फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Rohtak village rudki and mungan 2600 house

आस्था के जरिये पर्यावरण की शुद्धि, रुड़की व मुंगाण के 2600 घरों में दी जाएगी गूगल धूप की धूमणी

Sat, 08 Feb 2020 01:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 08 Feb 2020 01:15 AM IST
विज्ञापन
Rohtak village rudki and mungan 2600 house
nd-07.JPG
रोहतक। रोहतक जिले के 16 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित गांव रूड़की में माघ माह की चतुर्दशी पर आठ फरवरी शनिवार को दादी सती के मंदिर पर देश भर के श्रद्धालु जुटेंगे। हुड्डा गोत्र में दादी भदा सती के प्रति प्रगाढ़ मान्यता है। दादी भदा सती के मंदिर गांव रूडक़ी, आसन, किलोई व घुसकानी में प्रमुख रूप से बनाए गए हैं। इस वर्ष दादी सती का प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्वार किया गया है। इस प्राचीन मंदिर में दादी सती की नई प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रतिमा को गांव के लगभग 50 युवकों की टोली हरिद्वार से मूर्ति स्नान करवाकर पालकी से गांव तक पैदल लेकर आए। इसके बाद गांव में महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकालकर मूर्ति की स्थापना की गई।
विज्ञापन

गांव निवासी एवं जाट कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह हुड्डा ने बताया कि 8 फरवरी को 6 टोलियां बनाकर युवा रूड़की और मुंगान के लगभग 2600 घरों में पर्यावरण को शुद्ध किया जाएगा। दोनों गांव के लगभग 60 युवा मिलकर मिट्टी का अग्निकुंड और गूगल धूप लेकर गांव के हर घर में जाते हैं। इनमें से कोई भी बोलता नहीं बल्कि प्रत्येक टीम से एक युवा हर घर के दरवाजे खुलवाता जाता है और आवाज लगाता है कि धूप वाले आ गए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि गांव का कोई भी घर इस पवित्र धुएं के बगैर न रहे। वातावरण शुद्धि के लिए दादी भदा मंदिर में हवन यज्ञ के साथ एक क्विंटल से ज्यादा गूगल धूप का प्रयोग होगा। इस दिन गांव में दूध को बेचने की बजाय सारा दूध खीर बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
विज्ञापन

बैंगलोर से आए परिवार
बैंगलोर से आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित गोयल ने बताया कि लगभग 20 सदस्यों के साथ इस पवित्र आयोजन पर पहुंचा हूं। मेरे दादा टीकाराम, दयाराम व लाला लक्ष्मीचंद के परिवार पर दादी भदा का आशीर्वाद सदैव रहा है। दादी भदा की नई प्रतिमा बनवाने से लेकर स्थापित करने का संपूर्ण खर्च वही वहन करेंगे। इसके लिए इसके लिए मेरे परिवार के सदस्य बैंगलोर, सोनीपत, नरेला और चेन्नई से आए हैं। इसके अलावा दिल्ली, कलकत्ता, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि प्रदेशों से भी श्रद्धालु मनोकामना मांगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये है आस्था
गांव रूड़की में दक्षिण दिशा में स्थित मंदिर पर माघ महीने की चतुर्दशी के दिन भंडारा व मेला लगता है। जहां पर हुड्डा गोत्र से जुड़े हुए सभी गांवों के श्रद्धालु मंदिर आकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। राजस्थान के काशीबघोड़ा गांव तथा उसके आसपास के कई गांवों में भी इस दिन बुआ भदी के नाम पर बड़ा भारी मेला लगता है। गांव रूड़की में स्थित दादी भदा मंदिर की विशेष प्रगाढ़ आस्था क्षेत्र के लोगों की है। यहां पर जब से यह गांव बसा है तभी से गांव की दक्षिण दिशा में जोहड़ पर दादी का छोटा मंदिर था। परन्तु जब आस्था और श्रद्धालु बढऩे लगे तो 1985 में मंदिर का पुनर्निर्माण करके इसे बड़े मंदिर के रूप दिया गया। अब इस मंदिर का आकार और बढ़ा दिया गया है तथा दादी भदा की बड़ी प्रतिमा राजस्थान नई बनवाकर मंदिर में स्थापित की गई है।
ये है इतिहास
गांव निवासी एवं जाट कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह हुड्डा ने बताया कि हुड्डा गोत्र के दादा की शादी राजस्थान के गांव काशीबघोड़ा में हुई थी। शादी के बाद जब वे अपनी पत्नी भदी को लेकर आ रहे थे, तो रास्ते में जंगलों में कुछ लोगों ने उनका वध कर दिया। इस घटना के बाद दादी भदी अपने पति के साथ वहीं सती हो गई। पति के प्रति ऐसी श्रद्धा के चलतेे वह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गई। हुड्डा गोत्र के लोग दादी भदी को पूजने लगे। जब मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा था तो छोटे मंदिर की खुदाई करते समय इसके नीचे पुराने समय के मूर्तिनुमा दो पत्थर मिले थे। जिन पर देवी-देवताओं की आकृति है। इसको भगवान का रूप व वरदान मानकर दादी भदा की राजस्थान से बनवाकर लाई गई संगमरमर की प्रतिमा के दोनों पत्थरों को स्थापित करवा दिया गया।

मंदिर में दूल्हा-दुल्हन लेते हैं आशीर्वाद
दुल्हन शादी के बाद पहली बार जब गांव आती है तो वह दादी के मंदिर में आशीर्वाद प्राप्त करने जरूर आती है। इस गोत्र से जुड़ा हुआ कोई भी दुल्हा शादी के दिन दादी के मंदिर में आकर आशीर्वाद लेकर बारात में जाता है या फिर घुड़चढ़ी के दौरान यहां पर अपना मत्था जरूर टेककर जाता है। गांव में जो भी बच्चा पैदा होता है तो उसका पहला मुंडन भी उसकी माता द्वारा मंदिर में कराने की परंपरा सदियों से चली आ रही है ताकि दादी भदा सती का आशीर्वाद सदा उसके साथ रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed