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Rohtak News: दीपों और रंगोली से सजाया घाट, महिलाएं 36 घंटे बाद खोलेंगी उपवास
Sun, 26 Oct 2025 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 26 Oct 2025 12:00 AM IST
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25जेएनडी02 : छठ पर्व पर उपवास रख पूजा करती महिलाएं। संवाद
जींद। लोक आस्था का पर्व छठ पूजा शनिवार से शुरू हो गया है। शहर में हांसी ब्रांच नहर के घाटों पर सुबह से ही पूजा-अर्चना की शुरुआत हो गई। श्रद्धालुओं ने नहर के दोनों ओर बने घाटों को फूल-मालाओं, केले के पत्तों, दीपों और रंगोली से सजाया।
महिलाओं ने व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की उपासना के लिए तैयारी की। शाम को सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। छठ पर्व को लेकर शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल है।
सुबह से ही महिलाएं अपने घरों से पूजा सामग्री लेकर घाटों की ओर निकल पड़ीं। नहर के किनारे बने दोनों घाटों पर साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए गए हैं। 27 अक्तूबर को महिलाएं नदी या नहर के पानी में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगी और परिवार की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करेंगी।
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छठ मईया के गीतों से गुजेंगे घाट
छठ पूजा को लेकर प्रवासी श्रद्धालुओं ने घाट पर सजावट शुरू कर दी है। 27 और 28 अक्तूबर को घाट छठ मईया के गीतों से गुजेंगे। फिलहाल घरों में पारंपरिक गीतों के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। महिलाएं लाल-पीले वस्त्रों में सजी हुईं पूजा-अर्चना में लगी हुई है। फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा और नींबू और प्रसाद सामग्रियों को थाली में सजाकर पूजा की गई।
इन फलों का चार दिन रहेगा परहेज
छठ पूजा में महिलाएं शुद्धता विशेष ध्यान रखती हैं। इस दौरान अंगूर, अनानास, तरबूज, खरबूजा, पपीता और आम जैसे फल नहीं खाए जाते, क्योंकि इन्हें या तो काटना पड़ता है या यह मौसम विशेष के फल नहीं माने जाते। छठ में केवल शुद्ध, मौसमी और अखंड बिना काटे फलों का ही उपयोग शुभ माना जाता है। यह व्रत 36 घंटे तक रखा जाता है और 72 घंटे तक पूजा-अर्चना की जाती है।
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महिलाओं ने व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की उपासना के लिए तैयारी की। शाम को सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। छठ पर्व को लेकर शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल है।
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सुबह से ही महिलाएं अपने घरों से पूजा सामग्री लेकर घाटों की ओर निकल पड़ीं। नहर के किनारे बने दोनों घाटों पर साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए गए हैं। 27 अक्तूबर को महिलाएं नदी या नहर के पानी में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगी और परिवार की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करेंगी।
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छठ मईया के गीतों से गुजेंगे घाट
छठ पूजा को लेकर प्रवासी श्रद्धालुओं ने घाट पर सजावट शुरू कर दी है। 27 और 28 अक्तूबर को घाट छठ मईया के गीतों से गुजेंगे। फिलहाल घरों में पारंपरिक गीतों के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। महिलाएं लाल-पीले वस्त्रों में सजी हुईं पूजा-अर्चना में लगी हुई है। फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा और नींबू और प्रसाद सामग्रियों को थाली में सजाकर पूजा की गई।
इन फलों का चार दिन रहेगा परहेज
छठ पूजा में महिलाएं शुद्धता विशेष ध्यान रखती हैं। इस दौरान अंगूर, अनानास, तरबूज, खरबूजा, पपीता और आम जैसे फल नहीं खाए जाते, क्योंकि इन्हें या तो काटना पड़ता है या यह मौसम विशेष के फल नहीं माने जाते। छठ में केवल शुद्ध, मौसमी और अखंड बिना काटे फलों का ही उपयोग शुभ माना जाता है। यह व्रत 36 घंटे तक रखा जाता है और 72 घंटे तक पूजा-अर्चना की जाती है।

25जेएनडी02 : छठ पर्व पर उपवास रख पूजा करती महिलाएं। संवाद