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Rohtak News: पीजीआई निदेशक बोले-नंबर गेम की होड़ में न फंसें, मेहनत से करें पढ़ाई

Fri, 19 Dec 2025 12:53 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 12:53 AM IST
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PGI Director said: Don't get caught up in the numbers game, study diligently.
संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। पीजीआई के निदेशक डाॅ. एसके सिंघल का सुझाव है कि बच्चों को मेहनत से पढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्हें परीक्षाओं में नंबर गेम में न फंसाएं। इससे तनाव पैदा होता है। इससे बच्चों का स्वाभाविक विकास नहीं हो पाता।
आईएमटी स्थित अमर उजाला कार्यालय में वीरवार को अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आए डाॅ. सिंघल ने बच्चों की बोर्ड परीक्षा में मां की भूमिका विषय पर बात रखी। कहा, बच्चों की इच्छा जानें। खुला माहौल दें। सही-गलत बताना मां-बाप का दायित्व है। इसे बखूबी निभाएं।
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पीजीआई की मनोचिकित्सक डॉ. अवीशा महला ने कहा कि कई बार घरवाले कहते तो कुछ नहीं लेकिन बर्ताव बहुत रूखा कर देते हैं या फिर बातचीत ही नहीं करते, यह भी बच्चों के मन को गहरे से चोट पहुंचाता है। तनाव देता है। इससे बचें। बच्चों को हौसला दें, प्यार से समझाएं।
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शिक्षिका गीता रानी ने कहा कि बच्चों से कंपटीशन और कंपेरिजन की बात न करें। मेहनत से पढ़ने को कहें। अभिभावक संघ की सीमा मलिक ने कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। इससे बच्चे निराश होते हैं। परीक्षा को हौवा न बनाएं।
हेड टीचर निशा चौहान ने आपबीती सुनाई...बेटी बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थी। कोचिंग में तीन लाख रुपये जमा करा दिए। लेकिन, एक दिन उसने कहा कि उससे यह न हो पाएगा। इतना खर्च करके लौटना कठिन था लेकिन उसकी बात सुनी। आज वह दिल्ली में फैशन डिजाइनर है।
सोनिया बल्हारा ने कहा, अभिभावक-शिक्षक संवाद की अहमियत बताई। इस दौरान रचना, बबीता नागर, निशा, रचना, सीमा मलिक, भागवंती, रीतू, स्वीटी, रेनू, सीमा मोर, पूनम, अंजू, ईशा, रीना व सुमन ने परीक्षा के दौरान बच्चे पर गैरजरूरी दबाव न डालने की सलाह दी।
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सत्य यही है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान बच्चों पर सर्वाधिक दबाव मां-बाप और शिक्षक ही डालते हैं। बच्चों को बताएं कि परीक्षा के लिए नहीं, ज्ञान के लिए पढ़ें। ठीक से होमवर्क करें। प्रदर्शन स्वतः सुधर जाएगा।
- रुपांशी हुड्डा, जिला एफएलएन समन्वयक।
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बच्चों की किसी से तुलना न करें। हर बच्चा अलग है। उसकी खूबियां देखें और उसी दिशा में अपने ढंग से बढ़ने दें। परीक्षा में आशा के अनुरूप परिणाम न आए तो भी उसका हौसला बढ़ाएं, साथ खड़े हों।
- सुषमा ढाका, चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर।
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शिक्षक भी बच्चों की रुचि समझें। हर कोई हर क्षेत्र के लिए नहीं बना। बच्चों को सही-गलत की जानकारी प्यार से दें। दोस्ताना व्यवहार से अच्छे परिणाम आएंगे। दबाव डालने से कुछ न होगा।
- सुभिता छिक्कारा, मुख्य शिक्षिका, सेक्टर-तीन, प्राथमिक विद्यालय
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बच्चे की ताकत और कमजोरी समझें। विजन साफ होगा तो आगे बढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। पिता के मुकाबले मां बच्चों को ज्यादा अच्छे से समझती है। घड़ी कठिन हो तो भी बच्चे को संभाल लेती है। - बाला देवी, सेवानिवृत शिक्षिका।

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बोर्ड परीक्षा में बहुत तनाव होता है। बच्चों पर यह कतई न डालें। बच्चों की च्वाइस को समझें। कोई कला क्षेत्र में जाना चाहता है लेकिन जबरन साइंस में दाखिला करा देंगे तो क्या ही नतीजा आएगा। - डॉ. जेसिका गुलिया, डेंटल इंटर्न।
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