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सड़कों से पट्टियां नदारद, प्रशासन को हादसे का इंतजार
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सुपवा के पास सड़क के किनारे सफेद पट्टी नही है। अमर उजाला
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शहर के बीचोंबीच से गुजर रहे करीब 35 किलोमीटर लंबे ज्यादातर प्रमुख मार्गों से सफेद-पीली पट्टियां व कैटआई गायब हैं। ऐसे में घना कोहरा पड़ने पर रात में वाहनों से गुजरना लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। पीडब्ल्यूडी की करीब 150 किलोमीटर सड़कें हैं, जिनमें से करीब 35 किमी. सड़कें शहर के बीचोंबीच से गुजरती हैं। हिसार बाईपास से दिल्ली बाईपास, आईएमटी चौक, सुखपुरा चौक से दिल्ली बाईपास, सुखपुरा चौक से वीटा प्लांट से आगे मंदिर तक और झज्जर चुंगी से रुपया चौक तक है। सीवर लाइन डालने का काम होने की वजह से आईएमटी से दिल्ली बाईपास तक दोनों तरफ की सड़कें कई जगह से खोदी गई हैं। इससे कहीं भी सफेद-पीली पट्टियां दिखाई नहीं देतीं। दिल्ली चौक से हिसार बाईपास तक तमाम जगह न पट्टी दिखती है और न कैटआई। यही हालात सुखपुरा चौक से दिल्ली बाईपास व सुखपुरा चौक से वीटा प्लांट के आगे तक नजर आते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब शहर के अंदर ये हालात हैं, तो बाहर के रास्तों पर कैसे होंगे।
सुरक्षित यातायात के लिए पट्टियां जरूरी
नियमानुसार सड़कों पर सुरक्षित यातायात के लिए पट्टियां और संकेतक बेहद जरूरी है। संकेतक से वाहन चालकों को काफी सहूलियत होती है। रात को घना कोहरा होने पर पट्टियां और संकेतक काफी मददगार साबित होते हैं। यह सभी सड़कों के लिए जरूरी है ।
दिसंबर के पहले सप्ताह तक हो जाना चाहिए पट्टियां लगाने का काम
नियमानुसार दिसंबर के पहले सप्ताह तक प्रमुख मार्गों पर पट्टियां बनाने, कैटआई व संकेतक लगाने का काम हो जाना चाहिए। क्योंकि दिसंबर शुरू होते ही कोहरा पड़ना शुरू हो जाता है। दिसंबर के मध्य से जनवरी तक घना कोहरा छाने की आशंका बनी रहती है। रात में कोहरा होने से दृश्यता कम हो जाती है। ऐसे में पट्टियां, कैटआई व संकेतक से वाहन चालक आगे बढ़ता है।
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अभी कोहरा छाना शुरू नहीं हुआ है। मार्गों पर पट्टियां बनाने, कैटआई व संकेतक लगाने का काम जल्दी ही शुरू कराया जाएगा।
- उदयबीर झांझरिया, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
ये जानना है जरूरी
1. सड़क पर सफेद व पीले रंग की पट्टियां खिंची होती हैं।
2. सफेद पट्टी का मतलब लेन में ही चले। दूसरी लेन में जाने की जरूरत नहीं।
3. पीली पट्टी का मतलब सड़क के किनारे वाहन खड़ा करने की अनुमति नहीं।
4. टूटी सफेद पट्टी का मतलब लेन बदल सकते हैं, लेकिन पीछे का ध्यान रखकर।
5. पीली लंबी पट्टी का मतलब है, ओवरटेक कर सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ नहीं जा सकते।
6. टूटी पीली पट्टी यानी रफ्तार से आगे निकल सकते हैं। आगे-पीछे का ख्याल रखकर।
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सुरक्षित यातायात के लिए पट्टियां जरूरी
नियमानुसार सड़कों पर सुरक्षित यातायात के लिए पट्टियां और संकेतक बेहद जरूरी है। संकेतक से वाहन चालकों को काफी सहूलियत होती है। रात को घना कोहरा होने पर पट्टियां और संकेतक काफी मददगार साबित होते हैं। यह सभी सड़कों के लिए जरूरी है ।
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दिसंबर के पहले सप्ताह तक हो जाना चाहिए पट्टियां लगाने का काम
नियमानुसार दिसंबर के पहले सप्ताह तक प्रमुख मार्गों पर पट्टियां बनाने, कैटआई व संकेतक लगाने का काम हो जाना चाहिए। क्योंकि दिसंबर शुरू होते ही कोहरा पड़ना शुरू हो जाता है। दिसंबर के मध्य से जनवरी तक घना कोहरा छाने की आशंका बनी रहती है। रात में कोहरा होने से दृश्यता कम हो जाती है। ऐसे में पट्टियां, कैटआई व संकेतक से वाहन चालक आगे बढ़ता है।
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अभी कोहरा छाना शुरू नहीं हुआ है। मार्गों पर पट्टियां बनाने, कैटआई व संकेतक लगाने का काम जल्दी ही शुरू कराया जाएगा।
- उदयबीर झांझरिया, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
ये जानना है जरूरी
1. सड़क पर सफेद व पीले रंग की पट्टियां खिंची होती हैं।
2. सफेद पट्टी का मतलब लेन में ही चले। दूसरी लेन में जाने की जरूरत नहीं।
3. पीली पट्टी का मतलब सड़क के किनारे वाहन खड़ा करने की अनुमति नहीं।
4. टूटी सफेद पट्टी का मतलब लेन बदल सकते हैं, लेकिन पीछे का ध्यान रखकर।
5. पीली लंबी पट्टी का मतलब है, ओवरटेक कर सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ नहीं जा सकते।
6. टूटी पीली पट्टी यानी रफ्तार से आगे निकल सकते हैं। आगे-पीछे का ख्याल रखकर।