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स्कूल और यूनिवर्सिटी तक बढ़ेगा संस्कृत भाषा का दायरा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 08 Jan 2016 02:20 AM IST
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विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। यूजीसी ने भारतीय भाषाओं के विकास में संस्कृत
के योगदान के मद्देनजर इस भाषा के अध्यापन के लिए यह कदम उठाया है।
पहली और दूसरी डिग्री स्तर पर आधुनिक भारतीय भाषाओं, प्राचीन भारतीय इतिहास, प्राच्यविद्या और भारतीय दर्शन जैसे विषयों में संस्कृत भाषा को शामिल किया जाएगा। इसके लिए यूजीसी ने देशभर की 18 यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की एक कमेटी का गठन कर दिया है।
इस कमेटी में एमडीयू रोहतक के वीसी को भी शामिल किया गया है।
यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रोफेसर एच देवराज ने बुधवार को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में भी संस्कृत के महत्व को शामिल किया गया था।
बताया जाता है कि यूजीसी ने आधुनिक शिक्षा पद्धति में संस्कृत का अभाव देखते हुए नई पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है। कमेटी के सभी सदस्यों से 13 जनवरी 2016 तक ई-मेल के जरिये सुझाव मांगे गए हैं।
एमडीयू सहित 18 यूनिवर्सिटी शामिल
यूजीसी द्वारा गठित कमेटी में एमडीयू रोहतक के अलावा राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति (आंध्रप्रदेश), कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत यूनिवर्सिटी दरभंगा, बिहार, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ कठवारिया सराय, नई दिल्ली, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जनकपुरी, नई दिल्ली, श्री सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी वरवल जूनागढ़, गुजरात, कर्नाटक संस्कृत यूनिवर्सिटी चमरेंद्र संस्कृत महापाठशाला बंगलूरू, कर्नाटक, श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी कलाड़ी, एर्नाकुलम केरल, महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक यूनिवर्सिटी उज्जैन, मप्र, कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत यूनिवर्सिटी रामटेक नागपुर, महाराष्ट्र, श्री जगन्नाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी श्रीविहार पुरी, ओडीशा, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी भंकरौता जयपुर, राजस्थान, संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी वाराणसी, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी भद्राबाद हरिद्वार, उत्तराखंड, जादवपुर यूनिवर्सिटी जादवपुर कोलकाता, कर्नाटक यूनिवर्सिटी धारवाड़ कर्नाटक, वर्द्धमान यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी गुवाहाटी आसाम को शामिल किया गया है।
पहली और दूसरी डिग्री स्तर पर आधुनिक भारतीय भाषाओं, प्राचीन भारतीय इतिहास, प्राच्यविद्या और भारतीय दर्शन जैसे विषयों में संस्कृत भाषा को शामिल किया जाएगा। इसके लिए यूजीसी ने देशभर की 18 यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की एक कमेटी का गठन कर दिया है।
इस कमेटी में एमडीयू रोहतक के वीसी को भी शामिल किया गया है।
यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रोफेसर एच देवराज ने बुधवार को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में भी संस्कृत के महत्व को शामिल किया गया था।
बताया जाता है कि यूजीसी ने आधुनिक शिक्षा पद्धति में संस्कृत का अभाव देखते हुए नई पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है। कमेटी के सभी सदस्यों से 13 जनवरी 2016 तक ई-मेल के जरिये सुझाव मांगे गए हैं।
एमडीयू सहित 18 यूनिवर्सिटी शामिल
यूजीसी द्वारा गठित कमेटी में एमडीयू रोहतक के अलावा राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति (आंध्रप्रदेश), कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत यूनिवर्सिटी दरभंगा, बिहार, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ कठवारिया सराय, नई दिल्ली, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जनकपुरी, नई दिल्ली, श्री सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी वरवल जूनागढ़, गुजरात, कर्नाटक संस्कृत यूनिवर्सिटी चमरेंद्र संस्कृत महापाठशाला बंगलूरू, कर्नाटक, श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी कलाड़ी, एर्नाकुलम केरल, महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक यूनिवर्सिटी उज्जैन, मप्र, कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत यूनिवर्सिटी रामटेक नागपुर, महाराष्ट्र, श्री जगन्नाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी श्रीविहार पुरी, ओडीशा, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी भंकरौता जयपुर, राजस्थान, संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी वाराणसी, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी भद्राबाद हरिद्वार, उत्तराखंड, जादवपुर यूनिवर्सिटी जादवपुर कोलकाता, कर्नाटक यूनिवर्सिटी धारवाड़ कर्नाटक, वर्द्धमान यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी गुवाहाटी आसाम को शामिल किया गया है।