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15 से 20 हजार रुपये में धड़ल्ले से हो रही है गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 26 Jun 2016 01:37 AM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : Demo pic
प्रदेश में गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच पर सख्ती के बाद पड़ोसी प्रदेशों में लिंग जांच का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। इस गोरखधंधे में प्रदेश के ही कुछ लोग एजेंट का काम कर रहे हैं। ऐसे एजेंट प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर बाहर ले जाते हैं और लिंग जांच कराकर 15 से 20 हजार रुपये ऐंठते हैं। ऐसे ही एक मामले का खुलासा शनिवार को तब हुआ जब सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने टीम के साथ यूपी के गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में छापामारी की। डीएम से अनुमति नहीं मिलने की वजह से टीम डाक्टर को तो नहीं पकड़ पाईं, लेकिन जींद निवासी एजेंट रमेश को पकड़ लिया है, जो यहां से गर्भवती महिलाओं को ले जाकर गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में लिंग जांच करवाता था। उसके पास से 17 हजार रुपये, डायरी और मोबाइल मिला है, जिसे कब्जे में ले लिया गया है। एजेंट को अर्बन स्टेट थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है। रमेश के पास मिली डायरी में कई लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। माना जा रहा है कि यह डायरी कई राज खोल सकती है।
शहर में गर्भस्थ शिशु के लिंग जांच गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिलने के बाद सिविल सर्जन ने ट्रैप करने के लिए जाल बिछाया। शनिवार को सौदा तय होने के बाद बस स्टैंड से एक गर्भवती महिला, एजेंट लक्ष्मी और रमेश दिल्ली के लिए रवाना हुए। गर्भवती महिला के पति को रोहतक में छोड़ दिया गया। बस से तीनों नांगलोई पहुंचे। लक्ष्मी को मेट्रो स्टेशन पर छोड़कर रमेश गर्भवती महिला को मेट्रो से लेकर शाहदरा चला गया। शाहदरा से लोनी बार्डर स्थित सिटी अस्पताल ले गया और गर्भवती महिला के साथ अंदर चला गया। इस बीच पुलिस स्टाफ सिविल वर्दी में तीनों के साथ-साथ चल रहा था। सड़क माध्यम से सिविल सर्जन और उनकी टीम रमेश का पीछा कर रही थी। जिस समय निजी अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच हो रही थी उस समय स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्रवाई के लिए डीएम से अनुमति लेने के लिए बाहर प्रतीक्षा कर रही थी। बाद में उन्हें बताया गया कि डीएम आवश्यक बैठक में हैं। इस बीच महिला की जांच कर उसे बच्चे के लिंग के बारे में बता दिया गया और वह एजेंट रमेश के साथ अस्पताल के बाहर आ गई। जब एजेंट और गर्भवती महिला हरियाणा बार्डर पर आए तो स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की टीम ने रमेश को धर लिया। रमेश के पास स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिये गए 17 हजार रुपये के अलावा डायरी और मोबाइल ले लिया गया। रमेश को अर्बन स्टेट थाने के हवाले कर दिया गया है। आगे की जांच पुलिस करेगी।
एजेंट लक्ष्मी खोलेगी नेटवर्क के राज
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि छोटूराम स्टेडियम के पास रहने वाली लक्ष्मी लिंग जांच करवाने के नेटवर्क में काम करती है। उसके पकड़ में आने के बाद कई राज उजागर होंगे। बताया कि विभाग की ओर से भेजी गई गर्भवती महिला को लक्ष्मी से मिलवाया गया था और लिंग जांच के नाम पर 17 हजार रुपये में सौदा तय किया गया था। टीम तीन दिन से इस पर कार्य कर रही थी।
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गाजियाबाद के डीएम ने नहीं किया सहयोग
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने बताया कि गाजियाबाद के जिस अस्पताल में गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच की जा रही थी उस पर कार्रवाई करने के लिए उन्होंने कई बार गाजियाबाद के डीएम से संपर्क किया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। चूंकि यूपी में किसी निजी अस्पताल पर कार्रवाई के लिए डीएम की अनुमति जरूरी थी इसलिए वह डाक्टर पर कार्रवाई नहीं कर सकीं। इस संबंध में जिला उपायुक्त रोहतक से बातचीत की गई है।
एजेंट रमेश की डायरी से मिलेंगे कई सुराग
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने बताया कि रमेश के पास से एक डायरी मिली है। इसमें कई महिलाओं के नाम और फोन नंबर लिखे गए हैं। अंदेशा है कि इनकी जांच कराई गई है। पुलिस प्रशासन को शिकायत दी गई है। अब पुलिस इसकी जांच कर डायरी का राज खोलेगी। आरोपी रमेश जींद निवासी है। लिंग जांच के नाम पर ये लोग गर्भवती महिलाओं से 15 से 20 हजार रुपये वसूलते हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि एजेंट ने दो और महिलाओं की जांच की हामी भरी है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने पीएनडीटी एक्ट के तहत तकरीबन 250 स्थानों पर कार्रवाई की है। इसमें से 25 के करीब राज्य से बाहर के मामले हैं, इसमें दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।
छापा मरने वाली टीम
छापा मरने वाली टीम में सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप, डॉ. राकेश, डॉ. संजीव, पीपीएम दीपक, मीनाक्षी और सोनिया शामिल रहे।
बोली अधिकारी
गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच मामले में हमने पुलिस को एक एजेंट सौंपा है। गाजियाबाद में यदि डीएम का समय पर सहयोग मिल जाता तो लिंग जांच करने वाले डॉक्टर पर भी कार्रवाई हो जाती। इसके लिए रोहतक उपायुक्त के समक्ष बात रख रहे हैं। यदि हमें अन्य राज्यों में प्रशासनिक अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो कार्रवाई हो पाना मुश्किल हो जाएगा। हरियाणा में सख्ती के बाद अकसर लोग लिंग जांच के लिए दिल्ली, यूपी, राजस्थान और पंजाब जा रहे हैं। बाकायदा इन लोगों का पूरा नेटवर्क इसके पीछे काम कर रहा है।
- डॉ. दीपा जाखड़, सिविल सर्जन, रोहतक
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शहर में गर्भस्थ शिशु के लिंग जांच गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिलने के बाद सिविल सर्जन ने ट्रैप करने के लिए जाल बिछाया। शनिवार को सौदा तय होने के बाद बस स्टैंड से एक गर्भवती महिला, एजेंट लक्ष्मी और रमेश दिल्ली के लिए रवाना हुए। गर्भवती महिला के पति को रोहतक में छोड़ दिया गया। बस से तीनों नांगलोई पहुंचे। लक्ष्मी को मेट्रो स्टेशन पर छोड़कर रमेश गर्भवती महिला को मेट्रो से लेकर शाहदरा चला गया। शाहदरा से लोनी बार्डर स्थित सिटी अस्पताल ले गया और गर्भवती महिला के साथ अंदर चला गया। इस बीच पुलिस स्टाफ सिविल वर्दी में तीनों के साथ-साथ चल रहा था। सड़क माध्यम से सिविल सर्जन और उनकी टीम रमेश का पीछा कर रही थी। जिस समय निजी अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच हो रही थी उस समय स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्रवाई के लिए डीएम से अनुमति लेने के लिए बाहर प्रतीक्षा कर रही थी। बाद में उन्हें बताया गया कि डीएम आवश्यक बैठक में हैं। इस बीच महिला की जांच कर उसे बच्चे के लिंग के बारे में बता दिया गया और वह एजेंट रमेश के साथ अस्पताल के बाहर आ गई। जब एजेंट और गर्भवती महिला हरियाणा बार्डर पर आए तो स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की टीम ने रमेश को धर लिया। रमेश के पास स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिये गए 17 हजार रुपये के अलावा डायरी और मोबाइल ले लिया गया। रमेश को अर्बन स्टेट थाने के हवाले कर दिया गया है। आगे की जांच पुलिस करेगी।
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एजेंट लक्ष्मी खोलेगी नेटवर्क के राज
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि छोटूराम स्टेडियम के पास रहने वाली लक्ष्मी लिंग जांच करवाने के नेटवर्क में काम करती है। उसके पकड़ में आने के बाद कई राज उजागर होंगे। बताया कि विभाग की ओर से भेजी गई गर्भवती महिला को लक्ष्मी से मिलवाया गया था और लिंग जांच के नाम पर 17 हजार रुपये में सौदा तय किया गया था। टीम तीन दिन से इस पर कार्य कर रही थी।
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गाजियाबाद के डीएम ने नहीं किया सहयोग
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने बताया कि गाजियाबाद के जिस अस्पताल में गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच की जा रही थी उस पर कार्रवाई करने के लिए उन्होंने कई बार गाजियाबाद के डीएम से संपर्क किया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। चूंकि यूपी में किसी निजी अस्पताल पर कार्रवाई के लिए डीएम की अनुमति जरूरी थी इसलिए वह डाक्टर पर कार्रवाई नहीं कर सकीं। इस संबंध में जिला उपायुक्त रोहतक से बातचीत की गई है।
एजेंट रमेश की डायरी से मिलेंगे कई सुराग
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने बताया कि रमेश के पास से एक डायरी मिली है। इसमें कई महिलाओं के नाम और फोन नंबर लिखे गए हैं। अंदेशा है कि इनकी जांच कराई गई है। पुलिस प्रशासन को शिकायत दी गई है। अब पुलिस इसकी जांच कर डायरी का राज खोलेगी। आरोपी रमेश जींद निवासी है। लिंग जांच के नाम पर ये लोग गर्भवती महिलाओं से 15 से 20 हजार रुपये वसूलते हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि एजेंट ने दो और महिलाओं की जांच की हामी भरी है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने पीएनडीटी एक्ट के तहत तकरीबन 250 स्थानों पर कार्रवाई की है। इसमें से 25 के करीब राज्य से बाहर के मामले हैं, इसमें दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।
छापा मरने वाली टीम
छापा मरने वाली टीम में सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप, डॉ. राकेश, डॉ. संजीव, पीपीएम दीपक, मीनाक्षी और सोनिया शामिल रहे।
बोली अधिकारी
गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच मामले में हमने पुलिस को एक एजेंट सौंपा है। गाजियाबाद में यदि डीएम का समय पर सहयोग मिल जाता तो लिंग जांच करने वाले डॉक्टर पर भी कार्रवाई हो जाती। इसके लिए रोहतक उपायुक्त के समक्ष बात रख रहे हैं। यदि हमें अन्य राज्यों में प्रशासनिक अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो कार्रवाई हो पाना मुश्किल हो जाएगा। हरियाणा में सख्ती के बाद अकसर लोग लिंग जांच के लिए दिल्ली, यूपी, राजस्थान और पंजाब जा रहे हैं। बाकायदा इन लोगों का पूरा नेटवर्क इसके पीछे काम कर रहा है।
- डॉ. दीपा जाखड़, सिविल सर्जन, रोहतक