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कोवैक्सीन रिसर्च का दूसरा चरण अंतिम दौर में, तीसरा होगा जल्द शुरू
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Second phase of covaxine research in final round, third will start soon
रोहतक। स्वदेशी कोवैक्सीन की रिसर्च का दूसरा चरण अंतिम दौर में है। इसके बाद तीसरे फेज की शुरूआत होगी। इसमें पहले की तुलना में अधिक लोगों को कोवैक्सीन की डोज लगाई जाएगी। रिसर्च में अभी तक सबसे अधिक उम्मीद यह है कि पीजीआईएमएस के 130 वालंटियरों में से किसी को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि तीसरे फेज की रिसर्च में संस्थान को वालंटियरों के चयन के अधिक विकल्प होंगे।
पीजीआईएमएस में चल रही स्वदेशी कोवैक्सीन रिसर्च के को-इंवेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा के अनुसार पहले फेज में 80 व दूसरे फेज में 50 वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दी गई थी। अब दूसरे फेज की रिसर्च में शामिल वालंटियरों को दूसरी डोज दी जाएगी। यह डोज पहली डोज के 28 दिन के अंतराल पर दी जानी है। इसके बाद तीसरे फेज की रिसर्च में वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दी जाएगी। इसमें वालंटियर की आयु और संख्या में फर्क आएगा। इसमें वालंटियरों की संख्या अधिक रखी जाएगी, इस संख्या के बारे में अभी तय नहीं है। उम्मीद है कि तीसरे फेज की रिसर्च 15 अक्तूबर के आसपास शुरू कर दी जाएगी। रिसर्च पूरी होने में छह माह का समय लगेगा। वैक्सीन से अधिक उम्मीद इसलिए है क्योंकि अभी तक सभी वालंटियर स्वस्थ हैं और किसी को कोई परेशानी नहीं हुई है। वैक्सीन की डोज मरीज को बीमारी से लड़ने की ताकत देती है।
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हेल्थ वर्करों को दी जा सकती है वैक्सीन की डोज
वहीं सूत्रों की मानें तो तीसरे फेज में हेल्थ वर्करों को कोवैक्सीन की डोज दी जा सकती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि वैक्सीन पहले फेज के टेस्ट में क्लीयर हो गई थी। इसमें वालंटियरों के शरीर में चार गुणा एंटीबॉडी मिली थी, जोकि समय के हिसाब से बढ़नी है। रिसर्च में यह देखना है कि एंटीबॉडी कब तक शरीर में असर दिखाएगी और व्यक्ति को बूस्टर डोज की जरूरत कब होगी।
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पीजीआईएमएस में चल रही स्वदेशी कोवैक्सीन रिसर्च के को-इंवेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा के अनुसार पहले फेज में 80 व दूसरे फेज में 50 वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दी गई थी। अब दूसरे फेज की रिसर्च में शामिल वालंटियरों को दूसरी डोज दी जाएगी। यह डोज पहली डोज के 28 दिन के अंतराल पर दी जानी है। इसके बाद तीसरे फेज की रिसर्च में वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज दी जाएगी। इसमें वालंटियर की आयु और संख्या में फर्क आएगा। इसमें वालंटियरों की संख्या अधिक रखी जाएगी, इस संख्या के बारे में अभी तय नहीं है। उम्मीद है कि तीसरे फेज की रिसर्च 15 अक्तूबर के आसपास शुरू कर दी जाएगी। रिसर्च पूरी होने में छह माह का समय लगेगा। वैक्सीन से अधिक उम्मीद इसलिए है क्योंकि अभी तक सभी वालंटियर स्वस्थ हैं और किसी को कोई परेशानी नहीं हुई है। वैक्सीन की डोज मरीज को बीमारी से लड़ने की ताकत देती है।
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हेल्थ वर्करों को दी जा सकती है वैक्सीन की डोज
वहीं सूत्रों की मानें तो तीसरे फेज में हेल्थ वर्करों को कोवैक्सीन की डोज दी जा सकती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि वैक्सीन पहले फेज के टेस्ट में क्लीयर हो गई थी। इसमें वालंटियरों के शरीर में चार गुणा एंटीबॉडी मिली थी, जोकि समय के हिसाब से बढ़नी है। रिसर्च में यह देखना है कि एंटीबॉडी कब तक शरीर में असर दिखाएगी और व्यक्ति को बूस्टर डोज की जरूरत कब होगी।
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