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लॉकडाउन में सेल्फ स्टडी से आसान हुई पढ़ाई, पाए 99.8 प्रतिशत अंक
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महामारी व लॉकडाउन की कठिन परिस्थितियों में भी नियमित पढ़ाई जारी रखी। ऑनलाइन पढ़ाई से आंखों व सिर दर्द की तकलीफ सहकर शेड्यूल से पढ़ाई की। कक्षा के मासिक टेस्ट व प्री-बोर्ड परीक्षा में की मेहनत ने परीक्षा में अच्छे अंक दिलाए। यह कहना है सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा में 99.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले साकेत का। मंगलवार को परीक्षा परिणाम आने के बाद अमर उजाला से हुई बातचीत में छात्र ने अपना संघर्ष साझा किया।
मूलरूप से करनाल हाल राजेंद्र नगर निवासी साकेत ने कहा कि कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन में अध्ययन करना मुश्किल रहा। ऑनलाइन पढ़ाई ही अध्ययन का एकमात्र विकल्प था। स्कूल के शिक्षकों की सभी कक्षाएं लेना व पढ़ाई करना आंखों व सिर दर्द का बड़ा कारण बना गया था। इस स्थिति से बचते हुए शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की। परीक्षा से पहले पुराने प्रश्न पत्र हल किए। वार्षिक परीक्षा की पूरी तैयारी थी, मगर परीक्षा नहीं होना दुखद रहा। पेपर होते तो और बेहतर होता। परीक्षा में बेहतर अंक सेल्फ स्टडी की वजह से मिले। शिक्षकों का भी पूरा सहयोग मिला। अभिभावकों ने महामारी काल में प्रेरित व प्रोत्साहित किया।
साकेत को बनना है इंजीनियर
पठानिया पब्लिक स्कूल के छात्र साकेत का सपना इंजीनियर बनना है। इसके लिए नॉन मेडिकल विषय लेकर पढ़ाई करनी है। नई कक्षा में और ज्यादा मेहनत से पढ़ाई कर अपना लक्ष्य हासिल करना है। पिता सुरेंद्र कुमार महला खेल विभाग में अधिकारी हैं। खुद तलवारबाजी का शौक रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्पर्धा में शामिल हो चुका हूं। यह अभियान जारी रहेगा।
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परीक्षा होती तो और बेहतर होता...
सीबीएसई की 10वीं कक्षा के परिणाम में 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। ये अंक मासिक टेस्ट व प्री-बोर्ड के प्रदर्शन के आधार पर मिले हैं। परीक्षा होती हो और बेहतर होता। परीक्षा की तैयारी पूरी थी। परीक्षा परिणाम जानने के बाद अमर उजाला से हुई बातचीत में प्रीति विहार निवासी धीरज ने यही कहा। अपनी सफलता की खुशी साझा करते हुए छात्र ने कहा कि महामारी के कारण परीक्षा नहीं हुई। परीक्षा होती तो और बेहतर होता। उस परिणाम की ज्यदा खुशी होती। परीक्षा के लिए जी-जान से तैयारी की थी। शुरू में ऑनलाइन पढ़ाई में कुछ दिक्कतें रही, मगर शिक्षकों के सहयोग से उनका समाधान हो गया। महामारी के कारण ऑनलाइन पढ़ाई हुई। स्कूल लगता तो कक्षा में ओर बेहतर ढंग से विद्यार्थी पढ़ पाते। कक्षा में अध्ययन का कोई विकल्प नहीं है। स्कूल बंद होने से प्रेक्टिकल काफी प्रभावित हुए। इसलिए अब आगे और ज्यादा मेहनत करनी होगी। मेरा लक्ष्य इंजीनियर बनने का है। पिता महावीर निजी कंपनी के सीनियर मैनेजर हैं। मां सुमन ने भी घर पर हर समय मुझे प्रोत्साहित किया।
ऑनलाइन लगातार पढ़ना मुश्किल हुआ तो अंतराल पर की पढ़ाई
सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा में सिमरन कौर ने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इस सफलता से परिवार व स्कूल में खुशी का माहौल है। अपनी खुशी अमर उजाला के साथ साझा करते हुए चिन्योट कॉलोनी में रहने वाली सिमरन ने कहा कि नियमित अध्ययन के कारण यह लक्ष्य हासिल करना आसान हुआ है। सैंपल पेपर व स्कूल की सभी ऑनलाइन कक्षाएं लेने के अलावा घर पर किताबें पढ़ी। ट्यूशन नहीं लगाया। घर पर जितना समय मिलता पढ़ाने पर जोर रहता। ऑनलाइन पढ़ाई लगातार करना मुश्किल था। इससे सिर व आंखों में दर्द होने लगा था। इसलिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर लगातार पढ़ाई जारी रखी। मेरा सपना डॉक्टर बनना है। इसके लिए विज्ञान संकाय से अध्ययन करना है। व्यवसायी पिता राजबीर सिंह ने भी शिक्षकों की तरह प्रोत्साहित किया।
तय शेड्यूल से पढ़ाई कर हासिल किए 99.6 प्रतिशत
शहर के सेक्टर तीन में रहने वाले लक्ष्य ने 10वीं की परीक्षा में 99.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पठानिया पब्लिक स्कूल के इस छात्र ने तय शेड्यूल से पढ़ाई कर यह लक्ष्य हासिल किया है। सीबीएसई के परिणाम जारी होने के बाद छात्र के पिता विदेश मंत्रालय के निदेशक डॉ. राजीव कौशिक ने अमर उजाला से बेटे की सफलता की खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि महामारी व लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद रहे। ऐसे में घर रह कर पढ़ना थोड़ी परेशानी भरा रहा। ऑनलाइन पढ़ाई को व्यवस्थित ढंग से करने के लिए शेड्यूल बनाया। इसी के तहत अध्ययन कर सफलता प्राप्त की। उसका सपना इंजीनियर बनने का है। इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रहा है।
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मूलरूप से करनाल हाल राजेंद्र नगर निवासी साकेत ने कहा कि कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन में अध्ययन करना मुश्किल रहा। ऑनलाइन पढ़ाई ही अध्ययन का एकमात्र विकल्प था। स्कूल के शिक्षकों की सभी कक्षाएं लेना व पढ़ाई करना आंखों व सिर दर्द का बड़ा कारण बना गया था। इस स्थिति से बचते हुए शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की। परीक्षा से पहले पुराने प्रश्न पत्र हल किए। वार्षिक परीक्षा की पूरी तैयारी थी, मगर परीक्षा नहीं होना दुखद रहा। पेपर होते तो और बेहतर होता। परीक्षा में बेहतर अंक सेल्फ स्टडी की वजह से मिले। शिक्षकों का भी पूरा सहयोग मिला। अभिभावकों ने महामारी काल में प्रेरित व प्रोत्साहित किया।
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साकेत को बनना है इंजीनियर
पठानिया पब्लिक स्कूल के छात्र साकेत का सपना इंजीनियर बनना है। इसके लिए नॉन मेडिकल विषय लेकर पढ़ाई करनी है। नई कक्षा में और ज्यादा मेहनत से पढ़ाई कर अपना लक्ष्य हासिल करना है। पिता सुरेंद्र कुमार महला खेल विभाग में अधिकारी हैं। खुद तलवारबाजी का शौक रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्पर्धा में शामिल हो चुका हूं। यह अभियान जारी रहेगा।
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परीक्षा होती तो और बेहतर होता...
सीबीएसई की 10वीं कक्षा के परिणाम में 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। ये अंक मासिक टेस्ट व प्री-बोर्ड के प्रदर्शन के आधार पर मिले हैं। परीक्षा होती हो और बेहतर होता। परीक्षा की तैयारी पूरी थी। परीक्षा परिणाम जानने के बाद अमर उजाला से हुई बातचीत में प्रीति विहार निवासी धीरज ने यही कहा। अपनी सफलता की खुशी साझा करते हुए छात्र ने कहा कि महामारी के कारण परीक्षा नहीं हुई। परीक्षा होती तो और बेहतर होता। उस परिणाम की ज्यदा खुशी होती। परीक्षा के लिए जी-जान से तैयारी की थी। शुरू में ऑनलाइन पढ़ाई में कुछ दिक्कतें रही, मगर शिक्षकों के सहयोग से उनका समाधान हो गया। महामारी के कारण ऑनलाइन पढ़ाई हुई। स्कूल लगता तो कक्षा में ओर बेहतर ढंग से विद्यार्थी पढ़ पाते। कक्षा में अध्ययन का कोई विकल्प नहीं है। स्कूल बंद होने से प्रेक्टिकल काफी प्रभावित हुए। इसलिए अब आगे और ज्यादा मेहनत करनी होगी। मेरा लक्ष्य इंजीनियर बनने का है। पिता महावीर निजी कंपनी के सीनियर मैनेजर हैं। मां सुमन ने भी घर पर हर समय मुझे प्रोत्साहित किया।
ऑनलाइन लगातार पढ़ना मुश्किल हुआ तो अंतराल पर की पढ़ाई
सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा में सिमरन कौर ने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इस सफलता से परिवार व स्कूल में खुशी का माहौल है। अपनी खुशी अमर उजाला के साथ साझा करते हुए चिन्योट कॉलोनी में रहने वाली सिमरन ने कहा कि नियमित अध्ययन के कारण यह लक्ष्य हासिल करना आसान हुआ है। सैंपल पेपर व स्कूल की सभी ऑनलाइन कक्षाएं लेने के अलावा घर पर किताबें पढ़ी। ट्यूशन नहीं लगाया। घर पर जितना समय मिलता पढ़ाने पर जोर रहता। ऑनलाइन पढ़ाई लगातार करना मुश्किल था। इससे सिर व आंखों में दर्द होने लगा था। इसलिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर लगातार पढ़ाई जारी रखी। मेरा सपना डॉक्टर बनना है। इसके लिए विज्ञान संकाय से अध्ययन करना है। व्यवसायी पिता राजबीर सिंह ने भी शिक्षकों की तरह प्रोत्साहित किया।
तय शेड्यूल से पढ़ाई कर हासिल किए 99.6 प्रतिशत
शहर के सेक्टर तीन में रहने वाले लक्ष्य ने 10वीं की परीक्षा में 99.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पठानिया पब्लिक स्कूल के इस छात्र ने तय शेड्यूल से पढ़ाई कर यह लक्ष्य हासिल किया है। सीबीएसई के परिणाम जारी होने के बाद छात्र के पिता विदेश मंत्रालय के निदेशक डॉ. राजीव कौशिक ने अमर उजाला से बेटे की सफलता की खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि महामारी व लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद रहे। ऐसे में घर रह कर पढ़ना थोड़ी परेशानी भरा रहा। ऑनलाइन पढ़ाई को व्यवस्थित ढंग से करने के लिए शेड्यूल बनाया। इसी के तहत अध्ययन कर सफलता प्राप्त की। उसका सपना इंजीनियर बनने का है। इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रहा है।