने उकसाया है। उसका खामियाजा हर देश ने झेला है। जब-जब सैनिकों को दुश्मनों को ढेर करने की बारी आई है, तब-तब अपनी वीरता का डंका बजाया है।

- कैप्टन जगबीर मलिक, पूर्व सैनिक
ऑपरेशन विजय में राजस्थान के बॉर्डर पर सेवाएं देते हुए साथियों को बलिदान होते देखा है लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि घर लौट जाएं। सैनिकों में शुरू से दुश्मनों को पलटकर जवाब देने का जोश रहा है।
- हवलदार मेहताब सिंह, पूर्व सैनिक
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