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Haryana: कोवैक्सीन के बाद पीजीआईएमएस रोहतक अब डेंगू की वैक्सीन के ट्रायल के लिए चयनित

Sun, 30 Oct 2022 08:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 30 Oct 2022 08:00 AM IST
सार

वैक्सीन के बाद पीजीआईएमएस अब डेंगू की वैक्सीन का ट्रायल करने की तैयारी में है। आईसीएमआर की ओर से फेज थ्री रिसर्च के लिए संस्थान को चयनित किया गया है।

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PGIMS Rohtak selected for trial of dengue vaccine
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना से बचाव के लिए बनी कोवैक्सीन की तरह पीजीआईएमएस अब डेंगू से बचाव की वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल करने की तैयारी में है। इसके लिए आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की ओर से फेज थ्री रिसर्च के लिए संस्थान को चयनित किया गया है। जैसे ही इसकी पूर्ण अनुमति मिलती है तो संस्थान इस वैक्सीन का वॉलंटियरों पर ट्रायल शुरू कर देगा। यदि इसमें कामयाबी मिलती है तो डेंगू से निपटना आसान हो जाएगा। 

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हर साल डेंगू की चपेट में लाखों लोग आते हैं और प्लेटलेट्स अधिक गिरने व अन्य कारणों के चलते उनकी मौत हो जाती है। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए लोग बकरी के दूध से लेकर रक्तदाताओं व प्लेटलेट्स डोनरों की तलाश करते हैं। अभी तक डॉक्टर कोरोना की तरह लक्षण के आधार पर ही इसका उपचार करते आ रहे हैं।
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ऐसी कोई दवा व इंजेक्शन नहीं है जिससे डेंगू पीड़ित का उपचार हो सके। कोरोना वैक्सीन की तरह ही अब डेंगू की वैक्सीन देश में आने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि यह ट्रायल कामयाब होता है तो यह वैक्सीन देश के हर व्यक्ति को उपलब्ध हो जाएगी और डेंगू से मरने वालों की संख्या को काफी कम किया जा सकेगा। 
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गौरतलब है कि पीजीआईएमएस ने कोरोना का टीका कोवैक्सीन की तीन चरणों की रिसर्च में अहम योगदान दिया था। जिले के अलावा प्रदेश के लोगों ने भी मानवता धर्म निभाते हुए स्वयं को रिसर्च के लिए समर्पित कर दिया था। 

ये कंपनियां हैं दावेदार
‘द इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड’ (आईआईएल) को डेंगू के टीके के पहले चरण के परीक्षण की अनुमति मिल चुकी है। दो अन्य कंपनियां पैनेशिया बायोटेक लिमिटेड और सनोफी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वैक्सीन विकसित की जा रही है। दोनों को ही क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। इसमें पैनेशिया बायोटेक लिमिटेड ने फेज-1 और फेज-2 के ट्रायल पूरे कर लिए हैं जबकि सनोफी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की वैक्सीन को अमेरिका में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और इसने भारत में परीक्षण करना शुरू कर दिया है।


यूरोप में हो चुका ट्रायल
विशेषज्ञों की मानें तो वैक्सीन का ट्रायल पश्चिमी यूरोपीय देशों में पूरा हो चुका है। अब भारत में तीसरे फेज का रिसर्च होना है। इस रिसर्च के पूरा होते ही डेंगू को हराना आसान हो जाएगा। 

संस्थान ने कोवैक्सीन की रिसर्च में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा यदि डेंगू के वैक्सीन की रिसर्च की अनुमति मिलती है तो उसे भी पूरा किया जाएगा। हर साल लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं और कई लोगों की मौत होती है। साफ पानी में पनपने वाले डेंगू के मच्छर से हर साल लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ता है। ऐसी रिसर्च की जिम्मेदारी हमारे एक्सपर्ट डॉ. सविता वर्मा व डॉ. रमेश वर्मा निभाते हैं। इन्होंने ही कोवैक्सीन की रिसर्च भी पूरी की थी। - डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस

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