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एमडीयू की लाइब्रेरी में लगी आग, लाखों की किताबें बचीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 18 May 2016 02:50 AM IST
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डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इर्फोमेशन साइंस के हॉल में लगी आग
- फोटो : amar ujala
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की विवेकानंद लाइब्रेरी के डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इर्फोमेशन साइंस के हॉल में दिन निकलते ही आग लग गई। दमकल कर्मियों के साथ छात्रों ने आग पर समय रहते काबू पा लिया। आग की चपेट में आने से हॉल में रखे दो कंप्यूटर और अन्य सामान खाक हो गए। गनीमत रही कि आग किताबों तक नहीं पहुंची।
मंगलवार सुबह करीब सात बजे विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारी लाइब्रेरी की सफाई करने के लिए पहुंचे। कर्मचारियों ने वहां बैठे 10-12 छात्रों को बाहर जाने के लिए कहा। छात्रों ने बाहर निकलते ही लाइब्रेरी के पिछले वाले हिस्से की बिल्डिंग से धुआं निकलता देखा। इस पर उन्होंने सफाई कर्मियों व अन्य स्टाफ को अवगत कराया। पता चलते ही लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने दमकल कर्मियों को फोन पर सूचना दी और खुद भी मौके पर पहुंच गए। तब तक छात्रों ने लाइब्रेरी में रखे फायर सिस्टम को उठाकर आग को बुझाना शुरू कर दिया। इसके बाद दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद सभी ने मिलकर आग पर काबू पाया। समय रहते आग पर काबू कर लिया गया, अन्यथा आग लाइब्रेरी में रखी किताबों तक पहुंच सकती थी। आग की चपेट में आने से हॉल में रखे दो कंप्यूटर, केबल, फर्नीचर व अन्य सामान जलकर राख हो गया। वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने मौका मुआयना किया। उन्होंने छात्रों की हिम्मत के लिए उनकी हौसला आफजाई की। लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने बताया कि शार्ट सर्किट के कारण आग लगना माना जा रहा है। फिलहाल इसे लेकर जांच-पड़ताल की जा रही है।
लाइब्रेरी में रखी हैं करीब साढ़े तीन लाख किताबें
लाइब्रेरी में भारतीय लेखकों के साथ-साथ विदेशी लेखकों समेत करीब साढ़े तीन लाख किताबों का संग्रह है। यूनिवर्सिटी में संचालित कोर्स से संबंधित काफी संख्या में किताबें रखी हैं। यदि किताबों तक आग पहुंच जाती तो यूनिवर्सिटी प्रशासन को बड़ा नुकसान तो होता ही, साथ ही बेशकीमती संग्रह भी खत्म हो जाता।
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धुआं निकालने के लिए तोड़े हॉल के सीसे
हॉल में आग लगने से वहां घुसना मुश्किल हो रहा था। चारों तरफ धुआं ही धुआं था। यूनिवर्सिटी प्रशासन को डर था कि आग कहीं फिर से न पकड़ ले। इस डर से उन्होंने हॉल और आसपास के शीशे तुड़वा दिए।
सभी की मेहनत से बची लाइब्रेरी : वीसी
वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने कहा कि आग को काबू करने में छात्र, सुरक्षाकर्मी और पुस्तकालय कर्मी समेत सभी लोगों ने मेहनत की है। उन्होंने सभी विभाग के अधिकारियों और छात्रों से अपील की कि बिजली के उपकरण जरूरत पड़ने पर ही खोले जाएं। साथ ही यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अभियंता को भी ऐसी घटनाओं की समीक्षा के निर्देश दिए।
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मंगलवार सुबह करीब सात बजे विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारी लाइब्रेरी की सफाई करने के लिए पहुंचे। कर्मचारियों ने वहां बैठे 10-12 छात्रों को बाहर जाने के लिए कहा। छात्रों ने बाहर निकलते ही लाइब्रेरी के पिछले वाले हिस्से की बिल्डिंग से धुआं निकलता देखा। इस पर उन्होंने सफाई कर्मियों व अन्य स्टाफ को अवगत कराया। पता चलते ही लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने दमकल कर्मियों को फोन पर सूचना दी और खुद भी मौके पर पहुंच गए। तब तक छात्रों ने लाइब्रेरी में रखे फायर सिस्टम को उठाकर आग को बुझाना शुरू कर दिया। इसके बाद दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद सभी ने मिलकर आग पर काबू पाया। समय रहते आग पर काबू कर लिया गया, अन्यथा आग लाइब्रेरी में रखी किताबों तक पहुंच सकती थी। आग की चपेट में आने से हॉल में रखे दो कंप्यूटर, केबल, फर्नीचर व अन्य सामान जलकर राख हो गया। वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने मौका मुआयना किया। उन्होंने छात्रों की हिम्मत के लिए उनकी हौसला आफजाई की। लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने बताया कि शार्ट सर्किट के कारण आग लगना माना जा रहा है। फिलहाल इसे लेकर जांच-पड़ताल की जा रही है।
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लाइब्रेरी में रखी हैं करीब साढ़े तीन लाख किताबें
लाइब्रेरी में भारतीय लेखकों के साथ-साथ विदेशी लेखकों समेत करीब साढ़े तीन लाख किताबों का संग्रह है। यूनिवर्सिटी में संचालित कोर्स से संबंधित काफी संख्या में किताबें रखी हैं। यदि किताबों तक आग पहुंच जाती तो यूनिवर्सिटी प्रशासन को बड़ा नुकसान तो होता ही, साथ ही बेशकीमती संग्रह भी खत्म हो जाता।
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धुआं निकालने के लिए तोड़े हॉल के सीसे
हॉल में आग लगने से वहां घुसना मुश्किल हो रहा था। चारों तरफ धुआं ही धुआं था। यूनिवर्सिटी प्रशासन को डर था कि आग कहीं फिर से न पकड़ ले। इस डर से उन्होंने हॉल और आसपास के शीशे तुड़वा दिए।
सभी की मेहनत से बची लाइब्रेरी : वीसी
वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने कहा कि आग को काबू करने में छात्र, सुरक्षाकर्मी और पुस्तकालय कर्मी समेत सभी लोगों ने मेहनत की है। उन्होंने सभी विभाग के अधिकारियों और छात्रों से अपील की कि बिजली के उपकरण जरूरत पड़ने पर ही खोले जाएं। साथ ही यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अभियंता को भी ऐसी घटनाओं की समीक्षा के निर्देश दिए।