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Rohtak: पीजीआई की मेडिकल छात्रा को पांच दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, आरोपियों ने पीड़िता से 14 लाख 72 हजार ठगे

Sun, 25 Aug 2024 09:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sun, 25 Aug 2024 09:54 AM IST
सार

साइबर ठग ने छात्रा को धमकाया और फिर किसी दूसरे से फोन पर बात कराई, जिसने गिरफ्तारी का डर दिखाया। चूंकि उसके नाम पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज है और आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है। छात्रा अपने आपको निर्दोष बताती रही...

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PGI medical student digital arrested for five days, defrauded of Rs 14.72 lakh
साइबर ठगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोहतक में साइबर अपराधियों ने एक मेडिकल छात्रा काे डिजिटल अरेस्ट करके उससे करीब 14.72 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। साइबर अपराधियों ने नकली सीबीआई और हैदराबाद पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी बनकर इस वारदात को अंजाम दिया।

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साइबर ठगों ने छात्रा को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा और इस दौरान समय-समय पर पैसे अपने खातों में मंगाते रहे। इसके बाद जब छात्रा ने बात परिजन को बताई तो पता चला कि उनके साथ साइबर धोखाधड़ी हो गई है। पीड़ित छात्रा ने साइबर थाने में मामले की शिकायत की। पीड़ित छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। हरियाणा में डिजिटल अरेस्टिंग की शुरुआत फरीदाबाद से हुई थी, जहां पर बीटेक छात्रा से करीब आठ लाख रुपये की ठगी हुई थी और उसे तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट किया था।
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मूलरूप से कर्नाटक के बिडर निवासी एस. भावना रोहतक स्थित पीजीआईएमएस की मेडिकल की छात्रा है। वह यहां से कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट से (एमडी प्रथम वर्ष) की पढ़ाई कर रही है। 9 अगस्त को हैदराबाद से छात्रा के पास कॉल आई, जिसमें एक महिला ने खुद को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से बताया। आरोपी महिला ने छात्रा से कहा कि तुमने एसबीआई का क्रेडिट कार्ड ले रखा है और उसका बिल जमा नहीं किया है। इस पर छात्रा ने क्रेडिट कार्ड से इन्कार किया तो उन्होंने छात्रा की कॉल हैदराबाद पुलिस को ट्रांसफर कर दी।
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साइबर ठग ने छात्रा को धमकाया और फिर किसी दूसरे से फोन पर बात कराई, जिसने गिरफ्तारी का डर दिखाया। चूंकि उसके नाम पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज है और आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है। छात्रा अपने आपको निर्दोष बताती रही, लेकिन उन्होंने यह कहकर फोन काटने की चेतावनी दी कि अब तो आईपीएस अधिकारी ही इस मामले को देखेंगे। फोन काटने से पहले साइबर ठग ने छात्रा को एक नंबर दिया कि यदि मामला सुलझाना है तो इस नंबर पर बात कर लो।

इसी दिन छात्रा ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो वीडियो कॉल आई और उससे दस्तावेज मांगे, साथ ही बैंक की पासबुक के अंतिम पेज की कॉपी मांगी। इसके बाद साइबर ठगों ने छात्रा को सुप्रीम कोर्ट के कागजात, मनी लांड्रिंग व आतंकवाद से जुड़े कागजात की कॉपी भेज दी। इन्हें देखकर छात्रा डर गई। उन्होंने छात्रा से कहा कि वह सीबीआई के खुफिया विभाग से है। आपको डिजिटल तरीके से गिरफ्तार कर लिया है। छात्रा को चेतावनी दी कि अब हम आप पर चार दिन तक निगरानी रखेंगे और इस तरह असल में गिरफ्तार नहीं होना है तो वीडियो कॉल पर रहोगी।

आरोपियों ने छात्रा से चार बार में ठगी राशि

ठगों ने छात्रा से कहा कि उसके खाते में जो राशि है, उसे भेजो। यदि वह राशि आतंकवादियों से नहीं आई है तो उसे वापस कर दिया जाएगा। 12 अगस्त को डिजिटल अरेस्टिंग के दौरान छात्रा ने पीजीआईएमएस के एसबीआई से साइबर ठगों द्वारा दिए गए बैंक खाते में 8.76 लाख रुपये, 13 अगस्त को 2.46 लाख रुपये और 14 अगस्त को 3 लाख रुपये भेज दिए। 15 अगस्त को वेरिफिकेशन और सुप्रीम कोर्ट के वकील की फीस के नाम पर 50 हजार रुपये डलवाकर कुल 14.72 लाख रुपये की ठगी कर ली। इसके बाद ही छात्रा को डिजिटल अरेस्टिंग से छोड़ा गया।

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