फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Table tennis player Suhana Saini told the key to success in Rohtak Haryana

सफलता: टेबल टेनिस खिलाड़ी सुहाना बोलीं- चैंपियन बनने के लिए त्यागने पड़े हैं भौतिक सुख

Tue, 08 Mar 2022 08:25 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 08 Mar 2022 08:25 PM IST
सार

सुहाना सैनी ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए 12 घंटे कम पड़ते हैं। देश की पहले व दुनिया की तीसरे रैंक की टेबल टेनिस खिलाड़ी सुहाना ने कहा कि चैंपियन बनने के लिए भौतिक सुख त्यागने पड़े हैं।

विज्ञापन
Table tennis player Suhana Saini told the key to success in Rohtak Haryana
मां भावना के साथ खिलाड़ी सुहाना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मैं भी इंसान हूं। मुझे भी देर तक सोना, फास्ट फूड खाना, टीवी देखना, शादी में जाना पसंद है। मुझे कुछ करना है, बनना है। इसके लिए दिन के 12 घंटे कम पड़ते हैं। अपने दिन के घंटे बढ़ाने व पढ़ाई के साथ टेबल टेनिस (टीटी) चैंपियन बनने के लिए इन भौतिक सुखों का त्याग करना पड़ा है। सुबह समय से उठाना, व्यायाम व अभ्यास करना, पौष्टिक आहार लेना, जरूरत के हिसाब से आराम करना, यही मेरी दिनचर्या है। टीवी, सोशल मीडिया से ही दूरी है।

विज्ञापन


यहां तक कि रिश्तेदार व उनके शादी समारोह तक में नहीं जाती हूं। यह कहना है अंडर-17 व 19 वर्ग में देश की पहले व अंडर-17 में दुनिया की तीसरे रैंक की खिलाड़ी सुहाना सैनी का। अमर उजाला से हुई बातचीत में इस खिलाड़ी ने अपने चैंपियन बनने की राह में आए सुखों व आराम से दूरी बनाने की कहानी साझा की।
विज्ञापन


हरियाणा के रोहतक शहर के आर्य नगर में रहने वाली खिलाड़ी का कहना है कि मेरी मां भावना सैनी ने खेलों को एक पेशे के रूप में चुना था। वे स्पर्धाएं खेलती थीं। राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। वह कठिन समय था। उनके खेलने पर माता-पिता, परिवार, पड़ोसी सभी ने रोकटोक की। चूंकि मेरी मां सशक्त व संघर्षशील महिला हैं, इसलिए वे अपने फैसले पर डटी रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे, ऐसी मां मिली। मेरे पिता विकास सैनी, दादा सतीश सैनी, दादी कमला सैनी सभी ने मुझे खेलने के लिए प्रेरित किया व आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। यही वजह है कि अंडर-17 वर्ग में खेलते हुए दुनिया में तीसरे रैंक की खिलाड़ी बन पाई।

मैं भी किसी का जीवन बदल सकूं
सुहाना का कहना है कि जैविक संरचना को छोड़ दें तो मानसिक स्तर पर लड़के व लड़की के बीच कोई अंतर नहीं है। इसलिए महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से उसी अनुसार अपना कॅरिअर चुनना चाहिए। महिलाओं का समर्थन करते हुए इस खिलाड़ी ने कहा कि दुनिया की हर लड़की को अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का मौका मिलना चाहिए।


हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। यहां पुरुषों व महिलाओं को समान अधिकार हैं। जीवन में मैं कुछ बनी या बड़ा कर सकी तो जरूर करूंगी। मेरा प्रयास किसी ऐसे जरूरतमंद बच्चे को आगे बढ़ाकर उसके जीवन में बदलाव लाना रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed