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Rohtak News: धनतेरस को खरीददारी करना शुभ, आज से 6 दिवसीय दीपोत्सव की शुरूआत

Thu, 05 Nov 2026 11:10 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2026 11:10 PM IST
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Shopping on Dhanteras is considered
फोटो संख्या:60- ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज
महेंद्रगढ़। हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली के पांच दिवसीय महोत्सव की शुरूआत का प्रतीक है। इस दिन से पांच दिन चलने वाले दीपोत्सव की शुरूआत हो जाती है। परंतु अबकी छह दिनों तक ये उत्सव चलेगा। जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक रहेगा। धनतेरस वाले दिन सायंकाल में धन्वंतरी देवता, कुबेर देवता और मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है और खरीदारी की जाती है। इनके पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और धन लाभ के योग बनते हैं।
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क्षेत्रीय प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस वर्ष धनतेरस का त्योहार शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन हस्त नक्षत्र के साथ विष्कुंभ योग रहेगा। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के समय धन त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि रोगास्य प्राणियों के लिए अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे।
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हिंदू मान्यताओं के अनुसार धन्वंतरि विष्णु का अवतार माना जाता इसी दिन आयुर्वेद का जन्म हुआ था। धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य या आरोग्य का देवता भी कहते है। उन्होंने बताया कि धनतेरस वाले दिन खरीदारी करना ही शुभ माना जाता है। सोना, चांदी, बर्तन, भूमि और वाहन खरीदना फायदेमंद रहता है।
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अगर इस दिन ज्यादा महंगा सामान नहीं खरीद सकते तो पीतल से बने बर्तनों को जरूर खरीदना चाहिए। आज के दिन झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और ये घर से गरीबी को हटाती है।
इसके अलावा इस दिन चांदी से बनी लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा लाकर अपने घर, कार्यालय और अपने व्यापार वाले स्थान पर लगाना भी धन संपत्ति को बढ़ाता है। मान्यता के अनुसार धनतेरस पर इन वस्तुओं की खरीद करने से आपके घर में पूरे साल बरकत रहती है। उस दिन खरीदारी पर खरीदी गई चीजों की 13 गुणा वृद्धि होती है।

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खरीददारी करने व पूजा का शुभ मुहूर्त:
धनतेरस की पूजा संध्या काल यानी प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ माना गया है। इसके साथ ही स्थिर लग्न (विशेषकर वृषभ लग्न) का समय अत्यंत फलदायी होता है। त्रयोदशी तिथि छह नवंबर को सुबह 10:30 से सात नवंबर को सुबह 10:47 तक रहेगी। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:47 से दोपहर 12:31 बजे तक, शुभ का चौघड़िया दोपहर 12:09 से दोपहर 1:31 तक, दीप प्रज्वलित व पूजा प्रदोष काल शाम 5:36 से रात 8:15 तक, वृषभ लग्न शाम 6:08 से रात 8:02 तक रहेगा।
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