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आरक्षण देना गलत, हंसों की अपेक्षा कौवों को मिल रहा बढ़ावा

Sun, 27 Mar 2016 02:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक Updated Sun, 27 Mar 2016 02:24 AM IST
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saint Munishri Tarun Sagar said, reservation wrong, saint Munishri Tarun Sagar in rohtak
संत तरूण सागर - फोटो : amar ujala
देश में जाति और वर्ग के नाम पर दिया जा रहा आरक्षण खत्म कर दिया जाना चाहिए। इससे हंसों की अपेक्षा कौवों को ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है। देश संरक्षण के लिए आरक्षण को खत्म करना ही उचित है। अगर आरक्षण आर्थिक आधार, विकलांगता, अनाथ और शहीदों के बच्चों के लिए दिया जाता है तो इससे देश की तरक्की होगी।
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कड़वे प्रवचनों के लिए पहचाने जाने वाले प्रदेश के राजकीय अतिथि क्रांतिकारी राष्ट्र संत मुनिश्री तरुण सागर ने यह बात कही। वे शनिवार को सेक्टर-एक स्थित भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन गजरथ मंदिर में हुई पत्रकारवार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जितनी भी सरकारें आई हैं, सब की सब सत्ता को देश से ज्यादा तवज्जो दे रही हैं। इस वजह से ही देश में विकट परिस्थितियां बन रही हैं। ऐसे में संतों और मुनियों को संसद और सदन में प्रवचन देने की जरूरत है, क्योंकि असली खतरनाक लोग तो वहां बैठे हैं। अगर इन 10 हजार लोगों की सोच में परिवर्तन आ गया तो देश के अरबों लोगों से भी सुधरने की उम्मीद कर सकते हैं।
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राष्ट्र संत सागर ने कहा कि देश में फिर से महाभारत की जरूरत है। अब की बार युद्ध सत्य और अहिंसा की आवाज के लिए होगा। इससे पहले वाली महाभारत सत्ता और ताज के लिए हुई थी। इस युद्ध में सभी संतों को कृष्ण की भूमिका निभानी होगी और अर्जुन के धनुष को संभालना होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में आरक्षण की आड़ में पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ है, वह बहुत गलत है। ऐसी हिंसा करके आखिर उन लोगों को क्या मिल गया? दंगाइयों ने तो प्रदेश को 30 साल पीछे ले जाकर छोड़ दिया है।
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सामान तो बढ़िया पर पैकिंग घटिया
उन्होंने जैन समाज पर कहा कि उनका सामान तो बढ़िया है, लेकिन पैकिंग घटिया है। आज कल बढ़िया पैकिंग का सामान ही अधिक बिकता है। समाज सुधार के लिए संत एक मंच पर तो आ जाते हैं, लेकिन जब असली समय आता है तो वे बिखर कर अलग-अलग भाषा बोलने लगते हैं। कड़वे प्रवचन की निमंत्रण पत्रिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर राजेश जैन, धर्मपाल मकडौली, विजय जैन, राजेश जैन, विजय, प्रभाष जैन, दीप कुमार, ऋषिब जैन, पियूष, मनोज, अशोक, सतीश और राजीव जैन मौजूद रहे।

प्रत्येक नागरिक करे भारत माता की वंदना
राष्ट्र संत तरुण सागर ने कहा कि बदलते समय के साथ भारत और इंडिया में भी फर्क आ गया है। भारत साधना में जीता है और इसी वजह से पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन इंडिया में साधन है। जहां लोग अपने मनोरंजन से लेकर खाना खाने और आराम करने तक के साधनों में जीते हैं। इसी वजह से लोगों के चेहरे से हंसी वैसे गायब हो गई है, जैसे चुनाव जीतने के बाद राजनेता गायब हो जाते हैं।

आज घर में मेहमान आ जाए तो लोगों के चेहरे पर दबाव आ जाता है। इसलिए यह अंतर आ गया है। आज लोग इंडिया को ही प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि केवल भारत ही एक ऐसा देश है, जिसे भारत माता कहकर पुकारा जाता है। प्रत्येक नागरिक को भारत माता की वंदना करनी चाहिए।

देश विरोधी नारे लगाने वाले नागरिक नहीं
जेएनयू मामले पर राष्ट्र संत ने कहा कि देश में रहकर जो भारत विरोधी नारे लगाते हैं, वे देश की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। वे देश के नागरिक नहीं हैं। ऐसे में सरकार को जो उचित लगे, अपना काम करना चाहिए। अच्छे काम के लिए जो नेतृत्व करता है, वही अच्छा लीडर कहलाता है।


ताकत और शक्ति से ही होगा सुधार
सागर ने कहा कि संतों के पास उपदेश है और राजनेताओं के पास शक्ति। दोनों के मिलन से ही देश का सुधार हो सकता है। उन्होंने संसार में बढ़ती हुई हिंसा और आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आतंकवाद पूरे संसार में फैल चुका है और उसकी आंच भारत तक पहुंच चुकी है। कहा कि संत वहीं होता है, जिसकी जुबान और जीवन एक समान होता है और उन्हीं के उपदेशों व जीवन से संसार टिका हुआ है। 
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