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Rohtak News: बैंककर्मी बनकर ऑडिट विभाग के रिटायर्ड कर्मी के खाते से निकाले 1.24 लाख रुपये
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। साइबर ठग ने बैंककर्मी बनकर ऑडिट विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी भालौठ गांव निवासी रामकुमार से 6 अगस्त को 1.24 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने सोमवार को साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। साइबर क्राइम में इसे फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम कहते हैं।
भालौठ गांव निवासी रामकुमार (77) ने बताया कि वे लोकल ऑडिट विभाग से रिटायर्ड हैं। एसबीआई की गांव स्थित ब्रांच में खाता खुलवा रखा है। उसी में विभाग की तरफ से पेंशन आती है। 6 अगस्त को उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आई थी।
कहा कि वह बैंक से बोल रहा है। आपकी पेंशन आईडी बनाई जानी है। इसके लिए बैंक खाते की डिटेल दे दीजिए। उन्होंने विश्वास करके डिटेल बता दी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। जब फोन ठीक हुआ तो तीन बार में उनके खाते से 1.24 लाख रुपये निकले मिले।
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क्या है फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम
साइबर क्राइम थाने से एक्सपर्ट एएसआई दयानंद उर्फ डीएन का कहना है कि बैंककर्मी बनकर ठगी करने को साइबर क्राइम में फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम कहा जाता है। इसमें अपराधी खुद को बैंक अधिकारी या किसी विश्वसनीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर गोपनीय जानकारी जैसे पासवर्ड, ओटीपी या बैंक खाते का विवरण हासिल कर लेते हैं।
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बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर नहीं मांगता गोपनीय ब्योरा
एक्सपर्ट एएसआई दयानंद ने बताया कि किसी भी फोन कॉल, ई-मेल या संदेश पर अपनी बैंक खाता संख्या, सीवीवी, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या अन्य किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी न दें क्योंकि बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान कभी भी फोन या ई-मेल पर आपकी ऐसी जानकारी नहीं मांगता। अज्ञात नंबरों से सावधान रहें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
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रोहतक। साइबर ठग ने बैंककर्मी बनकर ऑडिट विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी भालौठ गांव निवासी रामकुमार से 6 अगस्त को 1.24 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने सोमवार को साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। साइबर क्राइम में इसे फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम कहते हैं।
भालौठ गांव निवासी रामकुमार (77) ने बताया कि वे लोकल ऑडिट विभाग से रिटायर्ड हैं। एसबीआई की गांव स्थित ब्रांच में खाता खुलवा रखा है। उसी में विभाग की तरफ से पेंशन आती है। 6 अगस्त को उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आई थी।
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कहा कि वह बैंक से बोल रहा है। आपकी पेंशन आईडी बनाई जानी है। इसके लिए बैंक खाते की डिटेल दे दीजिए। उन्होंने विश्वास करके डिटेल बता दी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। जब फोन ठीक हुआ तो तीन बार में उनके खाते से 1.24 लाख रुपये निकले मिले।
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क्या है फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम
साइबर क्राइम थाने से एक्सपर्ट एएसआई दयानंद उर्फ डीएन का कहना है कि बैंककर्मी बनकर ठगी करने को साइबर क्राइम में फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग स्कैम कहा जाता है। इसमें अपराधी खुद को बैंक अधिकारी या किसी विश्वसनीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर गोपनीय जानकारी जैसे पासवर्ड, ओटीपी या बैंक खाते का विवरण हासिल कर लेते हैं।
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बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर नहीं मांगता गोपनीय ब्योरा
एक्सपर्ट एएसआई दयानंद ने बताया कि किसी भी फोन कॉल, ई-मेल या संदेश पर अपनी बैंक खाता संख्या, सीवीवी, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या अन्य किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी न दें क्योंकि बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान कभी भी फोन या ई-मेल पर आपकी ऐसी जानकारी नहीं मांगता। अज्ञात नंबरों से सावधान रहें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।